RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

महंगाई डायन खाए जात है20 वर्षो में पारा को नही मिली एक भी सौगात कांग्रेस की निष्क्रियता पड़ रही भारी भाजपा ने स्वीकारा पारा में कोई काम नही हुआ

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  पारा से प्रभाष ए जैन”मन” की स्पेशल रिपोर्ट
पारा – भारत जैसे  देश मे विपक्ष का कमजोर होना और सत्तासीन लोगो के निष्क्रिय होने का असर आम आदमी पर पड़ता है। आदिवासी प्रधान झाबुआ जिले के पारा को पिछले 20 वर्षो के भाजपा के शासन में किसी भी तरह की सौगात का न मिलना अपने आप मे आश्चर्य की बात है मगर कमजोर होती कांग्रेस का भी भाजपा शासन के खिलाफ कुछ न कर पाना उस से भी बड़ा आश्चर्य है।। पिछले 20 सालों में पारा को एक भी  हालांकि इसमे जितना दोष सरकार का है उससे कहीं अधिक दोष स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी है कि वे पारा की कई महत्वपूर्ण मांगो को वर्षो में भी पूरी नही करवा पाए। 
 गर्मी में जल संकट –

पारा नगर की सबसे बड़ी मांग कहें या पीड़ा इसको कोई सुनने वाला मानो है ही नही। हां दो वर्ष पहले जल जीवन मिशन के तहत धमोई से पारा को पानी मिलने वाली योजना का शुभारंभ ज़रूर हुआ था लेकिन पिछले 6 महीनों से भाजपा के नेता और पीएचई के अधिकारी अगले महीने से काम शुरू होने की बात कह रहे हैं। लेकिन अब तक इस मिशन की शुरुआत नही हुई है। ऐसे में यह तय है कि पारावासियों को अभी  टैंकर के भरोसे ही रहना होगा। 
सुरक्षा के दृष्टिकोण- लगभग 60 हजार से अधिक आबादी वाले पारा क्षेत्र में वर्षो से थाना खोलने की मांग की जा रही है। हां यह बात भी सही है कि शांतिप्रिय पारा क्षेत्र में बहुत ज्यादा घटनाएं नही होती है मगर आबादी के हिसाब से पारा अधिक सुरक्षित और अधिक पुलिस की सख्त आवश्यकता है। 

शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ नही मिला – 

पारा के सबसे पुराने बालक स्कूल को कहने को  तो हायर  सेकेंडरी का दर्जा मिला हुआ है मगर 1964 में खुली यह स्कूल आज भी मिडिल स्कूल और अतिरिक्त कमरों के भरोसे चल रही है। हां पिछले वर्ष विधायक वालसिंह मेड़ा ने अपना वादा ज़रूर निभाया और स्कूल को वाल बाउंड्री बना कर दी। पारा के बालक तथा कन्या हायर सेकेंडरी में अब भी कई स्थायी शिक्षकों की कमी है। 

शायद जिले में ऐसा गांव नही –

झाबुआ जिले में सामूहिक बस्ती वाला शायद पारा नगर ही है जिसके पास अपना कोई सार्वजनिक खेल मैदान नही है। बालक स्कूल के खेल मैदान में ही अब सारे खेल कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। 
60 हजार की आबादी –  आधार मशीन को मोहताज – 

पारा से जुड़ी 25 से अधिक पंचायतों तथा उनमें समाहित करीब 100 ग्रामो के लोगो को आधार कार्ड बनवाने के लिए अब तक भटकना पड़ता है। पूर्व में पारा के बालक तथा कन्या स्कूल में आधार सेंटर खुले थे मगर उन्हें तकनीकी कारणों से बन्द कर दिया गया। एक तरफ अब सारे निजी तथा शासकीय कार्य बिना आधार के सम्भव नही हो पाते हैं वहीं आधार कार्ड सेंटर न होने से पूरी आबादी को झाबुआ के साथ अन्य जगह दौड़ना पड़ता है। इस ओर भी किसी भी नेता और जन प्रतिनिधि का ध्यान नही है।
महंगाई और पारा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय विधायक वालसिंह मेड़ा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय गैस की टँकीया सिर पर रख कर प्रदर्शन करने वाले भाजपाई अब घर मे घुस कर बैठ गए हैं। पूर्व विधायक बापूसिंह डामोर द्वारा बनाये गए तालाबो के बाद भाजपा बताए कि पारा को पानी देने के लिए 20 सालों में क्या किया। वहीं जहां तक बात पारा नगर की है भाजपा ने आज तक कोई भी सौगात नही दी है। महंगाई और पारावासियों की मांगों को लेकर जल्द ही उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
 भाजपा कार्यकर्ता अमृतलाल राठौड़ ने कहा कि ये बात बिल्कुल सही है कि महंगाई बहुत तेज़ी से बढ़ी है और सरकार को विशेष रूप से खाद्य सामग्री और गैस के भावों पर नियंत्रण करना चाहिए। वहीं इस बात में भी कोई दो राय नही है कि पिछले कई वर्षों में पारा को शासकीय स्तर पर  कोई भी  सौगात नही मिली है। सांसद, भाजपा जिला संगठन और शीर्ष नेतृत्व को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा जिला महामंत्री सोमसिंह सोलंकी के कहा कि महंगाई बहुत बढ़ी हुई है इसमे कोई दो राय नही है, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि वैश्विक परिदृश्य बदलने के बाद कहीं न कही सुधार होगा और महंगाई से निजात मिलेगी। स्वीकार करता हूँ कि भाजपा की ओर से आज तक पारा नगर को कोई सौगात नही मिली है लेकिन ये आश्वासन भी देता हूं कि बहुत जल्द पारा के लिए कई काम किये जायेंगे और मैं इसके लिए प्रयासरत हूं।
भाजपा मंडल महामंत्री रोमिराज सेन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पूरी दुनिया मे महंगाई के साथ अन्य समस्याएं बनी हुई है। भारत जैसे विशाल जन संख्या वाले देश मे फिर भी स्थिति नियंत्रण में हैं। ये बात बिल्कुल सही है कि नेतृत्व मजबूत नही होने की वजह से पारा को पिछले कुछ सालों में कोई भी सौगात नही मिल पाई है।
 कांग्रेस कार्यकर्ता सलिल खान पठान ने कहा कि भाजपा के कुशासन से लड़ने के लिए कांग्रेस तैयार नही है और उसका कारण है कि जिले के वरिष्ठ नेता सिर्फ अपने परिवार को ही आगे बढाना चाहते हैं। छोटे कार्यकर्ताओं की कोई पूछ परख न होने से कांग्रेस आज बुरी स्थिति में हैं और उसी का परिणाम आम जनता के साथ पारावसियों को भुगतना पड़ रहा है।
 सांसद गुमानसिंह डामोर ने कहा कि मैं अभी एक कार्यक्रम में हूं।

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