सात साल की परनिका कर रहीं बच्‍चों को पर्यावरण जागरूक


सात साल की बच्ची परनिका पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैला रही है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

बच्‍चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रही सात साल की परनिका इन दिनों चर्चा में हैं. उनका कहना है कि गर्मियों में बच्‍चों को कई प्रकार की गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलता है. इस दौरान बच्‍चे कई चीजों को सीखते और समझते हैं. इसी तरह पर्यावरण को जाने और समझें. उन्‍होंने स्‍टार्स ऑफ मदर नेचर मुहिम चलाई हुई है. अब उन्‍हें अन्‍य समूह का समर्थन मिल रहा है, जिससे देशभर के बच्‍चों को पर्यावरण में शोध करने की प्रेरणा मिलेगी.

नयी दिल्ली. सात साल की परनिका मीडिया की सुर्खियों में हैं वे पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मुहिम ‘स्टार्स ऑफ मदर नेचर’ चला रही हैं.  अब उनके प्रयास को अन्‍य का सहयोग भी मिल गया है जिससे देशभर के बच्‍चे न केवल  पर्यावरण शोध के लिए प्रेरित होंगे, बल्कि उन्‍हें इसी ग्रीष्मकाल में प्रकाशित होने का भी अवसर मिलेगा.

परनिका ने कहा कि बच्‍चों को कहानियां बहुत पसंद होती हैं. वे कहानियां पढ़ते हैं, सुनते और और कहते भी हैं. ऐसे में यह अच्‍छा अवसर है कि वे इस माध्‍यम से आगे बढ़ें. परनिका की ‘स्टार्स ऑफ मदर नेचर’ पहल को पेरेंटिंग (बच्चों की देखभाल से संबंधित) ब्लॉग ‘द हैप्पी मॉम्स कैफे’ और स्क्रीन मुक्त ऑडियो लिस्निंग (आवाज सुनना) और बच्चों को सीखने में मदद करनेवाला ऐप ‘हे क्लाउडी’ ने साथ मिलकर तैयार किया है.

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ये भी पढ़ें  कोरोना वैक्सीन : भारत में 730 रुपए में मिलेगी फाइजर की वैक्सीन, दुनिया में यह सबसे सस्तीपरनिका ने ‘स्टार्स ऑफ मदर नेचर’ के बारे में कहा, ‘‘ धरती माता सुंदर है और उसके खजाने भी. हमें उनके बारे में जानना चाहिए. ’’ यह अभियान छह से 14 साल तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है और इसके जरिए वो प्रकृति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जान सकेंगे. करीब आठ कहानियों को ऑडियो सीरिज के रूप में ‘हे क्लाउडी’ ऐप पर प्रकाशित होने का मौका मिलेगा.

द हैप्पी मॉम्स कैफे की संस्थापक प्रीति चतुर्वेदी ने कहा कि गर्मी की छुट्टियां ज्यादा से ज्यादा सीखने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने का अवसर है. इसलिए यह बच्चों को एक कार्य में जोड़ने का बेहतर विचार है. परनिका की ‘स्टार्स ऑफ मदर नेचर’ पहल में भाग लेने के इच्छुक बच्चों को प्रकृति, पर्यावरण और पुनर्चक्रण के विषयों पर अपना शोध करने और लगभग 600 शब्दों की एक छोटी कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.









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