क्या है कि अपने शरीर में पानी की मात्रा कम होती है तो – डॉ रेणुका देसाई

चलो आज हम पंचतत्व से अपने पाचन तंत्र को जानते हैं पाचन तंत्र क्या है पाचन तंत्र एक प्रोसेस है जिसमें जो हम खाना खाते हैं वह पौष्टिक तत्वों में परिवर्तित होकर मल के रूप में कूड़ा बाहर निकाल देता है। अब एक उदाहरण लेते हैं जब हम खाना खाते हैं तो उसके अंदर पहले से ही पंच तत्व शामिल होते हैं किंतु जब हम कोई सूखा खाना खाते हैं तो उसमें पानी नहीं होता जब पानी के बगैर हम खाना खाते हैं तो हमारेे शरीर को पानी की आवश्यकता होती है तो शरीर क्या करता है ,दूसरे अवयवों से पानी लेकर उस सूखे भोजन को पचाने की कोशिश करता है।

एक और उदाहरण ले जब हम ब्रेड या पाव खाते हैं जो कि मैदे से बनी हुई चीज है ऐसी कोई अन्य वस्तुएं खाते हैं तो होता क्या है कि अपने शरीर में पानी की मात्रा कम होती है शरीर अपना चाहता है कि हम पानी दे उसे अगर पानी नहीं दिया जाता तो यह मैदा या ऐसे अन्य पदार्थ अपनी आंतों में चिपक जाते हैं अब हमें बहुत ध्यान से अपने खाने का चयन करना है। इसका मतलब क्या की जब शरीर को पानी चाहिए हमें जूस फलाहार वगैरह अपने शरीर को देना चाहिए ताकि अपना शरीर हाइड्रेटेड रहे मतलब पानी से पूर्ण रहे। दूसरा उदाहरण, जब शरीर पानी से भरा हुआ है तब मेरा शरीर यह मांग करता है कि यह पानी कैसे कम हो शरीर से मतलब तब हमें ऐसे पदार्थ खाने चाहिए जब शरीर में से अत्याधिक पानी है ,ज्यादा पानी निकाल सके। अब शरीर को पाचन के लिए हवा की जरूरत होती है हवा क्या करती है जो हमने खाना खाया है उसे अपनी आंतों की तरफ फैंका जाता है तब जाकर हमारा पाचन तंत्र सही चलता है जब खाना पाचन तंत्र के अंदर पहुंचता है, वहां पौष्टिक तत्व उसमें से निकाल लिए जाते हैं और रक्त में मिश्रित हो जाते हैं तो यह जो रक्त है जिसमें न्यूट्रिएंट्स है वह पूरे शरीर में संचारित होता है ।

मतलब यहां पर जो वेस्ट मटेरियल या ऐसा कहे कि जो कूड़ा बचाता है वह कूड़ा दूसरी तरफ से मतलब हमारे आंतों से होते हुए हमारे गुदा से निकल जाता है ।अब इस प्रक्रिया के दौरान क्या होता है कि हमारे पेट में एक रस निर्मित होता है जिससे भोजन को पचाया जाता है ।भोजन को खंडित किया जाता है न्यूट्रिएंट्स(खनिज) में जो पृथ्वी तत्व है वह पृथ्वी तत्व यह सब जमा करने मेंशरीर की मदद करता है अगर आकाश तत्व नहीं है तब यह खाना पूर्ण रूप से अटक जाता है हमारी आंतो में तो अब हमें शरीर का ध्यान रखना है और शरीर को अतिरेक से खाना नहीं देना है। जब हम ज्यादा खा लेते हैं , तब हमारे शरीर में डकार लेने की भी जगह नहीं होती । डकार मतलब शरीर की सूचना कि अब खाना बंद करो ।खाना ठूंस ना बहुत बुरा है बाकी सब जो हमारे तत्व है उनका काम सही तरीके से नहीं हो पाता जब आकाश तत्व की कमी होती है ।

