मानसिक अवसाद बन रहा है आत्महत्या का कारण

2 दिन पूर्व एक प्रिंसिपल के बेटे ने आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में अपने पिता से माफी मांगी।

इस विषय में मंथन करना होगा कि आखिर युवा क्यों आत्महत्या कर रहे हैं

उज्जैन शहर में इन दिनों आत्महत्या फांसी लगाकर अपनी जान दे देना एक आम बात हो गई है प्रतिदिन कोई भी युवा एवं युवती आत्महत्या कर रहे हैं इसका कारण यह भी हो सकता है कि मानसिक अवसाद से यह लोग घिरे रहते हैं और जब सहनशक्ति कम हो जाती है तो आत्मघाती कदम उठा लेते हैं वही मानसिक तनाव के कारण युवा खुदकुशी कर रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में धैर्य कम होता जा रहा है।

दिनचर्या में बदलाव व काम में रुचि ना लेने, नकारात्मक बातें करने वाले लोगों की बातों को उनके परिवार के लोग ध्यान से सुनें तो आत्महत्या के आंकड़ों में कमी आ सकती है। कोई भी व्यक्ति एकदम से आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाता है। लंबे समय तक उसके मन में उधेड़बुन चलती रहती है। लगातार मानसिक तनाव से वह आशाहीन हो जाता है। खासतौर पर जब काई उसकी बात नहीं सुनता है तो उसे लगता है कि अब उसका इस दुनिया में कुछ नहीं हो सकता है।

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मानसिक बीमारी को लोग गंभीरता से नहीं लेते है। इस कारण मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की बात को अगर उनके परिवार के लोग गंभीरता से सुनते है तथा समय पर उपचार शुरू कर देते है तो कुछ समय बाद ही बीमारी दूर हो सकती है। यदि परिवार के बच्चे इस प्रकार का घातक कदम उठा रहे हैं तो परिवार वालों को भी इस विषय में मंथन करना होगा कि आखिर युवा क्यों आत्महत्या कर रहे हैं 2 दिन पूर्व एक प्रिंसिपल के बेटे ने आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में अपने पिता से माफी मांगी।

मरीज का व्यवहार बदलना, काम में रुचि नहीं लेना, जीवन शैेली में बदलाव आना, लोगों से मिलना-जुलना कम कर देना, नकारात्मक बातें अधिक करना, आशाहीन हो जाना, बात करते-करते रो देना। ऐसे लक्षणों को पहचान कर मरीज का सही समय पर उपचार शुरू कर दिया जाना चाहिए।

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