RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

दशलक्षण पर्व पर शिविर में मुनिश्री द्वारा प्रतिदिन प्रातःकालीन वेला में चल रहा योग शिविर

विदिशा से सह संपादक शोभित जैन की रिपोर्ट ।

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दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

दशलक्षण पर्व पर प्रतिदिन प्रातःकालीन वेला में चल रहे योग शिविर कराते हुये मुनि श्री सुप्रभ सागर…
प्रातःकालीन वेला में मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों को योग साधना का अभ्यास कराया उन्होंने अपने सम्वोधन के द्वारा भावनाओं के माध्यम से शरीर के सभी परिग्रह को अलग करते हुये हाथ पर हाथ रखकर विल्कुल शांत बैठने को कहा सभी शिवरार्थीओं ने ध्यान करते हुये उपरोक्त समय के लिये पांचों पापों का त्याग करते हुये सभी प्रकार के परिग्रह तथा गमनागमन का के त्याग की प्रतिज्ञा की। सभी की द्रष्टी एल ई डी स्क्रीन की ओर थी, जिसमें णमोकार महामंत्र का उच्चारण सुनाई दे रहा था। सभी का चित्त उसी ओर था। मुनि श्री ने सभी को आंखें वंद करने का निर्देश देते हुये तथा मन वचन और काय से सभी को शांत एवं लीन होते हुये अपनी रीड़ की हडडी को सीधे करने का निर्देश दिया एवं आज्ञा दी कि ध्यान करते समय कोई विकल्प नहीं रहना चाहिए। उन्होंने एकाग्रता से ओमकार वीजाक्षर की ओर बड़ते हूये साधना को पूर्ण करया।
मुनि श्री ने छत्तीसगढ़ कि पावनधरा चंद्रगिरी डोंगरगढ़ की ओर सभी का ध्यान आकृषित करते हुये भगवान चंद्रप्रभु की ओर सभी की दृष्ठी खेंची,
नीचे के मंदिर के दर्शन कर एक एक कदम आगे बड़ते हुये उपर की पहाड़ी के दर्शन करते हुये श्री चंद्र प्रभु भगवान के दर्शन करते हुये अतिशय युक्त प्रतिमा भगवान चंद्रप्रभु को निहारते हुये गवासन से बैठकर नमोस्तु किया। साथ ही सभी की द्रष्टी प्रकृति की उस मनोरम छटा की ओर खींचा जंहा पर प्रातःकालीन प्रसन्न बेला में चिड़ियों की चहचहाहट के साथ ध्यान करने का निर्देश दिया। महाप्रणव ओमकार. जो कि तीन लोक का वाचक है उसका नाद करते हुये घोष किया।
मुनी श्री ने भगवान के समक्ष प्राथना करते हुये कहा कि गुरू के प्रति श्रद्धा भक्ती विनय समर्पण के साथ निवेदन करो कि हे गुरुदेव मेरी दीक्षा आपके चरणों में हो।
गुरू जी ने भक्त कि इच्छा जान “तथास्तु” कहा और एक किनारे वैठकर कैश लोंच के साथ दीक्षा की तैयारी पूर्ण की एवं आचार्य भगवन ने पांच स्थान के केशलोंच करते हुये भक्तिओं के साथ दीक्षा विधी पूर्ण हुई।
ओम नमः सिद्देभ्या ….. उपरोक्त जानकारीअविनाश जैन ने दी।

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