असम और पुड्डुचेरी में बीजेपी के लिए खुशखबरी है.

Live Radio


संदीप बर्धन नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनाव के बाद रविवार को मतगणना हुई. इसके परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में जोरदार जीत दर्ज की. वहीं एमके स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) एक दशक के बाद तमिलनाडु में सत्ता में लौटी और केरल की वामपंथी सरकार ने लगातार दो बार जीतकर इतिहास रच दिया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम में दूसरे कार्यकाल के लिए सत्ता में लौटने के लिए तैयार है जबकि उसका गठबंधन पुडुचेरी  में आगे है. वहीं कांग्रेस के पास तमिलनाडु में  DMK की जीत के अलावा कुछ खास नहीं है. बंगाल में भाजपा दहाई तक ही सीमित रह गई जबकि टीएमसी को स्पष्ट बहुमत मिला. मुख्यमंत्री खुद नंदीग्राम में पूर्व साथी शुवेंदु अधिकारी से चुनावी लड़ाई में हार गईं. लेकिन टीएमसी को मिली जीत से ममता की आवाज अब भी केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ बुलंद है. राजनीतिक टिप्पणीकार और किताब-  ‘दीदी: द अनटोल्ड ममता बनर्जी’ की लेखक सुतापा पॉल ने कहा- ‘मुझे लगता है कि भाजपा के खिलाफ वोटिंग हुई है. हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि लोकप्रिय राष्ट्रीय नेताओं की क्षेत्रीय राजनीति में समान स्वीकार्यता नहीं हो सकती है.’ टीएमसी के रणनीतिकार, प्रशांत किशोर ने भी कुछ ऐसा ही कहा. CNN-News18 को दिए एक इंटरव्यू में किशोर ने कहा ‘लोगों ने  बनर्जी में विश्वास दोहराया है. केंद्रीय मंत्री होने के नाते और चुनाव प्रचार में बड़े नेताओं  का आना जीत की गारंटी नहीं है.’ क्या रहा वोट पर्सेंटेज?साल 2016 के प्रदर्शन (10%  वोट शेयर और तीन सीट)  की तुलना में, भाजपा ने बंगाल में अहम सीटें हासिल की है. यह 70-80 सीटों के साथ और 38%  वोट शेयर हो सकता है. लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की उम्मीदें बढ़ गई थीं. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर 40% से कम वोट शेयर हासिल किया. राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार  विधानसभा परिणाम भाजपा के लिए एक झटका माना जा रहा है. बीजेपी ने  बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 200 जीतने का लक्ष्य रखा था. मिशन बंगाल के लेखक स्निग्धेंदु भट्टाचार्य  ने कहा कि भाजपा के लिए आत्ममंथन करने का समय आ गया है. ऐसा लग रहा है कि टीएमसी को न केवल उन लोगों के वोट मिले जो सरकार से खुश थे, बल्कि उन लोगों के भी थे जो भाजपा हारता हुआ देखना चाहते थे. बंगाल में बहुत ‘ऊंचे लक्ष्य’ तय कर लिए!
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जय पांडा ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी ने बंगाल में बहुत ‘ऊंचे लक्ष्य’ तय कर लिए थे. सीएनएन-न्यूज 18  को उन्होंने बताया, ‘बंगाल में हमने तीन सीट से तिहाई में आने का लक्ष्य तय किया था. ऐसे में तिहाई के करीब जाना भी अहम है. अब बंगाल में दुध्रुवीय स्थिति है. दक्षिणी मोर्चे की बात करें डीएमके गठबंधन 10 साल बाद सत्ता में लौट रहा है. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि DMK जिस ‘सुनामी’ की उम्मीद कर रही थी, वैसा नहीं हुआ. राज्य में स्टालिन और निवर्तमान मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के बीच करुणानिधि और जयललिता की गैरमौजूदगी में यह चुनावी लड़ाई हुई. वरिष्ठ पत्रकार आर भगवान सिंह ने कहा कि पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एनडीए की जीत तमिलनाडु में भाजपा की मदद करेगा. रविवार शाम तक भाजपा और एनआर कांग्रेस का गठबंधन बहुमत के करीब था. बीजेपी खेमे को असम चुनाव के नतीजों से भी खुश होने की एक वजह मिल गई है. CAA-NRC के विवादों के बीच बीजेपी ने अपनी जीत का रास्ता अख्तियार किया. उत्तर-पूर्वी राज्य ने पहली बार लगातार दो बार गैर-कांग्रेसी सरकार चुनी.

केरल में भी मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी इतिहास रचा. साल 2018 में बाढ़ आने के बाद तुरंत कार्रवाई करना और कोरोना महामारी के दौरान केरल सरकार की रणनीति ने लोगों के बीच विजयन का चार्म बरकरार रखा. हर पांच साल पर राज्य में सरकार बदल जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. इतना ही नहीं एनडीए यानी भाजपा के अगुवाई वाले दल को इस राज्य में एक भी सीट नहीं मिली. केरल इकलौता राज्य है जहां वामपंथी दल शासन में है.





Source link

Live Sachcha Dost TV

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

COVID-19 Tracker