बुलेट ट्रेन परियोजना के कारण हटाए गए झुग्गी निवासी कोर्ट की शरण में


अहमदाबाद-मुंबई के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train) को तय समय से शुरू करने के लिए काम में तेजी लाई जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए हटाए गए झुग्‍गी निवासियों ने गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया है. मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बिरेन वैष्णव की खंडपीठ ने सोमवार को विस्थापितों की याचिका पर सुनवाई की. मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी. झुग्गी में रहने वाले लोगों ने कहा है कि वह उस इलाके में 30 साल से रह रहे हैं और बिना किसी पुनर्वास योजना के उन्हें वहां से हटा दिया गया.

अहमदाबाद.  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए यहां स्थित एक झुग्गी कॉलोनी से हटाए गए 318 लोगों ने पुनर्वास के लिए गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया है. मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बिरेन वैष्णव की खंडपीठ ने सोमवार को विस्थापितों की याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने याचिका की अग्रिम प्रतियां पश्चिम रेलवे, ‘नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन’ और अहमदाबाद नगर निगम को देने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी.

श्रमिकों के संगठन ‘बंदकाम मजदूर संगठन’ द्वारा दायर की गई याचिका में साबरमती क्षेत्र की जेपी नी चाली झुग्गी में रहने वाले लोगों ने कहा है कि वह उस इलाके में 30 साल से रह रहे हैं और बिना किसी पुनर्वास योजना के उन्हें वहां से हटा दिया गया.

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याचिका के अनुसार, नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन ने मौखिक तौर पर पुनर्वास का आश्वासन दिया था लेकिन रेलवे प्रशासन द्वारा झुग्गी में रहने वालों को 22 फरवरी को 2021 को खाली करने का नोटिस दिया गया. याचिका में यह भी कहा गया है कि अहमदाबाद नगर निगम और पश्चिम रेलवे के सामने पक्ष रखे जाने के बावजूद रेलवे प्रशासन ने 15 मार्च को निवासियों के घर तोड़ने शुरू कर दिए. याचिका में अनुरोध किया गया है कि झुग्गी निवासियों को जल्द से जल्द पुर्नवास कराया जाए.ये भी पढ़ें  राजस्थान के 7 जिलों से गुजरेगी बुलेट ट्रेन, उदयपुर में प्रोजेक्ट के लिए नोडल अफसर तैनात

देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 

यह देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है. मुंबई-अहमदाबाद के 508.17 किमी लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का 155.76 किमी हिस्सा महाराष्ट्र में, 348.04 किमी गुजरात में और 4.3 किमी दादरा एवं नगर हवेली में है. इस परियोजना की लागत 1.1 लाख करोड़ रुपये है. जिसमें से जापान इंटरनेशनल को ऑपरेशन एजेंसी 81 फीसदी फाइनेंस कर रही है.

इस परियोजना में 90 हजार लोगों को मिलेगा रोज़गार

मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 2017 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ समझौता किया था. आपको बता दें 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना के दौरान करीब 90 हजार लोगों को रोज़गार मिलेगा. वहीं इस ट्रेक के पूरा हो जाने के बाद इसपर 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से देश की पहली बुलेट ट्रेन चलेगी.









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