IND vs SL: श्रीलंका दौरे के चयन में कुछ खिलाड़ियों की लॉटरी लगी तो कुछ को मिली लाइफलाइन!


ऐसा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार नहीं हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो अलग-अलग टीमें खेलतीं दिखेंगी. सोशल मीडिया पर नई पीढ़ी के फैंस की भरमार है और इसलिए बहुत कम लोगों को ये बात पता हो कि करीब 23 साल पहले 1998 में भी भारत की दो टीमें अलग-अलग सीरीज़ में खेली थीं. एक टीम मोहम्मद अज़हरुदीन की कप्तानी में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कनाडा के टोरंटो शहर में वन-डे सीरीज़ में खेल रही थी तो दूसरी टीम की अगुवाई अजय जडेजा कर रहे थे जो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए पहली बार क्वालालंपुर में शिरकत कर रही थी.

वक्त का पहिया इस साल भी दिलचस्प अंदाज़ में घूमा है. इस बार नियमित खिलाड़ियों वाली विराट कोहली की टीम इंग्लैंड में है, जबकि आने वाले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए बीसीसीआई ने सफेद गेंद के लिए एक अलग ही टीम का चयन किया है. चेतन शर्मा की अध्यक्षता वाली चयन-समिति ने जो सबसे दिलचस्प फैसला लिया है वो है कप्तान के तौर पर शिखर धवन को ज़िम्मेदारी देने की. धवन वनडे क्रिकेट के शानदार खिलाड़ी हैं लेकिन अगर बात सबसे छोटे फॉर्मेट की करें तो वहां ओपनर के तौर पर उनका स्थान पक्का भी नहीं है.

रोहित शर्मा के साथ खुद विराट कोहली ने पारी की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं और अगर वो नहीं भी ऐसा करते हैं तो धवन से ज़्यादा आक्रामक विकल्प टीम इंडिया के पास ईशान किशन और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों का है. इसके अलावा पृथ्वी शॉ, देवदत्त पडिक्कल और रितुराज गायकवाड़ जैसे युवा भी हैं जो श्रीलंका दौरे पर धवन की टीम का हिस्सा होंगे लेकिन भविष्य में वो टीम इंडिया के लिए दिल्ली के ही खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरेंगे.

भुवी की बजाए हार्दिक को बनाया जा सकता था उप कप्तान?इस टीम में भुवनेश्वर कुमार को उप कप्तान की ज़िम्मेदारी देना भी थोड़ा हैरानी वाला फ़ैसला दिखता है. भुवनेश्वर टेस्ट क्रिकेट की योजना से बाहर हो चुके हैं और सफेद गेंद की क्रिकेट में वो पहले की तरह अपरिहार्य नहीं है. ऐसे में अगर उप कप्तानी के तौर पर किसी खिलाड़ी को आजमाया जा सकता था तो शायद वो हार्दिक पंड्या हो सकते थे. पिछले कुछ सालों में पंड्या ने ये साबित किया है कि अतरराष्ट्रीय स्तर पर ना सिर्फ उन्होंने चुनौतियों का सामना दिलेरी से किया है बल्कि उम्मीद से बढ़कर भी बेहतर खेल दिखाया है. अगर टीम इंडिया के लिए खेलने से पहले हार्दिक का रिकॉर्ड घरेलू क्रिकेट में वड़ोदरा के लिए बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ के तौर पर देखा जाता तो शायद उनकी दावेदारी को कोई गंभीरता से लेता भी नहीं. ऐसे में पंड्या के एक और पहलू को परखने का भारतीय चयनकर्ताओं के पास एक बढ़िया मौका था. वैसे, भी सफेद गेंद की क्रिकेट में उप कप्तानी के बहुत ज़्यादा मायने होते नहीं है और ये सिर्फ भविष्य के लिए कप्तान को तैयार करने की मुहिम का एक हिस्सा ही महज़ माना जाता है.

कुलदीप को फिर मिली हैं एक और लाइफलाइन

इस टीम में चार तेज़ गेंदबाज़ और छह स्पिनर को मौका दिया है. इससे ये बात साफ है कि तैयारी अक्टूबर में होने वाले टी20 वर्ल्ड को लेकर है, ताकि नियमित कप्तान कोहली को कई तगड़े विकल्प दिए जा सकें. इनमें से भी ये दौरा सबसे ज़्यादा अहम ‘कुलचा’ की जोड़ी यानि कुलदीप यादव और युज़वेंद्र चहल के लिए है, जो कुछ महीने पहले तक सीनियर टीम में बिना किसी सवालों के प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हुआ करते थे. चहल तो अब भी टीम इंडिया का हिस्सा बने हुए हैं लेकिन उन्हें प्लेइंग इलवेन में आने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा जबकि कुलदीप को एक लाइफलाइन मिली है. टीम इंडिया से बाहर होने के बाद आईपीएल में भी यादव अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए जूझते ही दिखे हैं. ऐसे में चयनकर्ताओं ने शायद ये संदेश देने की कोशिश की है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के इस होनहार चाइनामैन पर पूरी तरह से भरोसा नहीं खोया है.

