RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

स्थापना प्रभारी की मनमानी से कर्मचारी हो रहे हैं परेशान

उज्जैन। बड़नगर जनपद पंचायत में स्थापना शाखा में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 अजय दुबे की मनमानी वह भ्रष्ट रवैया से जनपद पंचायत कार्यालय के कर्मचारी तो परेशान हैं ही साथ ही इसके भ्रष्ट रवैया से कई पंचायत सचिव शिकार हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी ने इसकी शिकायत नहीं की इसका सीधा कारण यह रहा कि अजय दुबे स्थापना शाखा प्रभारी  है और वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी शिकायतें करके उन्हें परेशान करता है और वरिष्ठ अधिकारी भी इस भ्रष्ट लेखापाल की बातों पर विश्वास करते हैं और संबंधित इस भ्रष्ट कर्मचारी की साजिश का शिकार हो जाते हैं ऐसा ही एक मामला सामने आया है ।

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जिसमें जनपद पंचायत में पदस्थ कर्मचारी उमाशंकर यादव को न्यायालय के आदेश अनुसार भृत्य चौकीदार कम बागवान के पद पर आदेश निकालने के लिए 30000 की रिश्वत दी गई। न्यायालय के अनुसार ही सहायक ग्रेड 3 पर आदेश निकालना था जो कि इस  कर्मचारी द्वारा नहीं निकाला गया। जबकि उमाशंकर यादव की नियुक्ति वर्ष 1994 में भृत्य के पद पर हुई थी लेकिन उसके बावजूद भी अजय दुबे द्वारा वर्ष 1999 का हवाला देते हुए व्रत के पद से हटाने के लिए आदेश दिया गया उसके बावजूद एक कंप्यूटर ऑपरेटर को रखने के लिए वर्ष 1999 का नियमों का पालन नहीं किए जा रहे हैं और उसे सहायक ग्रेड 3 के पद पर नियुक्ति देने हेतु कार्यवाही की जा रही है वरिष्ठ कार्यालय को गलत जानकारी भेजकर कई कर्मचारियों की पदोन्नति इस भ्रष्ट अजय दुबे ने रुकवा रखी है।

 उमाशंकर यादव का कहना है कि मेरी नियुक्ति वर्ष 1994 में भृत्य के पद पर हुई थी लेकिन उसके बावजूद भी अजय दुबे ने षड्यंत्र रच कर व 1999 के नियमों का हवाला देते हुए उसे भृत्य के पद से हटा दिया गया था उसके बाद उमाशंकर यादव ने हाईकोर्ट की शरण ली और हाईकोर्ट ने भी उमाशंकर यादव के पक्ष में फैसला देते हुए उसे भृत्य के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया उसके बावजूद भी इस भ्रष्ट अजय दुबे द्वारा न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए उमाशंकर यादव से 30000 की रिश्वत ली उमाशंकर यादव के अनुसार अजय दुबे ने उससे कहा कि यदि भृत्य के पद पर नौकरी करना है तो 70000 लगेंगे और बागवान कम चौकीदार के पद पर कार्य करना है तो 30000 लगेंगे उमाशंकर यादव के पास 70000 नहीं थे, तो उसने 30000 देखकर ही बागवान कम चौकीदार का पद प्राप्त किया ।

यहां सवाल ये उठता है कि सहायक ग्रेड 3 स्थापना प्रभारी अजय दुबे अपनी मनमानी करते हुए रिश्वतखोरी कर रहा है लेकिन उसके बावजूद भी कोई वरिष्ठ अधिकारी इसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है यह संदेहास्पद है और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है क्योंकि जब उमाशंकर को न्यायालय से आदेश प्राप्त है तो फिर इस भ्रष्ट अजय दुबे ने उससे 30000 किस नियम के तहत लिए ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी जनपद में अन्य और अधिकारियों को नहीं है इसके बाद भी इस भ्रष्ट अजय दुबे पर कार्यवाही नहीं होना कहीं ना कहीं इस रिश्वतखोरी में वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी दर्शाता है अब देखना यह होगा कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस भ्रष्ट सहायक ग्रेड 3 के विरुद्ध क्या कार्यवाही करते हैं कार्यवाही करते भी हैं या फिर लीपापोती कर दी जाएगी।

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