HBD Andrew Symonds: कभी कॉन्ट्रैक्ट के लिए नंगे पैर पहुंचे थे बोर्ड ऑफिस, देश के लिए जीते दो विश्व कप


नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर एंड्रयू सायमंड्स का आज (9 जून, 1975) जन्मदिन है. सायमंड्स की पहचान एक जुझारू खिलाड़ी के रूप में रही. उन्होंने मैदान पर जो भी किया, पूरी शिद्दत से किया. फिर चाहें गेंदबाजी, बल्लेबाजी हो या स्लेजिंग. वो किसी भी मामले में पीछे नहीं रहे और विवादों से भी उनका नाता हमेशा जुड़ा रहा. इसी वजह से इस खिलाड़ी का करियर उतना लंबा नहीं चल पाया. सायमंड्स ऐसे चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिसका जन्म किसी दूसरे देश में हुआ और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट किसी और मुल्क के लिए लिए खेली.

सायमंड्स का जन्म 1975 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ था. उनके माता-पिता में से एक वेस्टइंडीज और एक यूरोपीय मूल के थे. हालांकि, बाद में उन्हें एक दंपति ने गोद ले लिया था. सायमंड्स को गोद लेने वाला परिवार उन्हें ऑस्ट्रेलिया लेकर चला गया. ऐसे में उनके पास इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की ओर से खेलने का भी मौका था. लेकिन सायमंड्स ने ऑस्ट्रेलिय़ा की ओर से खेलने का फैसला किया था. हालांकि, वो शुरुआती कुछ सालों तक काउंटी क्रिकेट के साथ ऑस्ट्रेलिया के घरेलू शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट खेलते रहे.

सायमंड्स ने 20 की उम्र में 20 छक्के जड़े थे

उन्होंने 20 साल की उम्र में ग्लॉसेस्टरशर की तरफ से खेलते हुए ग्लेमोर्गन के खिलाफ एक मैच में 20 छक्के जड़े थे. यह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा 20 छक्के लगाने का विश्व रिकॉर्ड है. तब सायमंड्स ने कहा था कि उनका ध्यान रिकॉर्ड की तरफ नहीं था. वो तो बस अपनी टीम की मदद करना चाहते थे. उनकी यही सबसे गलती थी कि वो एक ओवर में 24-25 रन बनाने के बाद भी वो आखिरी गेंद पर छक्का मारने के चक्कर में आउट हो जाते थे.इसी वजह से उनके शुरुआती कोच रहे टूट ब्रायन भी उनसे नाराज रहते थे. लेकिन सायमंड्स के खेलने का अंदाज नहीं बदला. 1995 में वो पाकिस्तान दौरे के लिए इंग्लैंड ए टीम का हिस्सा बने. हालांकि वे दौरे पर गए नहीं और उन्होंने कहा कि वे ऑस्ट्रेलिया के लिए ही खेलेंगे. इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड छोड़ दिया.

सायमंड्स विश्व कप जीतने वाले ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे

सायमंड्स ने 1998 में ऑस्ट्रेलिया के लिए वनडे डेब्यू किया. हालांकि, वो टीम से अंदर-बाहर होते रहे. सायमंड्स के लिए 2003 का वनडे वर्ल्ड कप खास रहा. इस टूर्नामेंट से पहले वो चोटिल हो गए थे. हालांकि, इस चोट से उबरकर उन्होंने वापसी की और पाकिस्तान के खिलाफ 125 गेंद में नाबाद 143 रन की पारी खेली. इस पारी के बाद से उनका वनडे करियर परवान चढ़ने लगा. इस मुकाबले से पहले तक उन्होंने 23 की औसत से 762 रन बनाए थे. लेकिन इसके बाद उनकी रन बनाने की औसत 43 की हो गई. वे 2003 और 2007 में वर्ल्ड कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे.

सायमंड्स ने एशेज सीरीज में पहला टेस्ट शतक लगाया था

इस ऑलराउंडर ने 2004 में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया. लेकिन उनका आगाज अच्छा नहीं रहा. शुरुआती कुछ टेस्ट खेलने के बाद वो टीम से बाहर हो गए. दो साल बाद उन्हें भी टेस्ट टीम में मौका मिला. इस बार उन्होंने इसे बर्बाद नहीं होने दिया. एशेज सीरीज के मेलबर्न टेस्ट में पहला शतक लगाया. टेस्ट में 2007-08 उनके लिए सबसे यादगार साल रहा. उन्होंने श्रीलंका, भारत और वेस्ट इंडीज के खिलाफ 9 टेस्ट में 777 रन बनाए. इस दौरान भारत के खिलाफ सिडनी में 162 रन की पारी सबसे बड़ी रही.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान-इंग्लैंड सीरीज टीवी पर नहीं देख पाएंगे पाक फैंस, इमरान सरकार ने लिया बड़ा फैसला

सौरव गांगुली ने फिर अपलोड की डिलीट हुई फोटो, पहले लोगों ने किया ट्रोल अब हो रही तारीफ

विवादों से सायमंड्स का गहरा नाता रहा

सायमंड्स को लेकर एक किस्सा बहुत चर्चित है कि वो 2009 में बिखरे बालों, नंगे पैर और काउबॉय हैट लगाकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन चीफ एग्जीक्यूटिव मैलकम स्पीड से कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत के लिए मिलने पहुंच गए थे. ये कोई इकलौता ऐसा वाकया नहीं था. कई बार विवादों और अनुशासनहीनता के कारण उन पर कार्रवाई हुई. 2008 में ऑस्ट्रेलियाई टीम बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज खेलने वाली थी. खिलाड़ी इसकी तैयारियों में जुटे थे. लेकिन सायमंड्स मीटिंग के बजाए मछली पकड़ने में मशगूल थे. 2008 में भी भारत के खिलाफ सिडनी टेस्ट के दौरान मंकीगेट कांड हुआ था. तब सायमंड्स ने भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह पर नस्लीय टिप्पणी का आरोप लगाया था.

सायमंड्स ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 26 टेस्ट खेले

सायमंड्स का आरोप था कि उन्हें मैदान पर विवाद के दौरान भारतीय स्पिनर ने ‘मंकी’ कहा था. हरभजन ने इससे साफ इनकार किया. हालांकि, भारतीय स्पिनर को बैन कर दिया गया था. इस विवाद के चलते भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट बोर्ड के बीच भी तनातनी हुई थी. बाद में हरभजन को क्लीन चिट मिल गई और दौरा पूरा हुआ था. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 26 टेस्ट में 1462 रन बनाए. वहीं 198 वनडे में करीब 40 के औसत से 5088 रन उनके नाम रहे. गेंदबाजी में भी उनकी छाप थी. उन्होंने 24 टेस्ट, 133 वनडे विकेट लिए.





Source link

Leave a Reply

COVID-19 Tracker
%d bloggers like this: