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दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर बोले PM मोदी- विरोधियों का सम्मान करना हमारे संस्कार, राजनीति में भी राष्ट्रनीति

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दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

भारतीय जनता पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में आज समर्पण दिवस मना रही है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. पीएम ने कहा कि आज हम सभी दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर अनेक चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्र हुए हैं. पहले भी अनेकों अवसर पर हमें दीनदयाल से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का, विचार रखने का और अपने वरिष्ठजनों के विचार सुनने का अवसर मिलता रहा है.

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पीएम ने कहा कि आप सबने दीनदयाल को पढ़ा भी है और उन्हीं के आदर्शों से अपने जीवन को गढ़ा भी है. इसलिए आप सब उनके विचारों से और उनके समर्पण से भलीभांति परिचित हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा अनुभव है और आपने भी महसूस किया होगा कि हम जैसे जैसे दीनदयाल के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है.

उन्होंने कहा, एकात्म मानव दर्शन का उनका विचार मानव मात्र के लिए था. इसलिए, जहां भी मानवता की सेवा का प्रश्न होगा, मानवता के कल्याण की बात होगी, दीनदयाल का एकात्म मानव दर्शन प्रासंगिक रहेगा. सामाजिक जीवन में एक नेता को कैसा होना चाहिए, भारत के लोकतंत्र और मूल्यों को कैसे जीना चाहिए, दीनदयाल इसका भी बहुत बड़ा उदाहरण हैं.

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पीएम ने कहा, एक ओर वो भारतीय राजनीति में एक नए विचार को लेकर आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर, वो हर एक पार्टी, हर एक विचारधारा के नेताओं के साथ भी उतने ही सहज रहते थे. हर किसी से उनके आत्मीय संबंध थे. हमारे शास्त्रों में कहा गया है- ‘स्वदेशो भुवनम् त्रयम्’ अर्थात, अपना देश ही हमारे लिए सब कुछ है, तीनों लोकों के बराबर है. जब हमारा देश समर्थ होगा, तभी तो हम दुनिया की सेवा कर पाएंगे.

एकात्म मानव दर्शन को सार्थक कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भी यही कहते थे. उन्होंने लिखा था, एक सबल राष्ट्र ही विश्व को योगदान दे सकता है. यही संकल्प आज आत्मनिर्भर भारत की मूल अवधारणा है. इसी आदर्श को लेकर ही देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.

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पीएम ने कहा, एकात्म मानव दर्शन के विशेषरूप -व्यष्टि से समष्टी की यात्रा व्यक्त होती है. स्वार्थ से परमार्थ की यात्रा स्पष्ट होता है. मैं नहीं, तू ही का संकल्प भी सिद्ध होता है. कोरोनाकाल में देश ने अंत्योदय की भावना को सामने रखा और अंतिम पायदान पर खड़े हर गरीब की चिंता की.

आत्मनिर्भरता की शक्ति से देश ने एकात्म मानव दर्शन को भी सिद्ध किया, पूरी दुनिया को दवाएं पहुंचाईं, और आज वैक्सीन पहुंचा रहा है. लोकल इकॉनमी पर विजन इस बात का प्रमाण है कि उस दौर में भी उनकी सोच कितनी व्यावहारिक और व्यापक थी. आज वोकल फॉर लोकल के मंत्र से देश इसी विजन को साकार कर रहा है.’

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