रावण के पुतले में आग लगते ही दशहरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा

नागदा । बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर शुक्रवार को नगर में दशहरा मैदान और बिरलाग्राम स्थित ग्रेसिम खेल प्रांगण में रावण के पुतलों का दहन हुआ। श्रीराम का धर्म का तीर चलते ही अहंकार से भरे रावण का पुतला जलकर खाक हो गया। दहन होते ही लोगों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी। रावण दहन को देखने के लिए दोनों स्थानों पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।
दशहरा मैदान पर दशहरा उपलक्ष्य समिति के तत्वाधान में 71 फीट ऊंचे रावण का वध एवं दहन किया गया।

समिति के संरक्षक बालेश्वर दयाल जायसवाल के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में विधायक दिलीपसिंह गुर्जर, पूर्व विधायक लालसिंह राणावत, दिलीपसिंह शेखावत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष राधे जायसवाल, भाजपा मण्डल अध्यक्ष सीएम अतुल, एसडीएम आशुतोष गोस्वामी, सीएसपी मनोज रत्नाकर, मण्डी थाना प्रभारी श्यामचन्द्र शर्मा, तहसीलदार आशीष खरे, नायब तहसीलदार व समिति के कोषाध्यक्ष राधेश्याम कामरिया मौजुद थे। अतिथियों का स्वागत समिति के अध्यक्ष बद्रीलाल पोरवाल, प्रशांत मेहता, ओम सेठिया, संजय शर्मा, प्रहलाद रघुवंशी, राजेश मोहता, दिलीप कांठेड, चेनसिंह रघुवंशी आदि ने किया।

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रावण प्रतिमा का निर्माण, वेशभुषा व कलर करने वाले कलाकारों का समिति द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन समिति के उपाध्यक्ष जगदीश मेहता ने किया व आभार कृष्णकांत जायसवाल लाला भय्या ने माना। मंचीय कार्यक्रम के पश्चात लक्कडदास मंदिर से रामजी की सवारी दशहरा मैदान पर पहुॅंचने पर अतिथियों द्वारा रामजी-लक्ष्मणजी व हनुमानजी की पूजा अर्चना कर अगवानी की गई तथा रंगारंग आतिशबाजी के बीच अहंकारी रावण के पुतले का वध कर दहन किया गया। पुतला दहन होते ही हजारों की संख्या में मौजुद नागरिकों ने जय-जय श्रीराम के नारे लगाऐ तथा एक दुसरे गले लगाकर व बडों के चरण छू कर दशहरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाऐं दी गई। राजस्थान नवयुवक मंडल द्वारा नगर पालिका परिषद् और ग्रेसिम उद्योग के सहयोग से यह आयोजन किया गया था।

शासन द्वारा जारी कोरोना गाइड लाइन के चलते अधिक संख्या में भीड़ न हो, इसकी रोकथाम के लिए प्रशासन एवं पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाए गए थे। दशहरा मैदान की ओर जाने वाले रास्तों पर चेतनपुरा, गुरुद्वारा और सुभाष मार्ग पर बैरिकेड्स लगाए गए थे, जहां शुरुआत में वाहनों के साथ ही लोगों को भी रोका गया। हालांकि थोड़ी देर बाद ही बैरिकेड्स खोल दिए गए। जिसके बाद दशहरा मैदान पर हजारों की संख्या में लोग पहुंच गए। करीब दो साल के बाद दशहरा पर्व को लेकर कोरोना की गाइड लाइन के चलते लोगों में इस बार ज्यादा उत्साह था, क्योंकि पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रण के कारण केवल प्रतीकात्मक रूप से ही रावण का दहन हुआ था और दहन का स्थानीय स्तर पर सीधा प्रसारण किया गया था। इस वर्ष भी प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को रोकने के तमाम प्रयास किए लेकिन इसके बावजूद लोग दहन स्थल पर हजारों की संख्या में पहंुच गए।

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