Mumbai Monsoon: रेल मंत्री बोले-रेलवे को तैयार रहने की जरूरत, IIT मुंबई के साथ मिलकर करें काम


नई दिल्ली. देश की आर्थिक नगरी कही जाने वाली मुंबई (Mumbai) में मानसून पहुंच चुका है. ऐसे में मुंबई की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली रेलवे (Railways) को भी इस मानसून में किस तरीके से निर्बाध रूप से संचालित किया जाए. इसको लेकर रणनीति भी तैयार की गई है.

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय रेल खासकर मुंबई में रेलवे को मानसून के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की जरूरत है. उन्होंने बारिश के मौसम में सभी इमरजेंसी उपाय उपलब्ध होने के बारे में मुंबई उपनगरीय रेलवे (Mumbai Suburban Railway) की तैयारियों और रोड मैप की भी समीक्षा की.

रेल मंत्री गोयल ने संवेदनशील इलाकों की मौजूदा स्थिति की जांच की और ट्रेनों के निर्बाध संचालन संबंधी योजनाओं की समीक्षा की. गोयल ने कहा कि रेलवे यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि मानसून शुरू होने के साथ मुंबईवासियों (Mumbaikars) को कोई असुविधा न हो.

उपनगरीय रेलवे की तैयारियों की समीक्षा करते हुए रेल मंत्री ने रेलवे को मानसूनी बारिश से निपटने में रेलवे की तकनीकी और सिविल कार्यों से जुड़ी पहल की कुशलता का अध्ययन करने के लिए आईआईटी मुंबई (IIT Mumbai) जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी करने की सलाह दी.

उन्होंने कहा कि रेल सेवाओं का निर्बाध तरीके से और लगातार सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए नवाचार और कठिन परिश्रम साथ-साथ चलने चाहिए.

यह उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी के दौरान भी, रेलवे ने मुंबई में विशेष रूप से संशोधित ईएमयू रेक सहित 3 नो मक स्पेशल लगा करके उपनगरीय खंड से 2,10,000 घन मीटर मलवा/कचरा/मिट्टी को साफ करने का काम किया है.

पिछले मानसून के समय आई बाढ़ वाली जगहों की पहचान की गई और प्रत्येक जगह जैसे: बांद्रा, अंधेरी, माहिम, ग्रांट रोड, गोरेगांव के अनुरूप समाधान तैयार किये गए थे.

सबमर्सिबल पंपों की संख्या में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी की

बारिश के रियल टाइम और प्रामाणिक आंकड़े पाने के लिए चार ऑटोमेटिक रेल गॉज (एआरजी) आईएमडी के सहयोग से और दस एआरजी डब्ल्यूआर की ओर से स्वतंत्र रूप से लगाए गए. सीवरेज और सबमर्सिबल पंपों सहित ट्रैक और डिपो पर पंपों की संख्या में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है.

नाले की सफाई के सर्वेक्षण व निगरानी को ड्रोन का उपयोग

बोरीवली विरार खंड में नाले की सफाई के सर्वेक्षण और निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया गया और भूमिगत नालियों की गहरी सफाई सुनिश्चित करने के लिए सक्शन/डी-स्लजिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया था.

कम से कम जलभराव सुनिश्चित करने के लिए भूमिगत नालियों के निर्माण के लिए नई माइक्रो टनलिंग पद्धति को अपनाया गया.





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