UP: जितिन प्रसाद को यूपी में मंत्री बनाये जाने की हैं सिर्फ अटकलें, या फिर भाजपा की कोई मजबूरी?


जितिन प्रसाद को यूपी में मंत्री बनाये जाने की हैं सिर्फ अटकलें (File photo)

दूसरे दलों से आये दूसरे नेता पहले से ही लाइन में लगे हैं. नरेश अग्रवाल और अमेठी के डॉ. संजय सिंह (Dr. Sanjay Singh) अभी उम्मीद ही लगाये बैठे हैं.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मिशन-2022 की तैयारियों में जुटी बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेल है. कांग्रेस और ब्राम्हणों के कद्दावर नेता जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) बुधवार को कांग्रेस और गांधी परिवार से अपने 3 पीढ़ियों पुराना नाता तोड़ बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया है. जितिन के भाजपा में आते ही उनके मंत्री बनाये जाने की अटकलें तेज हो गयी हैं. कहा ये जा रहा है कि जितिन प्रसाद जल्दी ही होने वाले मंत्रिमण्डल विस्तार में शपथ लेंगे. अगले महीने होने वाले एमएलसी के चुनाव में वे विधायक भी बन जाएंगे. तर्क ये दिया जा रहा है कि यूपी में नाराज ब्राह्मणों को साधने के लिए पार्टी ऐसा कर सकती है.

अब सवाल ये उठता है कि जितिन को मंत्री बनाने की सिर्फ अटकलें तेज हुई हैं या फिर वास्तव में भाजपा ऐसा करने को मजबूर है. वरिष्ठ पत्रकार किशोर निगम ने कहा कि जितिन प्रसाद का भाजपा ने इतनी जल्दी समायोजन हो पाये, ये फिलहाल संभव नहीं दिखाई देता. दूसरे दलों से आये दूसरे नेता पहले से ही लाइन में लगे हैं. नरेश अग्रवाल और अमेठी के डॉ. संजय सिंह अभी उम्मीद ही लगाये बैठे हैं. जितिन की ये उम्मीद हो सकती है कि पार्टी उन्हें 2022 में होने वाले राज्यसभा के चुनाव के बाद दिल्ली भेज दे. एक बार दिल्ली की जो राजनीति कर लेता है उसे स्टेट पॉलिटिक्स में मजा नहीं आता है.

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उधर, भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने इस मामले पर गोलमोल जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संगठन ये तय करता है कि किसी भी कार्यकर्ता का कैसा उपयोग करना है. जितिन के मंत्री बनाये जाने से पार्टी को दूसरे ब्राह्मण नेता क्या नाराज नहीं हो जाएंगे? इस सवाल के जवाब में शुक्ला ने कहा कि संगठन जो भी फैसला लेता है उससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता ही है.पीएम नरेंद्र मोदी के खास AK शर्मा

दूसरी तरफ मऊ वाले अरविंद शर्मा तो एमएलसी भी बन गये. उनके मंत्री बनने की अटकलें उनके यूपी आने से पहले ही शुरु हो गयी थीं जो अभी भी जारी हैं. उन्हें प्रधानमंत्री का खास माना जाता है क्योंकि वे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात भी रहे और दिल्ली भी. अभी तो उन्हें ही समायोजित नहीं किया जा सका है. कुछ और बातों पर गौर करते हैं. मौजूदा योगी सरकार के ढ़ाचे को देखकर ऐसा नहीं लगता कि सत्ता में ब्राह्मणों की हिस्सेदारी में कोई कमी है. मंत्रिपरिषद हो या फिर नौकरशाही, ब्राह्मण वर्ग का दबदबा बरकरार है. बात सबसे पहले मंत्रियों की करते हैं.

ब्राह्मण वर्ग को मिला सम्मान

बता दें कि योगी मंत्रिपरिषद में कुल 53 मंत्री अभी हैं. इनमें से 9 मंत्री पदों पर ब्राह्मण वर्ग के नेता विराजमान हैं. दिनेश शर्मा डिप्टी सीएम के पद पर हैं. नौकरशाही में ही ब्राह्मण वर्ग को किनारे नहीं रखा गया है. मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी और डीजीपी एचसी अवस्थी ब्राह्मण वर्ग से हैं. इनके अलावा योगी सरकार में सबसे मजबूत अफसर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ही माने जाते हैं जो एक ब्राह्मण हैं.









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