पुस्तकालयों से अटूट रिश्ता रखकर ही हम भारत को विश्व गुरु बना सकते हैंःप्रो. आशा शुक्ला

,पुस्तकालय विज्ञान के शिक्षकों की भूमिका एवं पाठ्यक्रम विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार

गया /इंदौर। पुस्तकों से हम जीवन में बहुत कुछ सीखते हैं। पुस्तकें हमारी चेतना को जाग्रत करती हैं।डॉ. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय का पुस्तकालय वृहद् एवं समृद्ध है। जब हम डॉ. अम्बेडकर के रचना संसार को देखते हैं तो उनके जैसा व्यक्तिव नहीं दिखाई देता है। हमें विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत डॉ. अम्बेडकर से सीखना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय हमें पुस्तकों के समीप रहकर ज्ञान दृष्टि को विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। उक्त बातें बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में पुस्तकालय, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं पुस्तकालय विज्ञान के शिक्षकों की भूमिका एवं पाठ्यक्रम में प्रस्तावित संशोधन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार को संबोधित करते हुए ब्राउस कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने बतौर अकादमिक कार्यक्रम श्रृंखला अध्यक्ष कही।

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कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में बताया कि पुस्तकालयों से अटूट रिश्ता रखकर ही हम भारत को विश्व गुरु बना सकते हैं। विश्वविद्यालय में स्थापित पुस्तकालय डॉ. अम्बेडकर के कार्यों और उनके कृतित्व को अधर देने के लिए संकल्पित हैं।पुस्तकों को पढ़कर राष्ट्र कल्याण का समरस भाव लोगों में उद्धृत हो सकता।

मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश नारायण गौतम ने कहा कि 21वीं सदी की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 है जो वैश्विक आवश्यकताओं के अनुकूल बनायी गई है। सभी वर्गो के लिए समावेशी शिक्षा की परिकल्पना की गई है। प्रो. गौतम ने कहा कि तकनीक के यथासंभव उपयोग एवं सतत सीखने का अवसर एनईपी उपलब्ध कराता है। उन्होंने आगे कहा कि एनईपी उच्चशिक्षण संस्थाओं के ग्रंथालयों को आत्मनिरीक्षण करने के लिए प्रेरित करती है।

बीज वक्ता की आसंदी से एम.एल.बी एक्सीलेंस कॉलेज के प्रो. अरविंद कुमार ने कहा कि पुस्तकालय विज्ञान में परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहा है। आधुनिकीकरण हो रहा है। सूचना विज्ञान का हम भारतीयकरण करें। भारतीय ज्ञान परम्परा का उल्लेख करना है। पुस्तकालय विज्ञान वर्तमान में ज्ञान के साथ कौशलयुक्त है।

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वेबीनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में पुस्तकालय संघ, इंदौर संभाग के अध्यक्ष डॉ. जीडी अग्रवाल ने कहा कि 34 वर्ष बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को पहले समझना होगा। इस नीति से युवाओं का सर्वांगीण विकास होगा।उन्होंने कहा कि विज्ञान और पुस्तकालय विज्ञान दोनों को समझना होगा। च्वाइस बेस्ड के्रडिट सिस्टम लागू किया गया जो आज के समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में पुस्तकालय विज्ञान को वह स्थान नहीं दिया गया जो इस विषय को मिलना चाहिए था।

मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रभात पांडे ने विशिष्ट अतिथि की आसंदी से कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने एनईपी को लागू किया है। जब तक हम लायब्रेरी साइंस को हमें आधार पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे तभी इसका लाभ विद्यार्थियों को मिल पाएगा। डॉ. पांडे ने रिक्त पदों को भरने की बात कही।

वेबीनार के अध्यक्ष एवं निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी भोज विश्वविद्यालय के प्रो. किशोर जॉन ने पुस्तकालय, पाठ्य सामग्री, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं पुस्तकालय शिक्षकों के संदर्भ में विस्तार से अपना विचार रखा।
कार्यक्रम में उपस्थिति अतिथियों का आभार ब्राउस के कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चेतना बोरीवाल ने किया। वेबीनार में देशभर के पुस्तकालयविद, विद्यार्थी, शोधार्थी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़े रहे।

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