देवदत्त पडिक्कल को मिला शानदार मौका

कर्नाटक के देवदत्त पडिक्कल जिन्होंने अब तक फर्स्ट क्लास में एक भी शतक नहीं लगाया है अब टीम इंडिया का हिस्सा पहली बार होंगे. ऐसा विजय हज़ारे ट्रॉफी में शानदार खेल दिखाने के बाद आईपीएल में रॉयल चैलंजर्स बैंगलोर के लिए भी दमदार खेल दिखाना रहा है. लेकिन, धवन के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए उन्हें इंतज़ार करना पड़े क्योंकि पृथ्वी शॉ भी इस टीम में है जो आईपीएल में डेलही कैपिटल्स के लिए धवन के साथ पारी की शुरुआत करते हैं और साथ ही घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए उन्होंने हाल ही में रनों का अंबार लगा दिया था. शॉ के लिए भी ये दौरा उनके करियर में वापसी करने के लिए लिहाज़ से काफी अहम माना जा सकता है.

खुद को भाग्यशाली मान सकते हैं राणा और चक्रवर्ती

पहली बार जिन पांच खिलाड़ियों को टीम इंडिया में आने का मौक़ा मिला है उनमें दिल्ली के नितिश राणा खुद को काफी भाग्यशाली मान सकते हैं. कोलकाता के लिए आईपीएल में लगातार अच्छा खेल दिखाने वाले राणा को शायद टीम इंडिया के लिए मौका नहीं मिलता अगर ये सीरीज़ नहीं होती. यही हाल मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का है जिन्हें अब तक दो बार टीम इंडिया में मौका तो मिला लेकिन अलग अलग कारणों के चलते वो आखिर में टीम का हिस्सा नहीं हो पाए. पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चुने जाने के बाद चक्रवर्ती को ऊंगली में चोट लग गई थी तो इंग्लैंड के ख़िलाफ़ इस साल जब वो फिर से चुने गए तो उनकी फिटनेस सवालों के घेरे में आ गई जिस पर खुद कप्तान कोहली ने सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जताई थी.

इस तिकड़ी के पास टी20 वर्ल्ड का टिकट पक्का करने का मौका

सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन और ईशान किशन तीन ऐसे खिलाड़ी है जो लगातार आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के ज़रिये चयनकर्ताओं का ध्यान खीचंने की पुरज़ोर कोशिश करते आ रहे हैं और उन्हें मौके भी इससे पहले मिले हैं. लेकिन, इस तिकड़ी के लिए श्रीलंका में 6 मैच ऐसे शानदार मौक़े साबित हो सकते हैं कि जब भी  टी20 वर्ल्ड के लिए टीम का चयन होगा तो इनकी दावेदारी को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो जाए. 32 साल के कृष्णप्पा गौतम के लिए टीम इंडिया में चयन होना कोई लॉटरी लगने से कम नहीं है क्योंकि अक्सर इस उमर वाले खिलाड़ियों के लिए भारतीय चयनकर्ता बहुत ज़्यादा सहानूभूति नहीं रखते हैं. यकीन नहीं आता हो तो सौराष्ट्र के शेल्डन जैक्सन और जयदेव उनादकट जैसे खिलाड़ियों से पूछ लीजिए.

दिल को छूने वाली बात है चेतन सकारिया का चयन

बहरहाल, अगर पूरे चयन में जो सबसे ज़्यादा दिल को छूने वाली बात है तो वो है युवा चेतन सकारिया का टीम में होना. इस साल राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल में सकारिया ने भले ही सात मैचों में 7 विकेट ही लिए हों लेकिन अगर उनके नाम एमएस धोनी, केएल राहुल, सुरेश रैना, मयंक अग्रवाल और अंबाती रायुडू हों तो आपको ये समझने में मुश्किल नहीं होगी कि बाएं हाथ के इस तेज़ गेंदबाज़ में भविष्य के लिए असीम संभावनाएं हैं.





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