RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

भोजन तो हम 3 बार भी कर लेते हैं भजन क्यों नही – मुनि निपुण रत्न मसा   नशा करने से होती है शान खराब

पारा से प्रभाष ए जैन “मन” की रिपोर्ट
पारा। सच्चा दोस्त न्यूज़।  जब हम 1 दिन भोजन नहीं करते तो हमे कमजोरी महसूस होती है और इसके बाद अगर दूसरे फिर तीसरे दिन भी लगातार बिना कुछ खाये रहे तो क्या हम ठीक रह सकते हैं ठीक इसी प्रकार हम भोजन के बिना तो रह नही पाते पर भजन किये बिना महीनों यहां तक कि सालों निकाल लेते हैं। जबकि इसका उल्टा होना चाहिए जब भी हम भजन न करे तो रात को नींद तक नही आनी चाहिए। किसी ने हनुमान को पूछा तुम राम को कब याद करते हो तो हनुमान ने कहा मैं राम को याद नही करता, हनुमान ने कहा कि जब मैं जब राम को भूलता ही नही तो याद करने की बात कहा से आती है। गाय को अच्छी घास खिलाते हैं तो वो अच्छा दूध देती है इसी प्रकार हमे भी वो ही भोजन करना चाहिए जिससे भजन करने में मन लगे। हमारा पेट कोई कब्रिस्तान नही जिसमे हम जानवरों को मार कर उसमें डाले।  पुण्य सम्राट आचार्य देवेश श्रीमद विजय जयंत सेन सूरीश्वरजी मसा के प्रथम पट्टधर धर्म दिवाकर नित्यसेन सूरीश्वरजी के शिष्य रत्न मुनि निपुण रत्न मसा ने उक्त प्रेरक प्रवचन पारा आने के पूर्व ग्राम खरडू बड़ी में ग्रामीणों के समक्ष दिए। मुनिश्री ने कहा कि जब तक हम डॉक्टर से नही मिलते तब तक हमे हमारी किसी भी बीमारी की सही दवाई नही मिलती ठीक उसी प्रकार जब तक हम सद्गुरु की शरण मे नही जाए तब तक हमे भगवान भी नही मिल सकते। सद्गुरु हमे बताते और सिखाते हैं कि किस प्रकार भजन करें की हमे  भगवान मिल जाये। नशा करने के लिए शराब पीना ज़रूरी नही है लेकिन अगर कोई शराब की दुकान पर ही खड़ा दिखाई दे तो उसे हम शराबी समझने लगते हैं । ठीक इसी तरह  संगत का असर भी गहरा होता है। गाड़ी अगर 50 लाख की हो और ड्रायवर शराबी दिखाई दे तो हम उसमें नही बैठना पसंद करेंगे इससे साफ पता चलता है कि शराबी की समाज मे कोई कदर नही होती है और जब शराबी की समाज मे कदर होती ही नही है तो शराब पीना ही क्यों। हमे सद्गुरु के पास इसलिए जाना चाहिए कि क्योंकि उनका पूरा जीवन और शरीर भगवान को समर्पित होता है। जब किसी के  मन मे गाली होगी तो ही  वो गाली देता है वही इसके उलट अगर मन मे भगवान का नाम होगा तो चाहे कोई भी मुसीबत हो जाये चाहे जितने कष्ट मिले मुहं से भगवान का नाम ही निकलेगा। जब सच्चे दिल से भगवान का भजन किया जाए तो छोटे – मोटे कष्ट का पता ही नही चलता है। जब हम भगवान की भक्ति में लीन होंगे और कोई गाली  भी दे तो भगवान का नाम सुनाई देगा। वर्तमान में हर कोई पैसे के पीछे पागल हो रहा है जबकि पैसा उनसे दूर भागता है। वहीं अगर हम भगवान के पीछे पागल होंगे तो पैसा भी हमारे पीछे पीछे चला आएगा। बीड़ी, सिगरेट तथा शराब से दूर होने की हिदायत देते मुनिश्री ने कहा कि हमे अगर पागल ही बनना है तो भगवान के पीछे पागल बनना चाहिए क्योंकि एक किलो मिट्टी और 1 ग्राम सोने में हमेशा कीमत सोने की ही ज्यादा होती है ठीक उसी प्रकार 1 ग्राम सोना मतलब भगवान का नाम और 1 किलो मिट्टी मतलब संसार के सारे सुख। प्रवचन के दौरान पारा के जयंतीलाल छाजेड़ की बेटी आयुषी जिनकी दीक्षा धर्म दिवाकर के वरद हस्त 18 जनवरी को राजनगर अहमदाबाद में होगी का बहुमान खरडू वासियों द्वारा किया गया। वहीं दिक्षु बहन के पिता जयंतीलाल छाजेड़ का शाल माला से सम्मान किया गया।

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