RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

वस्तु का मूल स्वभाव ही धर्म है -ः साध्वी श्री केवल्य प्रिया श्रीजी, श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में नवपद ओलीजी की आराधना अंतर्गत हो रहे कई धार्मिक आयोजन


झाबुआ। वस्तु का मूल स्वभाव ही धर्म है, जिसका जैसा स्वभाव होता है, उसी की परिणीति का धर्म होता है। धर्म सदा धारण करने योग्य होता है जो दुर्गति को दूर कर सद्गति की ओर से ले जाता है। धर्म के मूल में अहिंसा, तप और संयम है, जिसे देवता भी वंदन करते है।
उक्त उद्गार स्थानीय श्री ऋषभदेव बावन जिनालय के गुरू मंदिर प्रवचन हाल में परम् विदुषी साध्वी श्री केवल्य प्रिया श्रीजी ने श्री शाश्वती नवपद ओलीजी अंतर्गत चल रहंीं तप-आराधना में व्यक्त किए। आपने आगे कहा कि जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए ध्यान अति आवश्यक है। ध्यान भी शुभ ध्यान होना चाहिए, जिससे हमारी अंतर आत्मा में फैले अशुभ कर्मों का क्षय हो। साधु पद की व्याख्या करते हुए पूज्य साध्वी श्रीजी ने कहा कि जो सभी की सहायता करे, वहीं सच्चा साधु कहलाता है। साधु का अर्थ है सदैव साधना में रत रहना। श्रमण का अर्थ है श्रम करना, मुनि का अर्थ है मौन रहना, इस तरह साधु सदैव साधना में रत रहकर मौन व्रत धारण कर निरंतर धर्म क्रिया करता रहता है। आज के माहौल पर व्यंग्य करते हुए साध्वी ने कहा कि आज पुण्य को बताकर और पाप को छिपाकर लोग कार्य कर रहे है, जबकि आत्म कल्याण के लिए प्रायश्चित, पच्चखाण एवं पश्चाताप अति आवश्यक है, जो एकमात्र गुरू के समक्ष ही किया जा सकता है।
श्रीपाल रास का हो रहा वर्णन
जैन श्वेतांबर श्री संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशवंत भंडारी ने बताया कि शाश्वत नवपद ओलीजी अंतर्गत 9 पद अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र एवं तप पद की आराधना की जाती है। 20वें तीर्थंकर श्री मुनि सुव्रत स्वामीजी के काल में श्री श्रीपाल एवं मैयना सुंदरी ने प्रथम बार नवपद ओलीजी आराधना की शुरूआत की थी। जिससे श्रीपाल का कुष्ठ रोग दूर होकर उन्हें अतुल्य वैभव एवं संपदा प्राप्त हुई थी। जिसका सुंदर बखान पूज्य साध्वी श्रीजी मसा द्वारा प्रतिदिन प्रवचनों के माध्यम से किया जा रहा है।
प्रतिदिन प्रभावना एवं पुरस्कार वितरण हो रहा
श्री शाश्वत नवपद ओलीजी के आयोजन के प्रथम दिन से ही प्रतिदिन पूज्य साध्वी श्रीजी मसा की प्रेरणा से समाजजनों द्वारा प्रातः श्री भक्तामर स्त्रोत एवं गुरू चालीसा पाठ किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन लाभार्थी परिवारों की ओर से प्रभावना वितरित की जा रहीं है। इसी क्रम में प्रातः 10 बजे प्रवचन के साथ दोपहर 2 बजे से प्रश्नोत्तर एवं प्रश्न-पत्र प्रतियोगिता भी रखी जा रहीं है। 12 अप्रेल, मंगलवार को भक्तामर पाठ के लक्की ड्रा की लाभार्थी श्रीमती कामिनी दीपक भंडारी, प्रश्नोत्तर की श्रीमती अनिता सतीश कोठारी, प्रश्न-पत्र प्रतियोगिता के ज्ञानचंद मेहता एवं दोपहर में प्रश्न-मंच प्रतियोगिता का लाभ श्रीमती पुष्पा नाहटा ने लिया। 11 अप्रेल, सोमवार को प्रवचन के दौरान मनोहरलाल प्रतीककुमार मोदी की ओर से प्रभावना प्रदान की गई।
40 से अधिक तपस्वी कर रहे आयंबिल तप
संपूर्ण नौ दिन के आयोजन के लाभार्थी अशोककुमार राठौर एवं भंवरलाल मेहता ने बताया कि नवपद ओलीजी अंतर्गत श्री संघ के 40 से अधिक तपस्वी प्रतिदिन आयंबिल की तपस्या श्री राज हेमेन्द्र पुष्प आयंबिल खाता भवन में कर रहे है। जिनकी पूर्णाहूति 16 अप्रेल, शनिवार को चैत्री पूनम के दिन होगी। 17 अप्रेल, रविवार को सभी तपस्वियों के पारणे का आयोजन लाभार्थी परिवार की ओर से किया जाएगा।

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