ग्राम चिकली मे नहीं होता रावण दहन

दशहरे पर होती है दशानन की आराधना

उज्जैन। दशहरा पर शुक्रवार को देशभर में रावण का दहन कर पर्व को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन के एक गांव में भगवान महाकाल के भक्त रावण का दहन नहीं किया जाता है, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। यहां रावण को देवताओं की तरह पूजा जाता है। लोगों को कहना है कि रावण हमारी सभी मनोकामनाओं को दूर करते हैं।

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रावण को पूजे जाने का यह स्थान उज्जैन से 20 किलोमीटर दूर बड़नगर तहसील के गांव चिकली में है। यहां कई साल पुरानी रावण की प्रतिमा स्थापित है। दशहरे पर देशभर में जहां लंका नरेश के पुतले का दहन किया जाएगा। वहीं यहां सुबह से शाम तक रावण की आराधना का दौर चलेगा। पूजन के दौरान ढोल नगाड़े के साथ ग्रामीण पूजन-पाठ करेंगे।

इस गांव में रोजाना सुबह-शाम रावण की आरती की जाती है, लेकिन रावण के पूजन की यह परम्परा वर्षों पुरानी बताई जा रही है। जब भी गांव में कोई संकट आता है या किसी को कोई काम शुरू करना होता है तो वह रावण को नहीं भूलता। रावण भक्त भेरूलाल मालवीय का कहना है कि यहां पर आकर प्रार्थना करने से रावण अपने भक्त के संकट हरते हैं और उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

इसी के साथ पुराणों में यह भी उल्लेख है कि रावण का ससुराल मंदसौर में था और यहां पर भी रावण मंदसौर के दामाद होने के कारण दशहरा पर रावण दहन नहीं किया जाता है।

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