जानें वो 5 वजह जिनसे 35 दिनों में अनलॉक हो गया कोरोना का कहर झेल रहा बिहार


रजनीश चंद्र

पटना. कोरोना महामारी से जंग लड़ रहा बिहार करीब 35 दिन के बाद अनलॉक (Bihar Unlock) हुआ और आंशिक रूप से बिहार में लॉकडाउन (Lockdown) हटा दिया गया है. बीते 5 मई को लॉकडाउन लगाया गया था, जिस समय लॉकडाउन लगा था उस समय हर दिन कोरोना के लगभग 15 हजार मामले आ रहे थे, लेकिन अब एक हजार से भी कम मामले हर दिन आ रहे हैं. कोरोना की तेज रफ्तार को सरकार ने चौतरफा प्रयास से रोकने में सफलता पाई. एक ओर जहां लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए लगातार समीक्षा की जाती रही, वहीं टेस्टिंग और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को गति देने के लिए भी हरसंभव प्रयास किये गये. न्यूज 18 आपको बता रहा है कि आखिरकार कैसे बिहार की नीतीश सरकार 35 दिन के लॉकडाउन से कोरोना पर काबू पाने में सफल रही.

चार बार बढ़ाया गया लॉकडाउन

कोरोना संक्रमण रोकने में लॉकडाउन ज्यादा प्रभावशाली रहा है. इसे हम आंकड़ों के सहारे समझ सकते हैं. लॉकडाउन का पहला फेज 5 से 15 मई तक था. इस दौरान कोरोना के 1,07,774 मामले सामने आए. दूसरा फेज 16 से 25 मई तक था. इस दौरान कोरोना के 50,711 मामले सामने आए. तीसरा फेज 26 मई से 1 जून तक था, जिसमें कोरोना के 12,209 मामले आए, वहीं चौथा फेज 2 जून से 8 जून तक था, जिसमें 5,648 नए मामले आए. लॉकडाउन के कारण 5 मई से 8 जून के बीच कोरोना की रफ्तार पर बहुत हद तक ब्रेक लग गया.लॉकडाउन की लगातार समीक्षा

लॉकडाउन के हर फेज में सरकार ने आवश्यकतानुसार संशोधन किये. 5 मई, 16 मई, 26 मई और 2 से लेकर 8 जून तक के लिए भी अलग-अलग आदेश जारी कर के कोरोना संक्रमण की रफ्तार को कम करने के लिए सख्ती बढ़ाई गई. मसलन गृह विभाग ने 13 मई को आदेश जारी कर दुकानों को खोलने की समय सीमा में बदलाव कर के कई प्रतिबंध लगाए. देखा जाए तो बिहार सरकार ने कोरोना पर रोकथाम के लिए पिछले कुछ महीनों में 12 बार बड़े फैसले लिए. फैसले अभी भी लगातार लिए जा रहे हैं, ताकि कोरोना पर प्रभावी तरीके से काबू पाया जा सके.

कोरोना टेस्टिंग पर जोर

सरकार की यह कोशिश रही कि कोरोना जांच की रफ्तार बढ़ायी जाए, जिससे संक्रमित लोगों का पता चल सके और उनको आइसोलेट कर संक्रमण को फैलने से रोका जाए. अस्पतालों से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर टेस्टिंग की व्यवस्था की गयी. दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की जांच रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हवाई अड्डे पर करने के लिए प्रभावी कदम उठाये गये. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए मोबाइल वैन को भी रवाना किया गया. ऐसे वैन के द्वारा एक दिन में 1000 लोगों की जांच की जा सकती है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3 करोड़ 7 लाख 76 हजार 332 जांच की गयी है. राज्य में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या घट कर 7897 रह गयी है.

वैक्सीनेशन को बढ़ावा

वैक्सीनेशन को लेकर भी सरकार ने टीका एक्सप्रेस की शुरुआत की. टीका एक्सप्रेस ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगातार घूम रही है, जिससे लोगों को उनके घर पर ही टीका दिया जा रहा है. वैक्सीन लेने वालों का पूरा ब्योरा रखा जा रहा है, जिससे उन्हें दूसरा टीका भी समय पर दिया जा सके. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने टीका एक्सप्रेस को रवाना करने के मौके पर कहा था कि ‘टीका एक्सप्रेस से लोगों को टीकाकरण में सहूलियत होगी. हमलोगों का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण कराएं.’ पटना में अब तो दो केन्द्रों में 24 घंटे टीकाकरण की व्यवस्था की गयी है. पाटलिपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और पाटलिपुत्रा अशोका होटल में यह सुविधा उपलब्ध है.

तकनीक का इस्तेमाल

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने होम आइसोलेशन ट्रैकिंग (एचआईटी) कोविड एप को लांच किया. इस एप के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति जो होम आइसोलेशन में हैं, उनकी स्थिति कैसी है. वो आइसोलेशन के गाइडलाइन का सही ढंग से पालन कर रहे हैं या नहीं. इससे संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पिछले दिनों पटना के डीएम के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान इस एप की तारीफ कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि इसका इस्तेमाल देश के स्तर पर भी उपयोगी हो सकता है.

हालांकि, सरकार ने लॉकडाउन हटा दिया है, लेकिन सतर्कता बनाए रखना निहायत जरूरी है. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पांच सूत्रीय रणनीति यानी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, उचित कोविड व्यवहार और टीकाकरण पर लगातार काम करते रहना होगा अन्यथा राहत को आफत में बदलते देर नहीं लगेगी.





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