कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दुःखहरणी द्वार से प्रतिमा का विसर्जन शुरू

सुरक्षा के किए गए हैं पुख्ता बंदोबस्त

दुःखहरणी मंदिर- जामा मस्जिद से गुजरेगी प्रतिमा

जय दुर्गे…जय दुर्गे….जय दुर्गे….. के जयघोष से गूंज उठा दुःखहरनी द्वार

गया। विजयदशमी पर सदियों से चली आ रही पौराणिक परंपरा के तहत शहर के पांच स्थानों पर स्थापित मां दुर्गा की लाइसेंसी प्रतिमाओं को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दुःखहरणी द्वार से पास कराया जा रहा है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन में सीमित संख्या में लोगों को विसर्जन यात्रा में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। दुख हरनी चौराहे पर बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है।

मूर्ति विसर्जन यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए एसडीओ इंद्रवीर कुमार, सिटी एसपी आदित्य कुमार,
सिटी डीएसपी पी एन साहू एवं कोतवाली थाना अध्यक्ष मितेश कुमार अपने दल बल के साथ रूट लाइन पर तैनात हैं। इस बीच उन्होंने पूजा समिति के आयोजकों से मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिमा को पास कराने का अनुरोध किया। सदर एसडीओ ने बताया कि पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी दुःखहरणी मोड़ से सराय मोड़ तक सड़क के दोनों ओर सुरक्षा के दृष्टिकोण से बांस बल्ली से बैरिकेडिंग किया गया है। पर्याप्त संख्या में हैलोजन लाइट से प्रकाश की व्यवस्था है।

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इस वर्ष विसर्जन यात्रा में कोविड नियमों का विशेष ध्यान रखा गया है। मूर्ति को पास करने के लिए 10 से 15 लोगों को अनुमति दी गई है। किसी प्रकार का कोई ध्वनि विस्तारक यंत्र की मनाही रहेगी।विसर्जन जुलूस में हथियार का करतब दिखाना पूर्ण रूप से वर्जित रहेगा। शहर के कई संवेदनशील स्थानों को बैरिकेडिंग कर पुलिस बलों की तैनाती भी की गई है। वहीं सिटी डीएसपी पीएन साहू ने बताया कि दुःख हरनी मंदिर के पास से होकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुजरेगी। सुरक्षा को लेकर पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है।

संवेदनशील इलाके होने के कारण सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। प्रतिमा विसर्जन वाले रूट लाइन पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाएगी। साथ ही विसर्जन जुलूस का वीडियो ग्राफी भी किया जाएगा। विसर्जन यात्रा वाले मार्ग पर दंडाधिकारी के साथ भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण तरीके से पांच प्रतिमाओं को विसर्जन हेतु पास कराया जाएगा।किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए बज्र वाहन के साथ पर्याप्त संख्या में फोर्स भी तैनात रहेंगे। बताते चलें कि ब्रिटिश काल से ही दुखरनी मंदिर से पांच प्रतिमाओं का विसर्जन प्रत्येक वर्ष विजयदशमी के दिन होता आ रहा है। इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए आज भी सदियों से यह परंपरा चलती आ रही है।

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