Zerodha के फाउंडर Nikhil Kamath  ने अपने 1.5 करोड़ यूजर्स को मिला बड़ा झटका



Zerodha: बाजार विनियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) की ओर से बाजार में हुई गड़बड़ी का पता लगाने और उसकी रोकथाम के लिए उठाए गए कदम के बाद ब्रोकरों और ब्रोकर हाउसेज में हड़कंप मचा हुआ है. सेबी के कदम के साथ ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के करीब 1.5 करोड़ से अधिक यूजर्स को तगड़ा झटका लगा है. सेबी ने बाजार की गड़बड़ी रोकने, भाव में हेराफेरी, फ्रंट रनिंग, भेदिया कारोबार, गलत बिक्री और अनधिकृत बिक्री की निगरानी की व्यवस्था बहाल कर दी है. इस नई व्यवस्था के तहत ब्रोकरों और ब्रोकरेज फर्म्स को बाजार में हुई गड़बड़ी के बारे में 48 घंटे के भीतर सेबी को जानकारी देनी होगी. सेबी के इस कदम के बाद ब्रोकरेज फर्म जीरोधा ने अपने यूजर्स को फ्री इक्विटी डिलीवरी ट्रेड की सुविधा बंद करने का ऐलान किया है.

सेबी की ओर से बाजार में होने वाली गड़बड़ी पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदम के बाद जीरोधा के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नितिन कामत ने एक्स पर एक पोस्ट कर इसके प्रभाव पर बारे में अपने यूजर्स को जानकारी दी है. अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि उनकी कंपनी उन लास्ट ब्रोकरों में से एक है, जो फ्री इक्विडिटी डिलीवरी ट्रेड की पेशकश करती है, लेकिन सेबी के इस कदम के बाद यूजर्स को फ्री ट्रेड की सुविधा नहीं मिल सकेगी.

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ब्रोकरों पर क्या पड़ेगा प्रभाव

नए सर्कुलर के बाद ब्रोकरों को अपने चार्जस में बदलाव करना पड़ेगा. एफ&ओ ट्रेडों को ब्रोकरेज बढ़ाना होगा और जीरो ब्रोकरेज खत्म करनी पड़ेगी. कामथ ने बताया कि वह उन अंतिम ब्रोकरों में से है जो फ्री इक्विटी डिलीवरी ट्रेड की सुविधा उपलब्ध कराते हैं. उन्होंने बताया कि स्टॉक एक्सचेंज ब्रोकर द्वारा किए गए कुल टर्नओवर के आधार पर ट्रांजैक्शन फीस चार्ज करते हैं. ब्रोकर जो ग्राहक से शुल्क प्राप्त करते हैं और एक्सचेंज महीने के अंत में ब्रोकर से जो शुल्क मिलता है उसके बीच का अंतर छूट है जो की ब्रोकर को जाता है. यह छूट इनके रेवेन्यू का लगभग 10% होता है जो की नई सर्कुलर के बाद से खत्म हो जाएगा.

सेबी‌ ने क्यों लाया यह नया सर्कुलर

सेबी ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि इन संस्थाओं द्वारा वसूले जाने वाली फीस में कई बार अंतर देखने को मिलता है. सेबी‌ चाहता है कि सभी के लिए यह शुल्क एक समान हो और कोई भी संस्था मन माने ढंग से शुल्क न ले सके. और किसी भी प्रकार की प्रकाशित नियमों के बाहर छूट न दे सके. साथ ही सेबी ने शुल्क पर पारदर्शिता बनाने के लिए यह नया नियम लाया है. इसलिए सभी संस्थाओं को अपने विभिन्न सेवाओं के लिए लगने वाले शुल्क को स्पष्ट रूप से बताना होगा ताकि लोगों को किसी प्रकार का भ्रम ना हो.

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