RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

‘द कश्मीर फाईल’ 19वीं सदी में कश्मीर में पंडितांे होने वाले घोर और विभत्स अत्याचार की वास्तविक डाक्यमेंट्री है, इसे प्रत्येक नागरिक को देखना चाहिए -ः पद्मश्री महेश शर्मा


सामाजिक महासंघ के बेनर तले शहर की समस्त सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक संस्थाओं  और समाज प्रमुखों ने देखी कश्मीर फिल्म
केसरिया तिलक एवं दुपट्टा पहनकर सभी ने लगाए भगवान श्री राम, भारत माता और वंदे मातरम् के गगन भेदी जयघोष
झाबुआ। ‘द कश्मीर फाईल’ 19वीं सदी में कश्मीर में निवासरत हजारों पंडितांे पर होने वाले घोर अत्याचारों और विभत्स घटनाक्रमों से भरी एक यादगार पिक्चर है। जिसमें किस तरह कश्मीर में मूल निवासी पंडितों को या तो एक विशेष धर्म को अपनाने के लिए जोर-जबर्दस्ती करना और धर्म नहीं अपनाने पर मार देना एवं कश्मीर से बाहर निकालने की धमकी देना, का वर्णन इस फिल्म में किया गया है। फिल्म के माध्यम से पंडितों पर होने वाली घटनाओं को देखकर हर किसी की आंखों से अश्रू धारा बहने लगेगी। यह फिल्म काश्मीर में पंडितों पर किए गए घोर अपराधों की एक सच्ची डाक्यूमेंटी है।
उक्त उद्गार पद्म श्री शिवगंगा प्रमुख महेश शर्मा ने 14 मार्च, सोमवार रात्रि 9 बजे स्थानीय कॉलेज मार्ग पर स्थित बी-4 सेनिमा में सामाजिक महासंघ जिला झाबुआ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्यजनों के समक्ष व्यक्त किए। पद्म श्री महेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने स्वयं यह फिल्म देखी है और जब इस फिल्म में एक पंडित परिवार पर होने वाले वास्तिक अत्याचारों को बताया, तो उनकी आंखों से भी आंसू निकल आए। यह फिल्म देश के प्रत्येक नागरिक को देखकर उन्हें यह पता होना चाहिए कश्मीर के स्थायी निवासी पंडितों ने अपने अधिकारों और हक के लिए किस तरह लड़ाई और संघर्ष करते हुए अपनी जान दी। वर्तमान भारत सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आज कश्मीर की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है। सभी को समान अधिकार मिला है।
सनातन संस्कृति विश्व की सबसे बड़ी संस्कृति
सामाजिक महासंघ के जिलाध्यक्ष नीरजसिंह राठौर ने बताया कि भारतीय संस्कृति में हिन्दू एवं सनातन संस्कृति सबसे महान संस्कृति है और यह संस्कृति ना केवल भारत तक अपितु पूरे विश्व में अपनी पहचान रखती है। श्री राठौर ने बताया कि सामाजिक समरसता और हकीकत के आयने से रूबरू होने के लिए सामाजिक महासंघ ने आज यह ‘‘द कश्मीर फाईल’’ फिल्म शहरवासियों को दिखाने के लिए अभिनव आयोजन किया है।

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केसरिया तिलक एवं केसरिया दुपट्टा पहनाया गया
आयोजन में सम्मिलित होने वाले सभी महिला-पुरूषों और युवाओं को प्रवेश द्वार पर ही तिलक लगाकर एवं केसरिया दुपट्टा पहनाकर प्रवेश सामाजिक महासंघ से जुड़े हरिश शाह लालाभाई, कमलेश पटेल, राजेश शाह, रामप्रसाद वर्मा, हार्दिक अरोड़ा, दौलत गोलानी, बहादुर भाटी आदि ने दिलवाया। समस्त मातृ शक्तियों को केसरिया तिलक श्रीमती भारती सोनी, रूक्मणी वर्मा, ऋतु सोड़ानी एवं शीतल जादौन आदि लगाते हुए केसरिया दुपट्टा पहनाए गए।
जय श्री राम एवं भारत माता के लगाए जयघोष
इस दौरान संचालन करते हुए सामाजिक महासंघ के परामर्शदाता शरत शास्त्रीनेे आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। गायत्री परिवार के युग प्रवक्ता विनोदकुमार जायसवाल ने सभी से सनातन संस्कृति के जयघोष लगवाए। वहीं उपस्थित सभीजनों ने इस दौरान प्रेरित होकर जय श्री राम, भारत माता एवं वंदे मातरम् के जयघोष लगाकर पूरे सदन को गूंजायमान किया। इस बीच सभी ने अपने हाथों में कश्मीर घटना में पंडितांे को न्याय दिलवाने संबंधी तख्तीयां लेकर एवं भविष्य में इस तरह का अन्याय जीवन में कभी नहीं सहन करने हेतु सामूहिक संकल्प भी लिया। यह फिल्म करीब ढ़ाई घंटे तक चली। अंत में सभी के प्रति आभार आयोजन के सूत्रधार नीरजसिंह राठौर एवं उमंग सक्सेना ने माना।
इन संस्थाओं की रहीं सहभागिता
संपूर्ण आयोजन में सकल व्यापारी संघ, आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट, रोटरी क्लब ‘मेन’ एवं रोटरी क्लब ‘आजाद’, रोटरेक्ट क्लब, शिवगंगा, श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति, गायत्री परिवार, जिला महिला पतंजलि योग समिति, जिला पेंशनर्स एसोसिएशन, वरिष्ठ नागरिक फोरम, वरिष्ठ नागरिक परिसंघ, जिला आजाद साहित्य परिषद, माहिष्मति कला मंच, राष्ट्रीय कवि संगम, अंर्तराष्ट्रीय मानव अधिकार काउंसिल, जिला बाल अधिकार मंच, बचपन बचाओ आंदोलन, चेतन्य समाहित संस्था, इनरव्हील क्लब ‘मेन’ और इनरव्हील क्लब ऑफ झाबुआ ‘शक्ति’, हाथीपावा मार्निंग क्लब, गुड मार्निंग क्लब कॉलेज मार्ग, संस्कार भारती, मातंगी पारमार्थिक ट्रस्ट, संकल्प ग्रुप, संकल्प अभिव्यक्ति मंच, एकीकृत ब्राम्हण महासभा, जिला टेंट एवं लाईन एसोसिएशन, राजपूत समाज, श्री राजपूत करणी सेना, अरोड़ा समाज, सिंधी समाज, नीमा समाज, सकल जैन समाज सहित समस्त सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक संस्थाओं और समाज के प्रमुख तथा पदाधिकारी आदि सपरिवार उपस्थित थे।

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