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उत्तराखंड बाढ़ आपदा पर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा का खुलासा- मैंने SC को किया था आगाह

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दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

उत्‍तराखंड के चमोली जिले में आई बाढ़ ने 100 से ज्‍यादा जिंदगियां लील ली हैं. हालांकि इस हादसे के बाद अब उत्‍तराखंड स्थित पर्यावरणविद और 2013 में विनाशकारी केदारनाथ आपदा के बाद सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के अध्‍यक्ष डॉ. रवि चोपड़ा ने बड़ा खुलासा किया है.

उनका कहना है कि 2013 की महाप्रलय के बाद सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में उन्‍होंने आपदाओं को लेकर आगाह किया था. उन्‍होंने उत्‍तराखंड की नदियों पर बनाए जा रहे बांधों को तत्‍काल रद्द करने की संस्‍तुति की थी. साथ ही आगाह किया था कि अगर बांध बनते रहे तो आपदाएं आती रहेंगी.

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इतना ही नहीं डॉ. रवि चोपड़ा ने चमोली हादसे को लेकर भी अहम जानकारियां दी हैं. साथ ही कहा है कि 2013 की घटना के बाद अगर सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट पर काम हुआ होता और उत्‍तराखंड सरकार ने कदम उठाए होते तो चमोली, जोशीमठ, तपोवन में हुए इस हादसे से बचा जा सकता था.

रवि चोपड़ा बताते हैं कि केदारनाथ आपदा के बाद कमेटी गठित करके सुप्रीम कोर्ट ने 3 सवालों के जवाब मांगे थे. पहला सवाल था क्‍या बांधों के निर्माण के कारण उत्‍तराखंड राज्‍य में नुकसान हुआ है? तब शोध के बाद कमेटी की ये राय थी कि हां, बांधों से कई पर्यावरणीय नुकसान हुए हैं.

इस दौरान कमेटी ने सबूतों के साथ ब्‍यौरा दिया. दूसरा सवाल था कि क्‍या उत्‍तराखंड के बांधों की वजह से बाढ़ आई है, उसका नुकसान बड़ा है या नहीं? हमने 4 बांधों का अध्‍यययन करके यह सिद्ध किया कि बांधों की वजह से नुकसान बढ़ा है. बांध न होते तो इतनी क्षति न होती.

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ये 4 बांध थे मंदाकिनी नदी पर बना फाटा ब्‍यूंग, मंदाकिनी नदी पर ही बना सिंघोली भटवारी, अलकनंदा पर विष्‍णुप्रयाग प्रोजेक्‍ट और अलकनंदा पर ही हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट. तीसरा सवाल यह था कि वाइल्‍ड लाइफ इंस्‍टीट्यूट ने 2012 में संस्‍तुति की थी कि 24 बांध को अलकनंदा और भागीरथी बेसिन में रद्द कर दिया जाए. कोर्ट ने हमसे कहा कि आप इसका अध्‍ययन करके बताएं कि क्‍या करना चाहिए. तब हमने अध्‍ययन किया जो हमारी संस्‍तुति थी कि 23 बांध तो पूरी तरह रद्द कर देने चाहिए जबकि एक बांध के डिजाइन में भारी संशोधन की जरूरत है.

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