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कुछ दिन पहिले ही सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के मौत दिल्ली में कोरोना के वजह से हो गइल रहे. लेकिन उनका से जुड़ल कईगो अइसन किस्सा बा, जवन आज भी लोगन के जेहन में बा. कहल जाला कि शहाबुद्दीन के कबो आपन बाहुबली छवि खातिर अफसोस ना भइल रहे. शहाबुद्दीन के सीवान में कइसन चलती रहे ई 2003 के घटना से समझल जा सकेला. जानीं ओह घटना के बारे में…

क्या आप डॉन है ? जब शहाबुद्दीन से ई सवाल पूछल गइल रहे तs ऊ जबाब के बदले सवाल कइले, “डॉन की परिभाषा क्या है ? पहले परिभाषा बताइय़े फिर बताऊंगा कि मैं क्या हूं ? पता ना मीडिया के लोग काहे हमरा के डॉन लिखे लागले? एह बात से हमरा कवनो फर्क ना पड़ेला कि के का कह रहल बा ? हमार लोग, हमार समरथक हमरा के जवन रूप में देखलs पसंद करे ले, हम ओही रूप में रहब. एह रूप के बदले के कवनो जरूरत नइखे.” जंगबहादुर बाहुबली नेता शहाबुद्दीन से जुड़ल ई प्रसंग सुनवले तs जयंत राज अउर सचिन देव के उतसुकता बढ़ गइल. तीनों जना सीवान के डीएभी मोड़ खाड़ा हो के बतियावत रहे लोग. जंगबहादुर कहले, शहाबुद्दीन के कबो आपन बाहुबली छवि खातिर अफसोस ना भइल रहे. सचिन देव कहले, शहाबुद्दीन के सीवान में कइसन चलती रहे ई 2003 के घटना से समझल जा सकेला. 2003 में शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी के आदेश सचिन देव कहले, 2003 में राबड़ी देवी के सरकार रहे. शहाबुद्दीन राजद के सांसद रहन. उनका खिलाफ 38 केस चलत रहे जवना में से 26 में चार्जशीट हो गइल रहे. ओह घरी डीपी ओझा बिहार के डीजीपी रहन. ऊ कवनो राजनीतिक दबाव माने वला अफसर ना रहन. 31 जुलाई 2003 के डीपी ओझा एगो किडनैपिंग केस में शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी के वारंट जारी कर देले. ऊ सीवान के एसपी अउर एसटीएफ के एसपी के कहले की राजद सांसद शहाबुद्दीन के जल्दी से जल्दी गिरफ्तारी सुनिश्चित कइल जाव. डीजीपी के ऐह आदेश से राबड़ी सरकार में हड़कंप मच गइल. राजद के सरकार रहते पाटी के सांसद के गिरफ्तारी के आदेश निकल गइल. सीवान के मुन्ना चौधरी किडनौपिंग केस के आइओ रहन शिवाथ चौधरी. ऊ दिल्ली पुलिस कमिश्नर के फोन क के सांसद शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी खातिर सहजोग मंगले. ओह घरी लोकसभा के सत्र चलत रहे. शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी खातिर छापामारी होखे लागल. राबड़ी सरकार के सामने बिकट समस्या खाड़ा हो गइल. डीजीपी शहाबुद्दीन के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसे लगले. डीपी ओझा के कड़ाई से बेदमजयंत राज कहले, ई तs बहुत साहस के काम कइले रहन डीपी ओझा. सचिन देव कहले, हां, डीपी ओझा के कड़ाई से खलबली मच गइल रहे. सांसद शहाबुद्दीन के सुरक्षा खातिर बिहार पुलिस के 9 बडीगाड दिहल गइल रहे. डीजीपी सभ सरकारी बडीगाड के वापस लेवे के आदेश जारी कर देले. शहाबुद्दीन के गिरफ्तार करे खातिर बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में छापेमारी होखे लागल. सांसद शहाबुद्दीन के कहीं आतापाता ना मिले. जब कुरकी जपती