RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

“डाइटिंग की अंधी दौड़ (लघुकथा)”

            रमा और ऊमा अच्छी सहेलियाँ थी, पर रमा दिखावे और चकाचौंध को बहुत महत्व देती थी। रमा सोशल मीडिया के फोटो सेशन, पहनावे और फिगर को लेकर अत्यधिक सक्रिय थी और ऊमा उसके विपरीत जीवन के निर्णय में दूरगामी दृष्टि एवं जीवन की गहराई पर ध्यान केन्द्रित करती थी। दोनों की शिक्षा में भी काफी अंतर था। ऊमा रमा से ज्यादा शिक्षित थी इसीलिए ऊमा शारीरिक मेकेनिज़्म को भली-भाँति समझती थी और रमा केवल अंधाधुंध फिगर पाने की दौड़ की ओर अग्रसर थी। ऊमा रमा को समझाती थी की आकर्षक दिखना अच्छी बात है पर अपनी शारीरिक स्थिति के अनुरूप निर्णय होना चाहिए।

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दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

            रमा ने कुछ समय पहले ही कोरोना का टीका लगवाया, पर ओवर डाइटिंग की वजह से उसकी इम्यूनिटी इतनी कमजोर थी कि वह टीका लगाने के पश्चात लगातार एक सप्ताह बिस्तर पर ही रही। तब भी ऊमा ने रमा को समझाया की हमें अपने शरीर को अपने भविष्य में ऐसी कई बीमारियों के लिए तैयार करना होगा जो अचानक आ सकती है जैसे कोरोना। कुछ समय पश्चात रमा ने एक बच्चे को जन्म दिया। गर्भावस्था और उसके बाद भी रमा को सिर्फ डाइटिंग का ही भूत सवार था। ऊमा ने फिर उसे समझाया की उसे अब शरीर की रिकवरी के लिए पर्याप्त पोष्टिक भोजन भरपूर मात्रा में लेना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए, पर रमा तो जल्द से जल्द जवान और खूबसूरत दिखना चाहती थी। समय बीत गया और अधेड़ उम्र में रमा ने बिस्तर पकड़ लिया। शारीरिक कमजोरी उस पर दिन-प्रतिदिन हावी होती चली गई। डॉक्टर का ट्रीटमेंट तो सही समय मिला पर ओवर डाइटिंग की वजह से शरीर रिकवरी नहीं कर सका। रमा अक्सर अपनी सहेलियों के फिगर का मज़ाक उड़ाया करती थी। अदरक, कद्दू पता नहीं क्या क्या सम्बोधन किया करती थी, पर आज बिस्तर पर अपने आप को असहाय महसूस कर स्वयं को कोस रही थी और ऊमा की सीख याद कर अश्रु बहा रही थी।

            इस लघुकथा से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन को दिखावे का मंच मत बनाइये। जीवन में समय और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लीजिए। न तो खुद को हीन समझे और न ही दूसरों को समझने का प्रयत्न करें। आपकी शारीरिक क्षमता के अनुरूप ही सही निर्णय ले। सोशल मीडिया के दिखावे और लाइक बढ़ाने के चाह में दूरगामी परिणामों को नजरंदाज न करें। कोरोना जैसी महामारी ने हमें एक चीज और सिखलाई है कि हमें अपने शरीर को किसी भी अकस्मात महामारी के लिए मजबूत बनाना होगा क्योंकि बीमारी के समय हमारी शारीरिक मजबूती ही हमें शीघ्र से शीघ्र स्वस्थ होने में मदद करती है इसलिए कृपया दिखावे की अंधी दौड़ में ओवर डाइटिंग न करें। हर उम्र की अपनी खूबसूरती और प्राथमिकता है यह सदैव याद रखें।  

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)

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