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नोएडा में हुई सबसे बड़ी चोरी के मामले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। कालाधन से जुड़े मामले पुलिस का शिकंजा कसता देख अब आरोपी किशलय पांडेय ने दावा किया है जिस फ्लैट में चोरी हुई थी ना वह फ्लैट उसका है और ना ही चोरी हुआ करोड़ों का सोना और नकदी उसकी है।

किशलय का दावा है कि कुछ कॉरपोरेट कंपनियां उसे झूठे मामले में फंसाने का प्रयास कर रही हैं, इनके खिलाफ उसने कोर्ट में केस फाइल कर रखा है। हालांकि, पुलिस अभी तक उस फ्लैट का पता नहीं लगा सकी, जहां से 40 किलो सोना और करोड़ों की नकदी चोरी हुई थी।

वहीं, पुलिस की अब तक की छानबीन में पता चला है कि किशलय पांडे का कई बड़े केसों में दखल था। उसने उत्तर प्रदेश में बिजली निगम के कर्मचारियों का पैसा डीएचएफएल कंपनी में लगाने के खुलासे के लिए भी याचिका दायर की थी। इसके साथ ही किशलय दिल्ली में पीडब्ल्यूडी घोटाले के मामले से भी जुड़ा था। इसके अलावा कई और बड़े मामलों में भी किशलय जुड़ा हुआ था।

करोड़ों रुपये के काले धन तथा सोना चोरी के मामले में नोएडा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए छह बदमाशों से शनिवार सुबह आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना सेक्टर-39 पहुंचकर गहन पूछताछ की थी।

पुलिस उपायुक्त (जोन प्रथम) राजेश एस ने बताया था कि ग्रेटर नोएडा के सिल्वर सिटी सोसाइटी के एक फ्लैट से करीब 10 महीना पहले चोरों ने करीब 40 किलो सोना तथा सात करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी चोरी की थी, लेकिन वे चोरी का माल वहीं छोड़कर चले गए। उन्होंने बताया कि फ्लैट मालिक ने गोपाल नामक एक व्यक्ति को अपने काले धन की सुरक्षा के लिए तैनात किया था। गोपाल ने पूर्व में हुई इस चोरी का फायदा उठाकर अपने अन्य साथियों की मदद से फ्लैट में रखा करोड़ों का काला धन और सोना चुराने की साजिश रची। 10 माह पूर्व हुई इस चोरी में नोएडा और गाजियाबाद के चोर शामिल थे, जिन्होंने चोरी के माल का बंटवारा कर लिया। काफी दिन तक मामले में कोई हलचल नहीं हुई।

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डीसीपी ने बताया था कि चोरों के बीच धन के बंटवारे के विवाद की भनक पुलिस के मुखबिरों को लगी, जिनकी सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि फ्लैट मालिक राममणि पांडे तथा किशलय पांडे के खिलाफ दिल्ली और हरियाणा के कुछ जगहों पर भी मामले दर्ज हैं। पुलिस को शक है कि यह रकम व सोना कई बड़ी कंपनियों को ब्लैकमेल कर हासिल की गई है।

उन्होंने बताया था कि गिरफ्तार चोरों की पहचान अरुण, राजन, जय सिंह, नीरज, अनिल तथा बिन्टु शर्मा के रूप में हुई है। इनके चार साथी सिन्तल, पंकज, गोपाल व सन्नी फरार हैं, पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पकड़े गए बदमाशों के पास से 13 किलो सोना तथा एक करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के कागजात, 57 लाख रुपये नकद मिले थे।

किशलय पांडेय के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी

इंडिया बुल्स कंपनी से भी किशलय पांडेय और उनके पिता राममणि पांडेय ने जबरन वसूली का प्रयास किया था। कंपनी के कानूनी सलाहकार अशोक सहरावत ने बताया कि किशलय पांडेय पर कार्रवाई हो चुकी है। वह भगोड़ा घोषित है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है। 4 जून 2019 को उद्योग विहार थाने में इंडिया बुल्स की ओर से 10 करोड़ की वसूली के प्रयास का केस दर्ज कराया गया था। यह मांग विकास शेखर द्वारा की जा रही थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि असली आरोपी किशलय पांडेय और राममणि पांडेय हैं। राममणि पांडेय इस मामले में एक साल तक जेल में थे।

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