शरद पूर्णिमा उत्सव समाज को संगठित करने का माध्यम

संघ ने शाखाओं पर मनाया शरद पूर्णिमा उत्सव

गया।शरद पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा गया शहर में बाईपास, सहमीर तकिया, सिकरिया मोड़, मगध कॉलोनी, बैरागी, मानपुर, पटवाटोली एवं 6 खंडो सहित कुल 13 स्थानों पर शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। जिसमें संघ के स्वयंसेवक तथा समाज के अन्य पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे समेत लगभग 2000 लोग इस शरद पूर्णिमा उत्सव में सम्मिलित हुए। सभी 13 कार्यक्रम स्थलों पर संघ के अधिकारियों का बौद्धिक हुआ। जिसमें सिकरिया मोड़ पर संघ के गया विभाग के सह विभाग संचालक सियाशरण प्रसाद एवं सहमीर तकिया में गया के जिला संघचालक देवनाथ मेहरवार का मार्गदर्शन स्वयंसेवकों को प्राप्त हुआ।

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बौद्धिक के दौरान शरद पूर्णिमा के दिन के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला गया और बताया गया कि शरद पूर्णिमा के दिन से ही शरद ऋतु की शुरुआत होती है। तथा इसी दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है तथा उसके किरणों में अमृत का प्रभाव होता है। इसलिए समस्त हिंदू समाज शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर एवं खाजा चंद्रमा के किरणों से निकलने वाले प्रकाश में रखते हैं तथा प्रसाद रूप में उसे ग्रहण करते हैं।

संघ भी पिछले 96 वर्षों से इस कल्याणकारी दिन शरद पूर्णिमा उत्सव को मनाते आ रहा है। संघ के स्वयंसेवक शरद पूर्णिमा के दिन अपने शाखा क्षेत्र में निवास करने वाले परिवारों के बीच शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाते हुए, सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। तथा समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं।

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