न्याय की चाबी से अन्याय रूपी ताले को बंद किया जा सकता है- न्यायाधीश देवड़ा

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत बेरछा में दी अनुसूचित जाति के लोगों को अधिकारों की जानकारी

– कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।

– कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीण।

शाजापुर। जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुरेंद्रकुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत ग्राम बेरछा जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच ग्राम पंचायत बेरछा सत्तार भाई ने की। विशेष अतिथि के रूप में पूर्व सरपंच हाजी मुन्ना पठान, उपसरपंच कैतल पटेल, डॉ सीपी नाहर, ललित जैन लोकेश चौरसिया मंचासीन थे। कार्यक्रम में सचिव एवं अपर जिला जज राजेंद्र देवड़ा के द्वारा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया गया।

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न्यायाधीश देवड़ा ने कहा कि एससी, एसटी एवं 60 वर्ष से अधिक उम्र के कोई भी लोग जो न्याय पाने से वंचित रह जाते हैं, उन लोगों को जिला विधिक सहायता केंद्र में जाकर अपनी समस्याओं की जानकारी देने पर उनकी सहायता की जाती है। एससी, एसटी एक्ट, दुर्घटना, हत्या, पॉक्सो एक्ट आदि से लेकर आपसी झगड़ों के निपटारे के लिए जिला विधिक सहायता केंद्र में आवेदन देकर नि:शुल्क वकील की सहायता से केस लड़ सकते हैं। विधिक सहायता केंद्र के पैनल में 50 वकील हैं, जिनमें से किसी एक को चुनकर बिना किसी खर्च के केस लड़ा जा सकता है।

उन्होने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत एवं लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराने से संबंधित समस्याओं का निदान अविलंब किया जाता है। एससी, एसटी की हत्या उपरांत एक से तीन लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है। वहीं दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर तीन लाख के मुआवजे का प्रावधान है। साथ ही खाद्य सामग्री से संबंधित शिकायत दर्ज कराने पर प्रशासन द्वारा खाद्य सामग्री उपलब्ध कराया जाता है, जिससे कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रह सके।

कार्यक्रम में न्यायाधीश ने कहा कि लोगों में विधिक जानकारी का आभाव होता है, इसलिए एससी, एसटी लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया है। ताकि प्रत्येक लोगों तक सरकार की सभी योजनाएं पहुंच सके। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के बारे में बताया गया। उन्होने बताया कि यह अधिनियम अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लोगों पर अत्याचार और अपराध रोकने और ऐसे अपराधों से पीडि़त व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए बनाया गया है।

अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लोगों का उत्पीडऩ करने वाले व्यक्ति को कम से कम छह महीने और अधिक से अधिक पांच साल की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है। कार्यक्रम में न्यायाधीश ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा हर समस्या के ताले की चाबी है और शिक्षा से ही समाज और देश का विकास होता है। उन्होने ग्रामीणों से आह्वान किया कि अपने बच्चों जरूर पढ़ाएं। साथ ही कहा कि न्याय की चाबी से ही अन्याय रूपी ताले को बंद किया जा सकता है। हर व्यक्ति को अपने अधिकारोंं की जानकारी होना चाहिए।

वन संरक्षण का दिलाया संकल्प

शिविर के दौरान न्यायाधीश देवड़ा जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के निस्तारण को लेकर न्यायालय परिसर में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में सोमवार से शुक्रवार को लगने वाली स्थाई लोक अदालत की जानकारी दी। साथ ही वन संरक्षण का संकल्प दिलाते हुए कहा कि हमारा देश वन संपदा और जैव विविधता के मामले में आदिकाल से ही संपन्न रहा है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ औद्योगिक विकास की चाह या आवश्यकता ने पेड़ पौधों को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई है।

परिणाम स्वरूप कई फलदार और औषधीय पौधे आज केवल किस्से कहानियों तक ही सीमित रह गए हैं। वनों के खत्म होने की प्रक्रिया पर्यावरण को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, बावजूद इसके भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों के वन क्षेत्र में तेजी से कमी आ रही। ऐसे में हम सब संकल्प लें कि कम से कम एक पौध जरूर लगाएं और उसकी पेड़ बनने तक देखभाल करें, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके। इस अवसर पर थाना प्रभारी रवि भंडारी, पैरालीगल वालेंटियर सावेद पठान, रितेश सोलंकी सहित ग्रामीण मौजूद थे। संचालन सईद पठान ने किया तथा आभार जीएल राजोरिया ने माना।

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