सहकारिता से स्वावलंबन स्किल से स्टार्टप

उज्जैन। सहकारिता मंत्रालय भारत शासन के अधीन भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ एवं सहकारी शिक्षा क्षेत्रीय परियोजना उज्जैन द्वारा ग्रामीण एवं कमजोर वर्ग की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह के लिए सहकारिता से स्वावलंबन विषय पर नेतृत्व विकास कार्यशाला का आयोजन किया। मुख्य अतिथि श्रीमती रेखा तिवारी वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र उज्जैन, वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ श्रीमती माधुरी सोलंकी पूर्व प्रोफेसर मुंबई विश्वविद्यालय एवं अध्यक्षता फादर सुनील निदेशक कृपा वेलफेयर सोसाइटी उज्जैन रहे। कार्यशाला के अतिथियों का प्रतिभागी द्वारा स्वागत किया गया।

स्वागत एवं प्रतिभागी, अतिथि परिचय देते हुए चन्द्रशेखर बैरागी परियोजना अधिकारी ने कहा कि कोरोना काल मे आजीविका पर संकट आया, जिसके कारण हर परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। इन परिस्थितियों में हमें मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। हम यहां एकत्रित हुए ताकि मिलकर कुछ नया कर सकें। इसी तारतम में आज हमारे बीच कृषि विज्ञान केंद्र से वरिष्ठ वैज्ञानिक श्रीमती रेखा तिवारी एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर श्रीमती माधुरी सोलंकी हैं, जो आप लोगों को इस संबंध में मार्गदर्शन देगें और परियोजना आजीविका संबंधित नवीन कार्य के लिए आवश्यक शिक्षण प्रशिक्षण के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।

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वरिष्ठ वैज्ञानिक श्रीमती रेखा तिवारी ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अपने आसपास उपलब्ध वस्तुओं से बहु उपयोगी सामग्री का निर्माण कर उसे अच्छे दामों पर विक्रय कर सकती है। इसके लिए प्रशिक्षण परियोजना के साथ कृषि विज्ञान केंद्र भी आपको दे सकता है एवं निर्मित सामग्री परियोजना के मुख्यालय के माध्यम से विक्रय की जा सकेगी। ग्रामीण क्षेत्र में सभी के आसपास थोड़ी बहुत खुली भूमि होती है। उस पर एक छोटा किचन गार्डन निर्मित करें एवं उससे घर के लिए सब्जी एवं छोटा सा बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

जैसे यदि हम पपीता लगाते हैं तो उससे गुलाब कत्री बनाई सकते हैं, जो कि शहर में लोग पान के साहब बड़े चाव से खाते हैं। उसी प्रकार हमारे यहाँ सोयाबीन बहुतायत में होती है, जिसमें प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है, उसका दूध भी बनाकर शेष बची सामग्री से जैसे बड़ी या अन्य खाद्य सामग्री जिसमें कि प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है बनाई जा सकती है। हम ग्रामीण क्षेत्र में ही अपना एक छोटा व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं और अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर माधुरी सोलंकी ने कहा कि नेतृत्व विकास के लिए आवश्यक है। व्यक्तित्व विकास हमें अपने अंदर छुपे हुए व्यक्तित्व को पहचानना है और उसे विकसित करना है। उसी के माध्यम से हम समाज की उन्नति एवं अपनी आर्थिक उन्नति कर सकते हैं। व्यक्तित्व विकास करने के लिए हमें किसी से कुछ सीखने की आवश्यकता नहीं है। बस हमें इतनी समझ होना चाहिए कि आज हमने दिन भर में कितने अच्छे काम किए हैं।

उन्हीं कार्य को याद कर उन्हें और अच्छा किस प्रकार कर सकें वह सोचना चाहिए इसी प्रकार व्यक्तिव विकास हो जाता है और हम सभी के साथ मिलकर काम करने योग्य होते हैं। उसी से समाज एवं अपनी उन्नति कर पाएंगे। इसी तरह हमारा सहकारी नेतृत्व भी विकसित होगा और हम सभी मिलकर एक साथ रह कर कुछ नवीन कर पाएंगे। हमें प्राचीन भारत के समय प्रचलित परंपराओं को नवीन अवधारणाओं के साथ ग्रहण कर आगे बढ़ना होगा एवं समाज एवं राष्ट्र का विकास करना होगा यही नेतृत्व विकास है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे फादर सुनील ने कहा कि वर्तमान समय में यदि व्यक्ति स्वयं का अपना कार्य करता है तो अधिक परेशानी आएगी लेकिन यदि हम सब मिलकर कोई नया कार्य करें तो उसमें हमें सफलता अवश्य मिलेगी। हमें स्किल करने के लिए बहुत सारी संस्था एवं शासन तैयार है लेकिन स्वयं को यह निर्णय लेना होगा कि हम साथ मिलकर क्या काम एक साथ कर सकते हैं, जिससे हमारी आर्थिक उन्नति हो और हमारा क्षेत्र भी प्रसिद्ध हो, जिससे हमें अधिक से अधिक हमारे उत्पाद का आर्डर मिल सके यही स्किल से स्टार्टप होगा। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन वरिष्ठ शिक्षा प्रेरक प्रेम सिंह झाला ने किया एवं परियोजना द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्य का विवरण प्रस्तुत किया। जगदीश नारायण सिंह सहकारी शिक्षा प्रेरक ने सभी अतिथि एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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