RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

झाबुआ के रामकुल्ला नाले पर नग्न अवस्था में मिला युवक का शव, हत्या या आत्महत्या … !, पुलिस जुटी जांच में स्वास्थ्य विभाग की दिखी बड़ी लापरवाही, शव वाहन की जगह युवक के शव को ऑटो रिक्शा में लाया गया घर


झाबुआ। शहर के रोहीदास मार्ग निवासी एक युवक का शव 7 मार्च, सोमवार को सुबह बस स्टेंड के पीछे रामकुल्ला नाले की निर्माणाधीन पुलिया पर नग्न अवस्था में मिला। युवक ने आत्महत्या की है, या हत्या है, यह पुलिस के लिए जांच का विषय है। युवक के दोस्तों के अनुसार वह नशे का आदि था एवं बस स्टेंड के पीछे ही उसकी सेलून की दुकान भी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहीदास मार्ग निवासी रितिक पिता दिनेश राठौर उम्र 20 वर्ष जो अशिक्षित होकर अपने छोटे भाई के साथ बस स्टेंड के पीछे पिछले करीब 5-6 महीनांे से सेलून की दुकान संचालित कर रहा था। परिजनों के अनुसार रितिक 6 मार्च, रविवार रात से ही घर से लापता हो गया था। रातभर परिवारजनों से उसकी तलाश की, लेकिन पता नहीं चला। सुबह करीब 8.30 बजे परिजनों को नगरपालिका में कार्यरत सफाईकर्मियों ने पहचान कर सूचना दी कि रितिक का शव नग्न अवस्था में रामकुल्ला नाले की पुलिया पर पड़ा हुआ है। जिस पर परिजनों ने पहंुचकर शव को निजी वाहन से पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय लाया। जहां दोपहर में ही शव का पोस्टमार्टम हुआ। इस दौरान परिजनों एवं अन्य लोगों के साथ युवक के दोस्तों की भी भीड़ लगी रहीं।
हत्या या आत्महत्या ?
युवक के दोस्तों ने बताया कि रितिक नशे का आदि था, जिसे छोड़ने के लिए उनके द्वारा कई बार उसे समझाया गया, लेकिन उसके द्वारा नहीं मानने एवं नशा कर दुकान के संचालन के बाद रात को घर भी लेट पहंुंचता था। संभवत युवक की मृत्यु का कारण भी नशा होना हो सकता है। पुलिस के लिए यह जांच का विषय है कि उसकी हत्या हुई है या नशे के कारण ही उसकी मृत्यु हो गई है। इस संबंध में थाना प्रभारी झाबुआ सुरेन्द्रसिंह गाडरिया ने बताया कि घटना में फिलहाल मर्ग कायम कर जांच आरंभ कर दी है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हो सकेगा।
ऑटो रिक्शा से शव को लाए घर
उधर इस मामले में जिला चिकित्सालय प्रबंधन की भी बड़ी लापरवाही सामने आई। पीएम बाद युवक के शव को घर पहुंचाने के लिए शव वाहन उपलब्ध नहीं करवाए जाने से परिवारजन शव को ऑटो रिक्शा में लेकर घर पहुंचे। प्रायः इस तरह की हत्या-आत्महत्या के मामलों में देखने में आता है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा शव वाहन उपलब्ध नहीं करवाने से परिजन, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग शव को टेªक्टर, तूफान जीप में ही लेकर जाते है। स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

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