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पारा में साधु – साध्वी भगवंतों का हुआ मंगल प्रवेश जैन धर्म मे तप का महत्व – आचार्यश्री


पारा से प्रभाष ए जैन की रिपोर्ट
पारा। सच्चा दोस्त न्यूज़। सोमवार को 3 आचार्यों सहित 50 से अधिक साधु – साध्वी भगवंतों ने बैंड बाजो के साथ नगर प्रवेश किया। संतो ने नगर प्रवेश के बाद सबसे पहले मुख्य मार्ग स्थित श्री आदिनाथ –  शंखेश्वर – सीमंधर धाम जिन एवं दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेन्द्र सूरीश्वर जी महाराज के जिनालय पहुंच कर दर्शन वंदन किये। नवकारसी के बाद  करीब 10 बजे मंदिर प्रांगण से शोभा यात्रा निकाली गई।  जिसमे सबसे आगे आदिनाथ भगवान के चित्र पर समाज के प्रत्येक घर से गहुली की गई। इसके बाद तीनों आचार्यो के साथ विशाल साधु समुदाय चल रहा था। श्रावकों के बाद विशाल साध्वी समुदाय आशीर्वाद देते चल रही थी। शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए पुनः मंदिर प्रांगण स्थित श्री महावीर भवन पहुंची जहां सामूहिक गुरुवंदन के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाश तलेसरा ने पधारे सन्तो का शाब्दिक स्वागत, वंदन किया। साथ ही पधारे आचार्यो का आगामी कार्यक्रम बताया। श्री संघ और परिषद परिवार के सदस्यों द्वारा तीनो आचार्यो को काम्बली वोहराई गई। इसके बाद उपस्थित श्रावक – श्राविकाओं को प्रवचन देते आचार्य अक्षयप्रभ सूरिजी ने तप की महत्ता बताई। आपने कहा की सुबह स्नात्र पूजा, मांगलिक प्रतिक्रमण हो, चातुर्मासिक प्रतिक्रमण के साथ कई सूत्रों में तप की महत्ता और तप की विशेषता बताई गई है। आपने धर्म के वेद में तप, श्रावकों के आवश्यक में तप, आचार में तप, नवपद में तप नवतत्व में तप को बताते कहा कि जैन धर्म मे तप बहुत व्यापक स्वरूप में हैं। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने जहां 400 दिनों तक का बड़ा तप किया था वहीं भगवान महावीर ने भी साढ़े 12 वर्षों तक किये तप में कुल करीब 349 दिन पारणा किया इसका मतलब वो साढ़े 11 वर्षो तक तप में रहे। आचार्य मुक्तिप्रभ श्री जी पारा संघ के आगामी सामूहिक वर्षीतप कार्यक्रम की प्रशंसा करते अधिक से अधिक श्रावक – श्राविकाओं को तप करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का संचालन सुरेश कोठारी ने किया।साधु – साध्वीजी भगवंतों के साथ आये 10 मुमुक्षुओं का दोपहर में अभिनंदन किया गया। सुबह तथा शाम का स्वामीवात्सल्य श्री संघ की ओर से रखा गया

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