RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

पारा भगोरिया……….दोपहर 12 बजे तकमुख्य बाजार सुनसान, सिर्फ मेला ग्राउंड पर जान 4 घण्टे के भगोरिया में ग्रामीणों ने मनाया आनंद का उत्सव


           प्रभाष ए जैन “मन”
पारा। सच्चा दोस्त न्यूज़। जिले में एक दौर ऐसा भी था कि भगोरिया मेला देखने के लिए दूर – दराज से सेकड़ो  लोग पहुंचते थे वही पिछले कुछ वर्षों का आकलन तो यही कहता है कि अल सुबह से देर शाम तक भरने वाला भगौरिया मात्र चंद घण्टो में सिमट सा गया है। एसटीडी के जमाने मे ग्रामीण आदिवासी अपने दूर दराज बैठे और मजदूरी हेतु गुजरात के साथ अन्य राज्यों में गए हुए लोगो को बाकायदा फोन कर भगोरिया भालवा आवजो कहा करते थे। समय बदला और आदिवासी संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार पूरे दिन की जगह चंद घण्टो में खत्म हो रहा है वहीं झूला साथ और मेला स्थान को छोड़ दे तो बाकी पूरे बाजार तो मात्र आवागमन का मार्ग बन कर रह रहे हैं। गुरुवार को पारा में दोपहर 12 बजे  तक तो मामला एक दम सामान्य हाट बाजारों से भी कमजोर था, नगर के मुख्य मार्ग तो ऐसा था कि मानो भगोरिया है ही नही। हाँ झूला स्थल पर चहल – पहल शुरू हो गई थी और तपती धूप में चटक श्रृंगार से सजी युवतियों और रंग-बिरंगे चश्मों से अपनी आंखों पर पर्दा डाले ग्रामीण युवक मस्ती के रंग में  भगोरिया का आनंद लेते दिखे। समय के बदलाव की बयार आदिवासी संस्कृति के पर्व भगोरिया पर पूरी तरह हावी दिखाई देती है। पाउच संस्कृति ने जहाँ होठो को लाली देने वाले पान को खत्म कर दिया है वहीं मजदूरी पर गए ग्रामीणों का भगोरिए पर्व के प्रति उत्साह कम हो गया है। 
 12 बजे बाद झूला स्थल पर छाया उल्लास 
गुरुवार को भरे अंतिम भगोरिया में 12 बजे बाद से झूला स्थल पूर्ण रूप से भर गया था। बच्चे खिलौनों की ओर आकर्षित हो रहे थे वहीं, गरमागरम भजिए, भगोरिया की मिठाई, जलेबी के साथ  गन्ने, पाइनेपल के रस, कोल्ड्रिंक्स की दुकानों पर भी ग्रामीणों का जमावड़ा दिखाई दिया।

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 झूला स्थल पर अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे ग्रामीण
एक तरफ जहां मुख्य बाजार के साथ नगर के अन्य जगह व्यापारी ग्राहकों का इंतज़ार कर रहे थे वहीं झूला स्थल पर भारी भीड़ के बीच युवक युवतियों के साथ अन्य ग्रामीण झूला झूलने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखाई दिए।
     पूर्व सरपंच एक्टिव मोड़ में
पारा भगोरिया को लेकर पारा पंचायत की ओर से पूर्व सरपंच ओंकार सिंह डामोर एक्टिव मोड़ में दिखे। भगोरिए के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ भाजपा की गैर की जिम्मेदारी भी डामोर ने संभाल रखी थी।
चप्पे – चप्पे पर पुलिस, प्रभारी ने लिया जायजा
पारा भगोरिया के लिए पारा पुलिस ने भी तैयारिया करते सभी मुख्य चौक चौराहो के साथ सभी भाड़ वाले इलाकों और झूला स्थल पर तैनाती की गई। पारा चौकी प्रभारी सुनीता चौहान सुबह से ही झाबुआ से आये दल बल के साथ मुस्तेद दिखी। वहीं उन्होंने दुकाने लगाने वाले व्यापारियों और ग्रामीणों को आवश्यक दिशा निर्देश पालन करने की हिदायत दी।
 विधायक ने संभाली कांग्रेस की कमान
यूं तो भगोरिया आदिवासी संस्कृति का महोत्सव माना जाता है पर यह भी सही है कि इस दिन निकलने वाली गैर में दोनो प्रमुख पार्टियां ज्यादा भीड़ जुटाने के लिए पूरा जोर लगाती आई है। गुरुवार को पारा के भगोरिया के लिए पूर्व सरपंच ओंकारसिंह डामोर ने नेतृत्व करते भीड़ जुटाने के लिए कमर कस रखी थी और भाजपा की गैर में झाबुआ से आये पूर्व विधायक धनसिंह बारिया, निर्मला भूरिया, शैलेष दुबे, सोमसिंह सोलंकी के साथ पारा मंडल के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। वहीं कांग्रेस की कमान स्वयं विधायक वालसिंह मेड़ा ने संभाल रखी थी। कांग्रेस की गैर में रूपसिंह डामोर, जोगड़िया निनामा, रमेश मोहनिया, सलिल पठान, यासीन पठान,केमता डामोर आदि सहित सेकड़ो कार्यकर्ता शामिल हुए। दोनो ही दलों ने प्रभावी गेर निकाली।

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