RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

जिले के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में सप्लाय हुई घटिया खेल सामग्री, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली आई संदेह के घेरे में … !, फर्जी बिल लगाकर शिक्षकों से जबरन वसूल की जा रहीं राशि जिलाधीश को निष्पक्ष जांच करवाकर भ्रष्टाचारियांे पर सख्त कार्रवाई की है आवश्यकता


झाबुआ। जिले में हाल ही में शिक्षा विभाग में प्रकाश में आए कथित घोटाले के पीछे की कहानियां अब लगातार बाहर आने लगी है। किस तरह खरीदी के प्रक्रम को अंजाम दिया गया तथा सिस्टम में अपने प्रभाव का फायदा पहुंचाने की मामले की जांच के आदेश दे दिए गए है। शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी ने विकासखंडों में पदस्थ अपने अधीनस्थ अधिकारियों को एक सादे कागज पर अनौपचारिक पत्र लिखकर निर्देशित किया कि जैसा मामला समाचार माध्यमों में उछाला गया है, उस तरह की खरीदी ना की जाए और यदि कर भी ली गई है तो उसका भौतिक सत्यापन किया जाए।
 लेकिन चलते पूर्जे कागजों का मायने क्या है। जिलाधिकारी ने जांच के जो आदेश दिए है, वह जांच कितनी गहरी पारदर्शी के साथ होगी तथा उसके नतीजे कब आएंगे और क्या जांच बाद दोषी लोगों को कटघरे में खड़ा कर पाएगी। क्या आम लोगों के टेक्स के रुपयों की भरपाई दूसरों से की जा सकेगी। प्रश्न है जिनके जवाब जांच कमेटी को जरूर खोजने चाहिए, लेकिन आमतौर पर जैसा हर जांच का हश्र होता है, प्रभावशाली लोगों को बचाया जाएगा। ऐसी आशंका अभी से व्यक्त की जा रही है। यह जांच उस गुबार को चाटने का काम करेगी एक तरह से प्रेशर वाल्व का काम करेगी। जो प्रेशर मीडिया ने बनाया है, अगर जिम्मेदार अधिकारी, व्यवस्था के पुरोधा गरीब आदिवासी बच्चों की खेल प्रतिभा को निखारने की मंशा रखते है, उनके प्रति थोड़ी र्भी इमानदारी रखते हैं तो उन्हें जांच को सही दिशा में आगे ले जाना चाहिए तथा जो सामग्री खरीदी गई है। उसका समुचित मापदंडों पर परीक्षण किया जाना चाहिए और यदि वह सामग्री मानक स्तर की नहीं पाई जाती ह,ै तो संबंधित प्रदाय कर्ता को दोषी मांग कर न केवल उसे ब्लेक लिस्टेड किया जाना चाहिए ,बल्कि उसे उक्त राशि का भुगतान भी नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा होता है इस प्रकार के प्रति सकारात्मक होगा। जिले के कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है, आने वाले दिनों में शिक्षा के स्तर को रसातल में ले जाने वाले इस घटनाक्रम के दोषियों को यदि सजा नहीं मिली, तो जिले में खेल प्रतिभाओं सपनों पर पाला पड़ जाएगा ….!
क्या है पूरा मामला
जिले के पेटलावद में सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत केंद्र से मिलने वाली खेल सामग्री राशि पर ग्रहण लगाते हुए स्थानीय भ्रष्ट तथाकथित राजनीति सप्लायर एवं भ्रष्ट अधिकारियों ने मात्र 2 हजार से कम कीमत की स्क्रैप मे डालने जैसी घटिया अनुपयोगी खेल सामग्री जबरन स्कूलों में रखवाई गई है। शैक्षणिक सत्र करीब-करीब खत्म होने के बाद जबरन भेजी गई यह सामग्री उपयोगविहीन ही साबित होगी। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों के साठगांठ की बू भी आ रहीं है।
शिक्षकों में है खराब सामग्री को लेकर नाराजगी