के तैयारी होखे लागल तs पुलिस बिभाग के कुछ अफसर के गितिबिधि बढ़ गइल. ओह घऱी के एगो पुलिस अफसर के हवाले से अखबार में खबर छपल रहे कि कुछ नेता लोग शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी से बचावे खातिर सलेंडर करे के मौका देल चाहत रहन. एगो नेता जी सीवान के पुलिस अफसर को फोन कर के कहले रहन कि अगर शहाबुद्दीन के गिरफ्तारी होई तs भारी बबाल हो सकेला. तब आरोप लगाल रहे कि सीवान पुलिस भीतरे- भीतर शहाबुद्दीन के सलेंडर करे के मौखिक रजामंदी दे देले रहे. एक दिन शहाबुद्दीन ट्रेन से उतरले . आपन घरे परतापपुर गइले. सलेंडर के योजना बनवले. लेकिन एह बीच पुलिस उनका के गिरफ्तारी ना कर सकल. गिरफ्तार ना कर सकल पुलिस, कइले सलेंडर जंगबहादुर पूछले, एकरा बाद का भउल ? सचिन देव कहले, 13 अगस्त 2003 के शहाबुद्दीन परतापपुर से सीवान कोट में सलेंडर खातिर निकलले. उनका साथे करीबन 250 गाड़ी के काफिला रहे. चार किलोमीटर जाये खातिर शहाबुद्दीन गाड़ी के रेला लगा देले. ऊ देखावल चाहत रहन कि सीवान में उनकर केतना हनक बा. हजारों समर्थक के भीड़ के साथे ऊ कोट पहुंचले. अदालत में सलेंडर कइला के बाद उनका जेल भेज दिहल गइल. आठ महीने बादे लोकसभा के चुनाव होखे वला रहे. शहाबुद्दीन के लोकसभा चुनाव के तइयारी करे के रहे. बिहार में आपन सरकार रहे. मेडिकल ग्राउंड पs ऊ जेल से अस्पताल में आ गइले. अस्पताल के पूरा एक तल्ला शहाबुद्दीन खातिर खाली कर दिहल गइल. चुनावी रननीति बनावे खातिर ऊ अस्पताल में रोज मीटिंग मोलकात करे लगले. दरबार भी लागे लागल. लोग आ-आ के आपन समस्या भी बतावे लगले. बिरोधी दल के एकरा के मुद्दा बना देलस. एकरा बाद पटना होईकोट आदेश देलस कि शहाबुद्दीन के बिना देरी कइले जेल में भेजल जाव. कोट के आदेख के बाद उनका अस्पताल से जेल जाये पड़ल.
शहाबुद्दीन के किला ढाहे के झलक जयंत राज कहले हं, हमरा 2004 के चुनाव इयाद बा. शहाबुद्दीन जेल से ही चुनाव लड़ले रहन. उनका खिलाफ जदयू के ओमपरकास जादव (बाद में भाजपा के सांसद बनले) खाड़ा भइल रहन. 2004 के सीवान लोकसभा चुनाव में 500 सौ अधिका बूथ लूटे के शिकायत भइल. आरोप लागल रहे कि परसासन आंख मूंदले रह गइल अउरी शहाबुद्दीन के लठैत बूछ लूट लेले. चुनाव आयोग 193 बूथ पर फेन से वोटिंग के आदेश देलस. लेकिन एकरा बादो शहाबुद्दीन चुनाव जीत गइले. एह चुनाव में ओमपरकास पs गोली भी चल रहे लेकिन ऊं बांच गइल रहन. कहल जाला कि शहाबुद्दीन राज में सीवान में कवनो दोसरा पाटी के झंडा-बैनर ना लागत रहे. केकरो खुलेआम बिरोध करे के हिम्मत ना रहे. लेकिन अतना डर-भय के बीच भी ओमपरकास जादव के दू लाख से अधिका भोट मिलल रहे. एही चुनाव में झलक मिल गइल रहे कि अगर शहाबुद्दीन के केहू हरा सकता बा तs ऊ ओमपरकास ही बाड़े. 2009 में सजाय हो गइला के चलते शहाबुद्दीन के चुनाव लड़े पs रोक लाग गइल. तब राजद उनका पत्नी हिना शहाब के टिकट देले रहे. लेकिन अबकी बेर ओमपरकास जादव निरदलीय चुनाव लड़ के हिना शहाब के हरा के शहाबुद्दीन के किला ढाह देले रहन. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)









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