इंदौर के लॉ स्टूडेंट सार्थक ने दुनिया को कहा अलविदा, ईश्वर की मर्जी के आगे सोनू सूद भी बेबस


सोनू सूद की मदद से सार्थक का इलाज किया जाना था.

Indore News: सार्थक को कोरोना (Corona) हो गया था. पिछले 15 दिन से शहर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके फेफड़े 98 प्रतिशत तक खराब हो चुके थे.

इंदौर. लॉ स्टूडेंट सार्थक गुप्ता नहीं रहा. कोरोना (Corona) संक्रमित सार्थक के दोनों फेफड़े खराब हो गए थे. हैदराबाद में लंग्स ट्रांसप्लांट किया जाना था. इलाज पर 2 करोड़ रुपये खर्च होने थे. परिजन इतना पैसा जुटाने में असमर्थ थे. उन्‍होंने आर्थिक मदद की गुहार भी लगाई थी. कोरोना काल में जरूरतमंदों के लिए सामने आने वाले अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) से भी मदद मांगी गई थी. वह सार्थक की मदद के लिए सामने भी आए, लेकिन होनी के आगे सब बेबस हो जातो हैं. इंसानों की एक नहीं चलती है. सार्थक को हैदराबाद ले जाने की पूरी तैयारी हो गई थी, लेकिन इससे पहले ही वह इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए.

सार्थक गुप्ता महज 25 साल की उम्र में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते-लड़ते कोरोना जंग हार गए. उनके परिवार ने आर्थिक मदद के लिए फिल्म अभिनेता सोनू सूद से मदद की गुहार लगाई थी. सोनू सूद ने एयर एंबुलेंस से लेकर हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में उनके इलाज तक की व्यवस्था की थी. सोमवार को सार्थक को एयर एंबुलेंस से हैदराबाद ले जाने की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण उन्हें एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका. मंगलवार को उन्हें एयरलिफ्ट किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही सुबह 8:30 बजे सार्थक की इलाज के दौरान मौत हो गई.

फेफड़े 98% खराब

सार्थक को कोरोना हो गया था. उनका पिछले 15 दिन से शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. उनका फेफड़ा 98 प्रतिशत खराब हो चुके थे. सार्थक मोहक अस्पताल में भर्ती थे. उनका सीआरपी लेवल बढ़ गया था और ऑक्सीजन लेवल तेजी के साथ कम हो रहा था. शहर के दूसरे अस्पतालों में भी उनका इलाज हो चुका था, लेकिन हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि वह 7 दिन से वेंटिलेटर पर थे. इस युवक के पिता नितिन गुप्ता पेशे से एडवोकेट हैं. सार्थक उनका इकलौता बेटा था.

मामा ने की मदद की अपील

हर तरफ से हताश और निराश होने के बाद सार्थक के मामा ने उसके इलाज में मदद के लिए फिल्म स्टार सोनू सूद से भी गुहार लगाई थी. सोनू सूद, कोरोना के संक्रमण काल के दौरान देश में उभर कर आया एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसने हर जरूरतमंद की मदद की. इसकी शुरुआत हुई थी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने से. और अब तो उनका ये काम एक मुहिम बन चुका है.









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