चलिए समझते हैं उदाहरण से जब हम ज्यादा खाना खा लेते हैं पृथ्वी तत्व बढ़ जाता है और जो हवा है वह खाने को धक्का नहीं दे सकती पेट की ओर यहां तक की हमारे पास डकार लेने तक का आकाश से तो नहीं होता है अब यह डकार क्या होती है डकार एक सूचना है हमारे शरीर के लिए कि अब खाना बंद करिए पानी क्या करता है जब हम पानी पीते हैं खाना खाने के बाद तो खाना है जो पृथ्वी तत्व है पानी ऊपर तैरते रहता है आकाश तत्व है नहीं तब होता क्या है यह पानी हमारे फेफड़ों की तरफ आगे बढ़ता है ऊपर की तरफ आता है हमारी सांस रुकने लगती है हमें अत्याधिक जलन का आभास होता है और मानो एसिडिटी होने लगती है अब यह सब जो अस्त-व्यस्त खाना हमने खाया है इसी की वजह से हो रहा है सो हमें यह सीखना है कि खाना पचाने के लिए हमें अन्ना को पूरी तरह से चबाना है।

जब खाना है छोटे-छोटे निवाले लेकर जब खाना है ताकि, जो हमारे यहां पर सलाइवा या लार है वह हमारे खाने के अंदर पूर्ण रूप से मिश्रित हो जाए ।अब जब वह मिश्रण हो जाता है तो जो खाने का पाचन है वह अत्याधिक सरल हो जाता है ।जब हम चबा लेते हैं तू जो वायु तत्व है या हवा है वह उस खाने को पेट की तरफ जाने के लिए मदद करती है और यह जाता है हमारे अन् नली के द्वारा हमारे पेट तक पहुंचता है। अब हम समझ गए हैं कि एसिडिटी ,रिफ्लक्स ,बर्निंग सेंसेशन या एसिड रिफ्लक्स क्यों होता है क्योंकि हम गलत तरह से खाना खाते हैं ।

हेेस्ट इस वेस्ट ऐसा कहा गया है । खाना धीरे-धीरे खाइए आगे और समझाएं पाचन तंत्र के बारे में , थोड़ा सा हलन चलन पर भी ध्यान देना है। मतलब खाना खाकर कहीं कुर्सी पर बैठ गए या बैठकर काम कर रहे हो। तब भी शरीर का हलन चलन ना होने की वजह से शरीर रूपी मशीन पूरी तरह से काम नहीं करती। अब होता यह है, खाना खाने के बाद शरीर का ऊपरी हिस्सा काम करता है किंतु जो निचला हिस्सा है नाभि के नीचे, वहां कोई सक्रिय क्रिया नहीं होती। मतलब, कमर के नीचे का हिस्सा निष्क्रिय होता है। तो जाने कि चलना कितना जरूरी है ।

जब हम चलते हैं तब शरीर रूपी मशीन खाने को पूरी तरह से पाचन कर सकता हैं और उससे शरीर को नुकसान नहीं होता। चलना बहुत जरूरी। जब हम चलते नहीं हैं ,तब हमारा खाना हमारे नाभि के नीचे एकत्रित हो जाता है और मोटापा दिखाई देता है और आगे जो बीमारियां होती हैं उस मोटापे की वजह से वह अलग होता है ।शरीर में रक्त संचार सही नहीं होता क्योंकि पैर चलते ही नहीं जब पैर नहीं चलते, तो शरीर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता तू शरीर का हर हिस्सा तेजस्वी नहीं होता ।

समान पौष्टिकता पूरे शरीर को नहीं मिलती जब हम खाने में तेलिया या ऐसे चिकने पदार्थ सम्मिलित करते हैं तब वह अग्नि का काम करते हैं जैसे गाड़ी में पेट्रोल रूपी इंधन काम करता है उसके लिए चलना बहुत जरूरी है वरना शरीर गुब्बारे की भांति फूल जाता है। और कई जगहों पर मेद एकत्रित हो जाता है । होता यह है कि सब अवयव कम काम करते हैं और इससे कई बीमारियां देखने मिलती है जैसे कि मधुमेह (डायबिटीज ),यूरिक एसिड यकृत की बीमारियां ऐसी कई बीमारियां जो हमारे शरीर के निचले हिस्से को न चलाने की वजह से होती है ।अब हम इसको समझते हैं कि सही खाना सही वक्त पर और सही अंतराल से खाना चाहिए ,खाने को कम खाना चाहिए, भूख है उससे थोड़ा कम खाना चाहिए और भावनाओ में बहकर नहीं खाना चाहिए। समय-समय पर पानी पीना चाहिए ताकि शरीर ऊर्जा से भरा रहे ।समय-समय पर चलना चाहिए, वॉक करना चाहिए ताकि शरीर रूपी मशीन चलती रहे और सेहतमंद रहे । सेहतमंद रहिए खुश रहिए धन्यवाद।

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