UP corona update: तीसरी लहर के लिए यूपी सरकार ने कसी कमर, बच्चों के लिए की ये खास तैयारी


उत्तर प्रदेश ने तीसरी लहर से निपटने के लिये तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए एक मेडिकल किट तैयार करवाई गई है.

कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की बड़ी चिंता के बीच योगी सरकार ने बच्चों के लिए सिरप और खाने की गोलियों के साथ विशेष दवा किट तैयार करवाई है, इसे पूरे प्रदेश में फ्री बांटा जाएगा.

लखनऊ. कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर के दौरान बच्चों के संक्रमित होने की बड़ी चिंता के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बच्चों के लिए सिरप और खाने की गोलियों के साथ विशेष दवा किट तैयार करवाई है, इस किट को प्रदेश में फ्री वितरण करने का का फैसला किया है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने न्यूज 18 से योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अभियान 15 जून से शुरू हो सकता है.

स्वास्थ्य मंत्री सिंह ने कहा कि “हम एक सप्ताह के लिए दवाओं के साथ बच्चों के लिए एक किट वितरित करेंगे, और खुराक को बच्चों की उम्र और वजन के अनुसार दिया जाएगा. आशा कार्यकर्ताओं वाली हमारी 97,000 चिकित्सा टीमें पहले से ही घर-घर जाकर की जांच कर रही हैं और उन्हें दवा किट दी जा रही हैं. जिन बच्चों में सर्दी-खांसी जैसे इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं – उनके माता-पिता को उन्हें एक सप्ताह के लिए दवाएं देने के लिए कहा जाएगा.” राज्य सरकार 30 लाख पैम्फलेट-तैयार कर रही है, जिसमें बच्चों के लिए मेडिकल किट का वितरण किया जाएगा. तीन तरह के किट होंगे- छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए, 6-12 साल और 12 से 18 साल तक के बच्चों के लिए. बच्चों की किट पर ये संदेश भी होगा- ‘कोरोना की जंग में हर जीवन अनमोल.’

अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि बच्चों के लिए इस तरह की किट में वयस्कों की तुलना में कम खुराक के सिरप और खाने की गोलियां शामिल होंगी. उन्होंने कहा कि “हम बच्चों के लिए दवा किट तैयार कर रहे हैं, क्योंकि यह व्यापक रूप से आशंका जताई जा रही है कि बच्चे तीसरी लहर में संक्रमित हो सकते हैं. इन दवा किटों को तैयार कर जिलों में हमारे गोदामों में भेजा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर इनका वितरण किया जा सके. अभी मामले कम हैं इसलिए हम भविष्य के लिए तैयार रहना चाहते हैं.”

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि वयस्कों के साथ अब तक के अनुभव में देखा गया है कि दवाओं के माध्यम से समय पर इलाज न करने पर इन्फ्लूएंजा जैसे सर्दी और खांसी और सांस की बीमारियों के लक्षण कोविड जैसे लक्षणों में बदल जाते हैं, हालांकि दवा लेने से बुखार कम हो जाता है. हमारी टीमें ऐसे मरीजों की निगरानी करती हैं जिन्हें इस तरह की मेडिकल किट दी जाती है और अगर लक्षण कम नहीं होते हैं तो रैपिड रिस्पांस टीमों द्वारा परीक्षण किए जाते हैं.बता दें कि महीने की शुरुआत में यूपी सरकार ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के माता-पिता को टीकाकरण के लिए प्राथमिकता देने का फैसला किया था, ताकि बच्चों को संक्रमण के स्रोतों के संपर्क में आने से रोका जा सके. यूपी ने माता-पिता के टीकाकरण के लिए ‘अभिभावक बूथ’ के साथ विशेष केंद्र स्थापित किए हैं, जिन्हें अपने बच्चे के पहचान प्रमाण के साथ ले जाया गया था. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने भी हर जिले में कम से कम 100 बाल चिकित्सा बेड स्थापित करने का आदेश दिया था.









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