कानून होने के बाजवूद अज्ञानता के अभाव में मजदूरों का शोषण हो रहा है- न्यायाधीश

– कार्यक्रम को संबोधित करते न्यायाधीश।

– कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीण।

शाजापुर। मजदूरों के अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने हेतु ग्राम लाहोरी में विधिक साक्षरता-जन जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के माध्यम से आमजन को बताया गया कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए कानून तो बहुत बने हैं, लेकिन इन कानूनों की जानकारी के अभाव में मजदूर बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एवं अपर जिला जज राजेन्द्र देवड़ा ने कहा कि देश में आज भी 40 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। ऐसे लोगों को उनके लिए जो कानून बने हैं उसकी जानकारी तक नही है, इसके लिए देशभर में बड़ा अभियान चलाने की जरूरत है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए भी कई कानून हैं, लेकिन ये कानून केवल दस्तावेजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। असंठित क्षेत्र के मजदूरों के कल्याण के लिए करोड़ों रुपए की राशि संग्रहित की जा रही है, परंतु इस राशि का उपयोग नहीं हो रहा है।

इस क्षेत्र के मजदूरों के लिए सरकार की कई योजनाओं का हाल भी लगभग ऐसा ही है। आज देशभर में असंगठित क्षेत्र के 46 करोड़ मजदूर हैं, इसमें 14 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। कानून होने के बावजूद इस क्षेत्र में मजदूरों का शोषण हा रहा है। उन्होने कहा कि धन के अभाव में कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, इसलिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निरंतर प्रयासरत है और प्राधिकरण का यही उद्देश्य है कि न्याय हर एक उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे उसकी जरूरत है।

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इसके साथ ही न्यायाधीश देवड़ा द्वारा बताया गया कि मध्यस्थता विवादों को निपटाने की सरल और निष्पक्ष प्रक्रिया है। मध्यस्थता में मध्यस्थ अधिकारी मध्यस्थता की प्रक्रिया से सभी पक्षों को अवगत कराता है। उन्हे प्रक्रिया के नियमों और गोपनीयता के बारे में बताता है। उन्होने कहा कि मध्यस्थता से विवादों का शीघ्र और अविलंब समाधान होता है। समय और खर्च की बचत होती है। मध्यस्थता में विवाद निटाने पर वादी कोर्ट फीस वापस लेने का का हकदार हो जाता है, जबकि विवाद की वजह से समय की बर्बादी, धन की हानि, आपसी घृणा और वैमनस्य को बढ़ावा मिलता है।

देवड़ा ने विधिक सहायता एवं सलाह कामगार मुआवजा अधिनियम, मानवाधिकार क्या होते हैं बताते हुए कहा कि मानवाधिकार वे मूलभूत अधिकार और स्वतंत्रताएं होती हैं जिनके लिए सभी स्त्री-पुरूष पात्र होते हैं। मानवाधिकारों के उदाहरणों में नागरिक और राजनैतिक अधिकार शामिल हैं, जैसे कि जीवन जीने का और स्वतंत्रता का अधिकार, विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता, कानून के समझ समानता और भेदभाव से मुक्ति का अधिकार, यदि किसी कर्मचारी को उसके रोजगार के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना से व्यक्तिगत चोंट लगती है तो उसका नियोक्ता इस अध्याय के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, आदि की जानकारी को सरल शब्दों में विस्तार पूर्वक समझाया गया।

वहीं न्यायाधीश श्रीमती प्रिंसी अग्रवाल ने कहा कि फैक्ट्रियों में सैकड़ों मजदूरों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। इस क्षेत्र के मजदूरों को आज भी न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा। उन्होने कहा कि वर्ष 2012 में अंसगठित क्षेत्र के पंजीकृत मजदूरों की संख्या 03 लाख थी जो आज यह संख्या 08 लाख तक पहुंच गई है। ऐसे मजदूर जहां काम करते हैं, वहीं जाकर उनका पंजीकरण करने की सूचना श्रम विभाग को दी जाए। इस दौरान चाईल्ड लाईन सदस्य धर्मेन्द्र मालवीय ने बच्चों के लिए हेल्प लाईन नंबर 1098 के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच, आगंनवाड़ी कार्यकर्ता, हाई स्कूल के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और 300 से अधिक ग्रामीण मौजूद थे।

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