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2023 तक किया जाये भोपाल को मोतिया बिंद मुक्त – कलेक्टर

भोपाल

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जिला स्वास्थ्य समिति बैठक में हुई स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा

2023 तक किया जाये भोपाल को मोतिया बिंद मुक्त – कलेक्टर लवानिया

जिला स्वास्थ्य समिति एवं मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक का आयोजन कलेक्टर सभागार में किया गया।

बैठक में कलेक्टर अविनाश लवानिया द्वारा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगामी समय में संचालित किये जाने वाले अभियानों एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही मातृ मृत्यु प्रकरणों के कारणों की समीक्षा कर संभावित मृत्यु कारकों को दूर किये जाने पर चर्चा की गई।

मोतिया बिन्द से मुक्ति हेतु चलेगा ‘‘नेत्र ज्योति अभियान’’

मोतिया बिन्द की जांच एवं पहचान हेतु नेत्र ज्योति अभियान का संचालन किया जावेगा। जिसके तहत आशा कार्यकर्ताओं द्वारा 50 साल से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति के घर जाकर प्राथमिक स्क्रीनिंग की जावेगी। स्वास्थ्य संस्थाओं में प्राथमिक जांच के बाद मोतिया बिन्द के प्रकरण पाये जाने पर ऑपरेशन करवाये जायेंगे। 

    इस अवसर पर कलेक्टर  अविनाश लवानिया ने कहा कि भारत सरकार द्वारा आगामी तीन वर्षों में मोतियाबिंद से मुक्ति हेतु निरंतर अभियान चलाया जावेगा। लेकिन हमें प्रयास करना चाहिए कि भोपाल को मार्च 2023 तक मोतियाबिन्द से मुक्त कर सकें। इस हेतु ग्राम एवं वार्ड वार कार्ययोजना बनाकर मरीजों का चिन्हांकन किया जाए। 

कुपोषित बच्चों की पहचान कर एन.आर.सी. में करवाया जाये उपचार

 18 जुलाई से 31 अगस्त तक चलाये जा रहे दस्तक अभियान के माध्यम से कुपोषित बच्चों, एनीमिया से ग्रस्त बच्चों, जन्मजात विकृतियों के बच्चों की पहचान कर उपचार प्रदान किया जावेगा। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिये दस्तक अभियान के माध्यम से निमोनिया, डायरिया, कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों का चिन्हांकन किया जाता है। इस दौरान विटामिन ए का डोज एवं ओरआरएस व जिंक की टेबलेट का वितरण किया जाएगा। अभियान के माध्यम से आशा, आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं ए.एन.एम. द्वारा 5 साल तक के प्रत्येक बच्चे के घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवायें प्रदान की जायेंगी। इसके साथ ही ओ.आर.एस. का घोल बनाने की विधि, स्तनपान परामर्श एवं हाथ धुलाई के तरीक़ों को समझाया जावेगा। 

   कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण, एनीमिया एवं जन्मजात विकृतियों के बच्चों की शीघ्र पहचान कर उपचार करवाया जाना बेहद जरूरी है। इसलिए ऐसे बच्चों में गंभीर लक्षण दिखने पर बिना विलंब किये उपचार एवं समुचित रेफरल  किया जाये, जिससे कि बच्चों के जीवन को बचाकर प्रदेश के शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भोपाल श्री रितुराज सिंह ने कहा कि दस्तक अभियान के दौरान 5 साल तक के बच्चों के साथ ही महिलाओं की जांच भी करवाई जाए। विशेष रूप से एनीमिया एवं हाईरिस्क महिलाओं का चिह्नांकन इस अभियान के साथ किया जाए।  

 बैठक में कलेक्टर ने निक्षय मित्र के रूप अपना पंजीकरण करवाते हुए अपील की कि टी.बी. बीमारी के समूल उन्मूलन के लिए लोग जागरूक होकर लक्षण दिखने पर जांच अवष्य करवायें। टीबी का पक्का ईलाज डॉट्स पद्धति के माध्यम से उपलब्ध है। डॉट्स पद्धति का पूरा इलाज लेना बेहद जरूरी है। 

      मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि बैठक में टी.बी., मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, नियमित टीकाकरण, कोविड-19 टीकाकरण, मातृ मृत्यु समीक्षा विषयों पर चर्चा कर निर्णय लिये गये। मौसम परिवर्तन के साथ-साथ होने वाली डेंगू, चिकिनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव एवं प्रबंधन के लिए नगर निगम के साथ कार्ययोजना बनाकर कार्यवाही की जाएगी। 

 बैठक में गांधी मेडिकल कालेज, सुल्तानिया जनाना चिकित्सालय, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय विभाग, ज़िला जनसम्पर्क अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला आयुष अधिकारी, फॉग्सी, डेव्हलपमेण्ट पार्टनर सहित स्वास्थ्य विभाग के ब्लॉक एवं जोनल मेडिकल आफिसर, सेक्टर मेडिकल आफिसर एवं प्रबंधन इकाई के सदस्य उपस्थित रहे।    

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