क्षेत्र में डेंगू का कहर जारी, अस्पतालों में मरीजों की भीड लग रही

नागदा । क्षेत्र में इन दिनों डेंगू बुखार ने काफी कहर मचा रखा है, इससे पूर्व शहर में कभी भी इतनी बडी मात्रा में डेंगू के मरीज नहीं पाऐ गए, हालांकि वर्षाकाल के दौरान एवं उसके बाद मौसमी बिमारियों का दौर जरूर आता है लेकिन इस वर्ष जिस तरह से डेंगू के मरीज अत्यधिक मिल रहे हैं उसने स्थानिय प्रशासन एवं नगर पालिका की कथन और करनी को जनता के सामने लाकर रख दिया है।

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आलम यह है कि शहर के बीचों-बीच गंदगी का अम्बार बन चुकी कृष्णा जिनिंग फैक्ट्री की कोई सुध लेने वाला नही हैं यहॉं जल भराव, गंदगी मौसीम बिमारियों का कारण बन रही है। शहर के व्यस्तम मार्ग, सब्जी मण्डी एवं व्यवसायिक स्थल सीधे इस क्षेत्र से जुडे हुए हैं, तथा मौसमी बिमारियों का बडा कारण शहर के मध्य फैली गंदगी बन रही है।

विगत दो वर्षो से कोरेाना महामारी से जुझ रहे नागरिकों को अब डेंगू के प्रकोप को झेलना पड रहा है। कभी दिल्ली जैसी बडे शहरों में ही डेंगू का इतने अधिक मामले देखे जाते थे लेकिन वर्तमान में पुरा प्रदेश ही डेंगू बिमारी की चपेट में दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां कोरोना से राहत है, वहीं दूसरी तरफ डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। बड़े लोगों के अलावा छोटे बच्चे भी अब डेंगू की चपेट में आने लगे हैं। नगर के एक 7 महीने के बच्चे की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकृत आंकड़ों में भी नागदा-खाचरौद विकासखंड में डेंगू के मरीजों की संख्या 50-60 तक पहुंच गई है। हालांकि वास्तविक मरीजों का आंकड़ा इससे कई गुना अधिक सैकडों में है।

विगत दो महिनों से क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप

नगर सहित आसपास के इलाकों में पिछले करीब डेढ़ महीने से डेंगू के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं लेकिन एक वर्ष से भी छोटे बच्चे में डेंगू होने का मामला विकासखंड में पहली बार सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चंबल सागर मार्ग के समीप रहने वाले एक परिवार के 7 महीने के बच्चे की तबीयत खराब होने से उसे पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिया था। तबीयत ज्यादा खराब हुई तो परिजन उसे लेकर उज्जैन चले गए। उज्जैन में बच्चा 13 अक्टूबर से भर्ती है।

बच्चे में डेंगू की संभावना को देखते हुए उसकी जांच की गई। सोमवार को बच्चे की डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मंगलवार को जब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी लगी तो सुबह ही स्वास्थ्य विभाग की टीम चंबल सागर मार्ग पहुंच गई। दल ने क्षेत्र में लोगों के सैंपल लिए। साथ ही आसपास के घरों में जमा पानी की भी जांच की। जहां लार्वा मिलने पर उसे नष्ट किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी विकासखंड में अब तक 50 मरीजों की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव की पुष्टि की है।

बीएमओ डॉ. कमल सोलंकी ने बताया चंबल सागर मार्ग क्षेत्र के एक 7 माह के बच्चे की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बच्चे का उज्जैन में उपचार चल रहा है। डेंगू की रोकथाम के लिए नियमित रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर सैंपलिंग कर लार्वा को नष्ट करने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी जागरूक कर साफ-सफाई रखने की समझाइश दी जा रही है।

नपा प्रशासन की लापरवाही भी बन रही कारण

नगर में नियमित रूप से न तो दवा का छिड़काव किया जा रहा है और न ही साफ-सफाई। जिसकी वजह से अधिकांश क्षेत्रों में गंदगी की स्थिति बनी हुई है। कृष्णा जीनिंग परिसर, जन्मेजय अपार्टमेंट के समीप खाली पड़ी जमीन, विद्या नगर, इंदु कॉलोनी, प्रकाश नगर, एप्रोच रोड, पाडल्या रोड, मवेशियों का हाट सहित कई इलाकों में कचरों के ढेर और जमा पानी की स्थिति देखी जा सकती है। ऐसे में स्थानिय प्रशासन को जल्द से जल्द कारगर कदम उठाने की आवश्यकता है।

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अपना स्वरूप बदल रहा डेंगू

इंदौर के कई जाने-माने चिकित्सकों का कहना है कि सारी रिपोर्ट्स निगेटिव आने के बाद लक्षण डेंगू के आ रहे हैं। जोड़ों में सूजन, शरीर पर रेशेज, बुखार 102 से उपर जाना आदि। लेकिन रिपोर्ट्स निगेटिव आने के बाद भी वही उपचार देना पड़ रहा है जो पॉजिटिव को देते हैं। वायरस इस प्रकार म्युटेंट कर रहा है कि रोजाना सुबह और शाम में दवाई बदलने की नौबत आ जाती है। परिजन पूछते हैं कि क्या डेंगू कोरोना के रूप में रिटर्न तो नहीं हुआ ? चिकित्सकों के पास कोई जवाब नहीं है।

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