RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

जीवन में बढ़ती सोशियल मीड़िया की भूमिका

सोशियल मीडिया उपयोग में सावधानी जरूरी,  बनता जा रहा है जीवन की धूरी  


  आज हर तरफ, हर कोई किसी न किसी रूप में सोशियल मीडिया के इर्द-गिर्द चहलकदमी करता नजर आता है । दुनिया की बड़ी आबादी विशेषकर नई पीढ़ी सोशियल मीडिया के किसी न किसी प्लेटफार्म की उपभोक्ता बन चुकी है । सोशियल मीडिया हमारे जीवन पर हावी होता जा रहा है । स्मार्ट होती दुनिया में हर कोई स्मार्ट फोन के सहारे घर अथवा पार्क में अकेला बैठकर भी पूरी दुनिया से जुड़ना चाहता है, प्रसिद्ध होना चाहता है और अपने मन को रंजन अथवा पसन्द आने वाले फीचर्स को देखना और सुनना चाहता है । हमारे जीवन में सोशियल मीडिया की भूमिका दिनों-दिन बढ़ती जा रही है । इस बात को किसी भी सूरत में नकारा नही जा सकता है । सोशियल मीडिया हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है । परन्तु इस सोशियल मीडिया की चकाचौंध से बराबर दूरी भी बेहद जरूरी है । अन्यथा हम सोशियल मीडिया के चक्रव्यूह में कब उलझ कर रह जायेंगें, यह पता ही नही चलेगा ।  सोशियल मीडिया के उपयोग की अपनी सीमाएं और मर्यादाएं है । जिसका ज्ञान और पालना बहुत ही जरूरी है । वहीं लोकप्रियता के प्रसार में सोशल मीडिया एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है ।

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  सोशियल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्हाट्सएप्प, फेसबुक, ट्विट्र, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, स्नैपचैट, यूट्यूब सहित कई तमाम अनगिनत वेबसाईटें सोशियल मीडिया का ही रूप है । जहां हमें एक बार प्रवेश के बाद देखते-देखते सुबह की दोपहर, दोपहर की शाम और शाम की रात कब हो जाती है, पता ही नही चलता है । अमूमन देखने में आता है कि प्रतिदिन 5 घण्टे से भी अधिक का हमारा अमूल्य समय हाथ से रेत की तरह फिसल कर चला जाता है और हम हाथ मसलते ही रह जाते है । सोशियल मीडिया की मृगतृष्णा में हर कोई वन के मृग की मानिंद फसता और भटकता जा रहा है । जिसमें हमारा काफी समय यूं कहे कि बर्बाद हो जाता है, तो भी कोई अतिश्योक्ति नही होगी । सोशियल मीडिया के अधिक उपयोग के चलते हमारी आंखों और दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है । वहीं सोशियल मीडिया का एक सकारात्मक पक्ष भी है । सकारात्मक भूमिका से किसी भी व्यक्ति, संस्था, समूह और देश आदि को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है। सोशियल मीडिया के माध्यम से आज का युवा जहां अपने करोबार को नई ऊंचाईयां दे रहा है, वहीं आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक आदि क्षेत्रों से जुड़े अपने सपनों को साकार कर रहा है ।

  सोशियल मीडिया के जहां कई फायदे है वहीं इसी माध्यम के तमाम प्रकार के दुष्परिणाम भी है । अधिक सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को डिप्रेशन की तरफ ले जा रहा है। कितने शेयर, कितने लाइक्स की चिंता युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करती है। ऑनलाइन ट्रोलिंग आजकल एक आम बात हो गयी है। ट्रोलिंग के चलते कितने युवा डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो रहे है। आज जहां युवा पीढ़ी को सोशियल मीडिया के उपयोग के प्रति पूर्ण रूप से सजग रहना है, वहीं नूतन पीढ़ी अर्थात् बच्चों को भी सोशियल मीडिया से दूर रखना इस दौर की सबसे बड़ी चुनौती है । जिसका हम सबको विशेषकर अभिभावकों को चिन्तन व मंथन करते हुए सामना करना बहुत ही जरूरी हो गया है । आज बच्चों की पढ़ाई के ऑनलाईन होने से सोशियल मीडिया में भी बच्चों की रूचि बढ़ने लगी है । बच्चे मूल रूप से इतने परिपक्व नही होते है कि सोशियल मीडिया में उनके लिए क्या हितकर और क्या अहितकर है ? जिसे वह समझ सके । ऐसे में सोशियल मीडिया का उपयोग करने वाले युवाओं को सचेत होने के साथ-साथ बच्चों का भी विशेष ख्याल रखने की अहम् जरूरत है ।

मुकेश बोहरा अमन
साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता
बाड़मेर राजस्थान

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