घर चलाने के लिए रिक्शाचालक बन गई हरदोई की बुजुर्ग सावित्री

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घर चलाने के लिए रिक्शाचालक बन गई हरदोई की बुजुर्ग सावित्री

Hardoi News: सावित्री ने बताया कि रिक्शा चलाना उसकी मजबूरी है. उसके दो बेटियां है, दोनों की शादी हो गई. उनके पति की हालत ठीक नहीं है तो गरीबी के कारण जब परिवार चलाने में दिक्कतें आने लगी तो हमें यह कदम उठाना पड़ा.

हरदोई. जब मुश्किलें सामने आती हैं तो आदमी अपना रास्ता खुद बना लेता है. कुछ ऐसा ही किया है हरदोई (Hardoi) के आशानगर की सावित्री देवी ने. 60 साल के ज्यादा की उम्र और कबाड़ बीनकर, रिक्शा चलाकर सावित्री अपने अपने पति और परिवार का भरण पोषण कर रही हैं. सावित्री का कहना है कि पेट पालने के लिए कुछ तो काम करना था, तो उसने यही काम शुरू कर दिया. अब कम से कम वह और उसके पति पेट तो भर सकते हैं. रात में अक्सर बुजुर्ग महिला द्वारा खुद ही रिक्शा चलाकर अपने ही रिक्शे से कुछ सामान ले जाते देखकर लोग हैरान हो जाते हैं. आप भी सुनकर थोड़ा हैरान जरूर हो जाएंगे क्योंकि हौसला बुलंद महिला रिक्शा चलाकर कबाड़ बीनकर अपने और अपने पति का पेट पालती है. गरीबी से परेशान सावित्री ने कुछ करने का फैसला किया और कबाड़ बीनकर रिक्शा खरीद लिया और अब वह इससे कमाकर अपना खर्च चलाती है. रात में रिक्शा चलाकर कबाड़ ढोती सावित्री

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घर चलाने के लिए रिक्शाचालक बन गई हरदोई की बुजुर्ग सावित्री

सावित्री ने बताया कि रिक्शा चलाना उसकी मजबूरी है. उसके दो बेटियां है, दोनों की शादी हो गई. उनके पति की हालत ठीक नहीं है तो गरीबी के कारण जब परिवार चलाने में दिक्कतें आने लगी तो हमें यह कदम उठाना पड़ा. सावित्री का कहना है कि वह दिन-भर में करीब 300 से 400 रूपये कमा लेती है. लोगों का कहना है कि यह देख कर अच्छा लगता है कि एक महिला अपने हौसले के दम पर अपना रास्ता चुनकर आज अपने परिवार के लिए सहारा बनी हुई है.







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