मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है और सरकार व एमसीडी से र‍िपोर्ट तलब की है.


आईएमए प्रमुख ने हाईकोर्ट में दी द्वारका कोर्ट के आदेश को चुनौती, नोटिस जारी

आईएमए प्रमुख जे ए जयालाल द्वारा दिए गए बयानों पर की गई निचली अदालत की टिप्पणी को हटाने के लिए आईएमए प्रमुख ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. इस पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया कर दिया है.

नई दिल्ली. ईसाई धर्म को लेकर आईएमए प्रमुख ( IMA President ) जेए जयालाल (J A Jayalal) द्वारा दिए गए बयानों पर की गई निचली अदालत की टिप्पणी को हटाने के लिए आईएमए प्रमुख ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. इस पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया कर दिया है. हाईकोर्ट ने निचली अदालत की टिप्पणी हटाने से फिलहाल मना कर दिया है. आईएमए प्रमुख जयलाल की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि इन टिप्पणियों को पूरी मीडिया ने रिपोर्ट किया है. आईएमए चीफ जयलाल के वकील ने कहा कि एक डॉक्टर के लिए जो 2.5 लाख डॉक्टर सोसायटी का नेतृत्व करता है, इस तरह की टिप्पणियां पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं.

दरअसल, द्वारका कोर्ट ने आईएमए के अध्यक्ष जे ए जयालाल को नसीहत दी थी कि वो आईएमए जैसी संस्था को किसी धर्म विशेष के प्रचार के प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल न करें. कोर्ट ने ये भी कहा था कि इतने जिम्मेदारी भरे पद पर बैठे किसी शख्स से हल्के कमेंट की उम्मीद नहीं की जा सकती. आईएमए चीफ के खिलाफ शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आईएमए अध्यक्ष जे ए जयालाल कोविड के उपचार में आयुर्वेद की अपेक्षा एलोपैथी को बेहतर साबित करने की आड़ में ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रहे है. हिंदू धर्म के खिलाफ  अपमान जनक अभियान चला रहे हैं.

शिकायत कर्ता के मुताबिक जयालाल हिंदुओं को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करने के लिए अपने पद का नाजायज फायदा उठा रहे है, देश को गुमराह कर रहे है. शिकायतकर्ता ने अपने  दावे को साबित करने के लिए निचली अदालत के समक्ष आईएमए अध्यक्ष के कई इंटरव्यू और आर्टिकल को रखा था. इस पर कोर्ट से मांग की कि वो उन्हें ऐसे किसी भी बयान देने से रोकें जो हिन्दू धर्म या आयुर्वेद चिकित्सा को नीचा दिखाने वाला हो. द्वारका कोर्ट ने बयान पर रोक का ऐसा कोई आदेश तो पास नहीं किया था,  मगर आईएमए अध्यक्ष को नसीहत जरूर दी थी. कोर्ट ने कहा कि आईएमए प्रेजिडेंट की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया है कि वो आगे ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे. उनसे उम्मीद की जाती है कि अपनी पद की गरिमा को बनाये रखेंगे और आईएमए जैसी संस्था के प्लेटफार्म का इस्तेमाल किसी धर्म को बढ़ावा देने में नहीं करेंगे. वो अपना ध्यान मेडिकल क्षेत्र की उन्नति और इससे जुड़े लोगो की भलाई में लगाएंगे.







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