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बरेली की आइटीआर फैक्ट्री मामले में कमिश्ननर को बचाने के लिए दबा दी गई थी जांच—

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दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में बॉयलर खुर्दबुर्द होने की पुष्टि के बाद शासन से आए एफआइआर के फरमान को भी अधूरा तामील किया गया

बरेली, इंडियन टरर्पेटाइन एंड रेजिन कंपनी लिमिटेड (आइटीआर) के लंकाशायर बॉयलरों के सुपीरियर इंडस्ट्री पहुंचने की जांच ‘बड़ों’ तक पहुंचने लगी है। आइटीआर फैैक्ट्री की साइनिग अथॉरिटी और एमडी खुद कमिश्नर होते हैं। 16 साल तक दबी जांच पर उठे सवालों में अब तत्कालीन कमिश्नर भी घिरने लगे हैं।

के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में बॉयलर खुर्दबुर्द होने की पुष्टि के बाद शासन से आए एफआइआर के फरमान को भी अधूरा तामील किया गया।

विजिलेंस की जांच में आइटीआर के तत्कालीन कारखाना प्रबंधक केबी अग्रवाल के साथ कई ऐसे नाम हैं, जिनकी संलिप्तता बॉयलर के खुर्द-बुर्द करने में पाई गई थी। बावजूद मुकदमा सिर्फ एक पर कराया गया।

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आइटीआर कंपनी के तत्कालीन यूनियन लीडर राम गोपाल पांडे ने 2004 में बॉयलर खुर्द-बुर्द की शिकायत की। विजिलेंस ने जांच शुरू की तो बॉयलर आइटीआर से गायब मिले।

चूंकि, औद्योगिक इकाई का अध्यक्ष कमिश्नर होता है, लिहाजा विजिलेंस ने तत्कालीन कमिश्नर के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी लेकिन, फाइल दबाकर पूरी जांच ही ठंड बस्ते में डाल दी गई। इसी दौरान यूनियर लीडर राम गोपाल पांडे की मौत भी हो गई। एक बार फिर जब कर्मचारियों ने आवाज उठाई, जब जाकर जांच हुई।

कर्मचारियों को नहीं पता था कि सुपीरियर इंडस्ट्रीज में हैं बॉयलर

फैक्ट्री से जुड़े एक व्यक्ति की माने तो आइटीआर से बॉयलर गायब होने की जानकारी मिली थी। यह भी पता चला कि बॉयलर दिल्ली ले जाए गए। इसके बाद यह बॉयलर सुपीरियर इंडस्ट्रीज में कब लग गए, किसी को भनक नहीं लगी। साफ है कि बॉयलर की मूल पहचान छिपाने के लिए ही उसे दिल्ली में अपग्रेड कराया गया लेकिन, यह चालाकी काम नहीं आई।

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इंस्पेक्टर सीबीगंज करेंगे विवेचना

प्रकरण की विवेचना अब खुद इंस्पेक्टर सीबीगंज धर्मेंद्र सिंह करेंगे। इस बावत एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने उनको निर्देश दिए हैं। विवेचक प्रदीप बिश्नोई का बदायूं ट्रांसफर हो गया है।

पब्लिश दिनांक- 15/02/2021

एलबी कुर्मी
ब्यूरो हेड बरेली

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