जिले में 2402 माध्यमिक एवं प्राथमिक स्कूलो मे वार्षिक शाला प्रबंधन खचर्, जो शिक्षक अपने लिए आवश्यक खेल सामग्री पर खर्च करता है और सत्र खत्म होने पर यह राशि शासन समिति के खाते में डालती है। उक्त राशि  शिक्षक वष भर किए गए खर्चाे के बिल लगाकर अपनी जेब से लगे पैसे को वापस लेता है, पर तथाकथित भ्रष्ट नेताओं अधिकारियों की गिद्द नजर इस पर लगी। अपनी जेब से खर्च करने वाले शिक्षकों के हक का यह पैसा अब फर्जी पूरा बिल देकर तबादले का धोस देकर यह राशि वसूली जाएगी। पूरे जिले में शिक्षको में इसको लेकर काफी  नाराजगी एवं भय व्याप्त है। जबरन खेल सामग्रीयों को स्कूलों में रखवा कर प्रबंधन के लिए राशि 10 हजार एवं  5 हजार रुपये हडपने का खेल किया जा रहा है।
जिला कार्यालय से सीधे हो गई मिलीभगत
नियमानुसार इस राशि के मानिटरिंग अधिकारी डीपीसी एवं बीआरसी होते है। दबी जुबान शिक्षक नाम न छापने की शर्त पर कह रहे कि जिला कार्यालय से खंड स्तरीय बैठकों में पहले ही कहा जा चुका है कि कोई भी संस्था सामग्री नहीं खरीदे, अपने स्तर पर यह सामग्रीयां हम भेज रहे हैं। भ्रष्ट अधिकारियों एवं नेताओं ने भंगार में डाली जाने जैसी घटिया 2 हजार से भी कम कीमत की अनुपयोगी खेल सामग्रीयां जबरन सप्लाय की। जिसके बाद उक्त खेल सामग्री के नाम पर जबनर एक स्कूल से 10 हजार एवं 5 हजार रू. राशि वसलू करने का कार्य शुरू हो चुका है।
होना चाहिए भौतिक सत्यापन एवं उच्च स्तरीय जांच ?
पेटलावद तहसील में जनशिक्षकों के माध्यम से डिलीवरी के वक्त बामनिया की शिवम ऐजेंसी ने माल सप्लाई करवाया, यहां पर सप्लायर ने बड़ी सावधानी बरतते हुए घटिया खेल सामग्री के साथ में एक सूची उपलब्ध करवाई, परंतु उस सूची के अनुसार 25 माल भी नहीं है। उस कीट में साथ ही बिल अनुकृपा सप्लायर नारेला रोड बामनिया पर खेल सामग्रियां प्राप्ति के साइन जबरन करवा कर तत्काल बिल शिक्षकों से बिल कलेक्ट कर लिया गया, ताकि सप्लायर की गोपनीयता भंग ना हो। शिक्षकों के अनुसार इस काले खेले में कई बीआरसी एवं युवा जनशिक्षक भी शामिल है। शिक्षक यह सामग्री अपने स्कूलों में रखने एवं इसका पैसा देने को भी मजबूर है, क्योकि उन्हंे सरकारी नौकरी करने के चलते जिला कार्यालय से आदेश दिए गए है। नियमानुसार इन सामग्रीयों का अन्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा एक उच्च स्तरीय टीम बनाकर भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचारी नही छोड़ते है, शिक्षा के मंदिर को भी
राजनीतिक ठेकेदारों ने शिक्षा मंदिर जैसी पवित्र संस्था को भी नहीं छोड़ा है। असहाय शिक्षकों की आवाज सुनकर भी अनसुनी करने वाले अधिकारियों ने उसे इंसाफ की उम्मीद ना होने से अपने संस्था के बच्चों का पैसा इन भ्रष्टाचारीयों को देने को वह मजबूर है। बड़ा प्रश्न यह है कि क्या ऐसे ही चलता रहेगा चाइल्ड बजट। जबकि हाल ही में बजट में शासन ने चाइल्ड बजट पेश किया। जिसमें सौ प्रतिशत राशि बच्चों पर खर्च करना है, पर उस बजट को डकारने वाले पहले से ही दीमक लगाने की तैयारी में है। संपूर्ण मामले में जिला दंडाधिकारी कलेक्टर को उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
जिम्मेदारों का कहना
– मुझे कलेक्टर महोदय एवं संयुक्त कलेक्टर महोदय द्वारा इस मामले में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच बाद रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्तुत की जाएगी। अगली कार्रवाई वहीं करेंगे।
रालूसिंग सिंगार, जिला परियोजना समन्वयक झाबुआ।
– मेरे द्वारा इस मामले में जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान को संपूर्ण जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया है। जिसके बाद संबंधितों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
सुनिलकुमार झा, संयुक्त कलेक्टर झाबुआ।

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