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हिंसा के विरुद्ध महिलाएं और बच्चे आवाज उठाएं,तभी होंगे सशक्त

हिंसा के विरुद्ध महिलाएं और बच्चे आवाज उठाएं, तभी होंगे सशक्त

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. सीफार के सहयोग से आयोजित हुई मीडिया कार्यशाला
. मंडल और जिले के अधिकारियों ने व्यक्त किए विचार

पवन कुमार द्विवेदी/गोंडा

महिलाओं को बराबर का सम्मान देकर ही हम उन्हें स्वावलंबी बना सकते हैं। बेटी बचाना जरूरी है। यह हम सब जान तो गए हैं लेकिन यह अपनाने में अभी थोडा वक्त लग रहा है. हालांकि पहले की तुलना में लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आया है। यह कहना है संतोष कुमार सोनी, प्रभारी उप निदेशक, महिला कल्याण, देवीपाटन मण्डल का। उप निदेशक महिला कल्याण गुरूवार को नगर के एक होटल में मीडिया कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित मीडिया कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप निदेशक ने बताया कि महिला एवं बाल विकास के लिए प्रदेश में कई प्रमुख योजनाएं संचालित हैं. इसमें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष, पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला पेंशन योजना प्रमुख है।
मण्डल स्तर पर एक राजकीय, दो स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से बच्चों के लिए तीन संस्थायें संचालित है। मण्डल के समस्त जनपदों में वन स्टॅाप सेन्टर संचालित है। पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए महिला हेल्पलाइन 181 संचालित है।
रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के तहत मंडल की 189 महिलाओं तथा बालिकाओं को 582.47 लाख वितरित की गई।
निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत वर्तमान में 1.70 लाख लाभार्थी हैं।
वन स्टॉप सेन्टर के तहत 1414 पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे पुलिस, चिकित्सकीय, आश्रय एवं विधिक सहायता से लाभान्वित किया गया।
पुलिस हेल्पलाइन 112 के जरिये 1821 महिलाओं की मदद गई।
देवीपाटन मण्डल, गोण्डा में अक्टूबर 2020 से दिसम्बर, 2021 तक 42 लाख 20 हजार व्यक्तियों को मिशन के अंतर्गत जागरूक किया गया।
स्वावलंबन कैम्पों के माध्यम से मण्डल में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के 4698, पति की मृत्युपरांत निराश्रित महिला पेशन योजना के 7919, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 125 और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य के 229 आवेदन स्वीकृत किये गये।
मण्डल में विगत 5 वर्षों में 435 बच्चों को परिवार से मिलाया गया।
मण्डल में विगत 5 वर्षों में 103 बच्चों को फ्री एडाप्शन फास्टर केयर व उनके जैविक परिजनों से मिलाया गया।
विगत 3 वर्षों में 53 संभावित बाल विवाह रुकवाये गये हैं।
देवीपाटन मण्डल में विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण में 7 व बालगृह (शिशु) में 14 बच्चे आवासित हैं।
नीरज मिश्रा, राज्य सलाहकार, महिला एवं बाल विकास विभाग, उ0प्र0 ने कहा हिंसा के विरुद्ध महिलाए और बच्चें आवाज उठाए, तभी हमने उन्हें सशक्त किया ऐसा खा जा सकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं व बेटियों के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं। इसमे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का मुख्य उद्देश्य है कि लिंगानुपात को बढ़ाना मण्डल की स्थिति खराब थी लेकिन जब विभाग स्तर से योजना का संचालन किया जा रहा है। तब से स्थिति में काफी हद तक सुधार आया है। बेटियों के नाम से ही घर का भी नाम रखा जा रहा है। गुड्डा गुड्डी बोर्ड योजना के तहत बेटियों के जन्म के बारे में जानकारी से आमजन को संवेदित किया जा रहा है।
इस मौके पर बहराइच के ज़िला प्रोबेशन अधिकारी विनय सिंह, बलरामपुर के डीपीओ सतीश चंद्र और श्रावस्ती डीपीओ सुबोध कुमार सिंह, गोंडा बाल कल्याण समिति के राम कृपाल शुक्ला, किशोर न्याय बोर्ड के राजेश कुमार श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला के शुरुआत में सीफार के जिला प्रतिनिधि रवि तिवारी ने लघु फिल्म प्रस्तुत की। वहीं सीफार के राज्यस्तरीय अधिकारी लोकेश त्रिपाठी और मंडल प्रभारी सुशील वर्मा ने संस्था के कार्य और आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार अरविन्द पाण्डेय ने किया।

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