RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

जंगल का अहसास कराती नवग्रह वाटिका

सच्चा दोस्त न्यूज़ को आप हिंदी के अतिरिक्त अब इंग्लिश, तेलुगु, मराठी, बांग्ला, गुजरती एवं पंजाबी भाषाओँ में भी खबर पढ़ सकते है अन्य भाषाओँ में खबर पढ़ने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें Sachcha Dost News https://sachchadost.in/english सच्चा दोस्त बातम्या https://sachchadost.in/marathi/ సచ్చా దోస్త్ వార్తలు https://sachchadost.in/telugu/ સચ્ચા દોસ્ત સમાચાર https://sachchadost.in/gujarati/ সাচ্চা দোস্ত নিউজ https://sachchadost.in/bangla/ ਸੱਚਾ ਦੋਸਤ ਨ੍ਯੂਸ https://sachchadost.in/punjabi/

दैनिक राशिफल दिनांक 13 जुलाई (बुधवार) 2022 https://sachchadost.in/archives/93913

जंगल बनाने का उद्देश्य हुआ सफल।

खरगोन, वनों को धरती का श्रृंगार माना जाता है और ये वन ही हर किसी शख्स को अपनी ओर आकर्षित करते है। वनों की हरियाली और यहां की आबो हवा न सिर्फ पशुओं के लिए चारा व पक्षियों के लिए आबुदाने का प्रबंध करते है, बल्कि इंसान के लिए भी ताजा और शुद्ध हवा का पर्याप्त मात्रा में निर्माण करते है।

खरगोन के नवगृह मेला मैदान स्थित नवग्रह वाटिका में आज से 569 दिनों पूर्व 22 जुलाई 2019 को मियामाकी पद्धति से पौधा रोपण किया गया था। तत्कालीन कलेक्टर श्री गोपालचंद्र डाड ने इस पौधारोपण को एक नई पद्धति के तौर पर नगर पालिका से भूमि तैयार कराई।

इसे भी पढ़े : 16 किलो गांजे की तस्करी करते हुए 3 तस्करों को किया गिरफ्तार

इस नवीन तकनीक को जिला प्रशासन ने एक आदर्शशील पौधारोपण के तौर पर देखा। इसके सफल होने के बाद जिले के अन्य स्थानों पर भी इसी तकनीक के साथ पौधारोपण करने की योजना बनाई। इसके बाद प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पितृ पर्वत पर पौधारोपण की एक नवीन संकल्पना प्रारंभ हुई।

सघन पौधारोपण के दौरान कलेक्टर श्री डाड ने कहा था कि सामान्य तौर पर 5 वर्षों में वन का स्वरूप लेने लगता है, लेकिन मियावाकी पद्धति ऐसी है, जिसमें 2 वर्ष में जंगल बनाएं जा सकते है। आखिरकार आज 2 वर्षों से पूर्व ही नवग्रह वाटिका के पौधे जंगल का रूप ले चुका है।

5 से 15 फीट वाले पौधे अब 50 फीट तक हो गए

जिले का संभवतः यह पहला पौधारोपण होगा, जहां 5 से 15 फीट के पौधे आज 569 दिनों में ही 30 से 50 फीट तक बड़े होकर फैलने लगे है। यहां आज एक सघन वन का एहसास होता है। यहां फल, फुल और झाड़ी वाले पौधे पद्धतिनुसार पौधे लगाए गए थे। मियावाकी पद्धति में झाड़ीदार, छोटे पेड़, पेड़ और कैनोपी पौधों का चुनाव किया जाता है।

इसे भी पढ़े : Whatsapp प्राइवेसी पॉलिसी पर SC ने सुनवाई से किया इनकार

नवग्रह वाटिका के 4439 वर्ग फीट क्षेत्र में 15 हजार पौधे रोपे गए थे। इसमें खमेर, बरगद, पीपल, गुलमोहर, बोगन वेल्लिया, शीशम, अनार, जामुन, आम, नींबू, अर्जून, वॉटर पॉम, आंवला, अमलतास सरीके 30 तरह के पौधे लगाए गए थे।

क्या है मियावाकी पद्धति

मियावाकी वनरोपण की एक नवीन पद्धति है, जिसका आविष्कार जापान के अकीरा मियावाकी वानस्पतिक शास्त्री ने की थी। इसमें पौधारोपण के लिए उपयुक्त मिट्टी के बेड तैयार कर निश्चित आकार में गड्ढे कर पौधे के पनपने की ऊंचाई के अनुसार पौधारोपण किया जाता है। इस पद्धति में दस गुना तेजी से पौधे बढ़ते है।

इस पद्धति से पौधारोपण करने का फायदा यह है कि बहुत कम समय में पौधों को जंगल और जंगलों को घने जंगलों में परिवर्तित किया जा सकता है। इस पद्धति से घरों से आगे अथवा खाली पड़े स्थान को छोटे बागानों में बदलकर वनीकरण किया जा सकता है।

इसे भी पढ़े : जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय सदस्य दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार

पौधों की सघनता के कारण सूर्य की रोशनी को धरती पर आने से रोकते है, जिससे धरती पर खरपतवार नहीं उग पाता है। इसके अलावा तीन वर्ष बाद इन पौधों को देखभाल की आवश्यकता नहीं होती।

दिलीप पंचोली दैनिक चिरंतन खरगोन

Leave a Reply

%d bloggers like this: