

नई दिल्ली। (सद्वार्ता) भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। देश के सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों ने पहली बार कुछ समय के लिए 100 गीगावाट से अधिक बिजली उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है।

13 जुलाई को सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन 103.7 गीगावाट तक पहुंच गया। इसके बाद 15 जुलाई को यह उपलब्धि दोबारा दोहराई गई, जब उत्पादन पहले 102.42 गीगावाट और फिर 100.9 गीगावाट दर्ज किया गया।
इसी दौरान कुछ मिनटों के लिए देश की कुल बिजली मांग का 42.79 प्रतिशत हिस्सा केवल सौर और पवन ऊर्जा से पूरा किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
स्वच्छ ऊर्जा अभियान को मिली बड़ी सफलता
भारत सरकार की नीतियों, तकनीकी विकास और निवेश में बढ़ोतरी के कारण नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में 55.3 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता जोड़ी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक विस्तार है। भारत जून 2025 में ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर चुका था।
जलविद्युत सहित भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जून 2025 तक 288 गीगावाट पहुंच गई थी। वहीं सौर और पवन ऊर्जा की संयुक्त क्षमता जुलाई के अंत तक लगभग 225 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है।
बढ़ती क्षमता के साथ ग्रिड प्रबंधन की चुनौती
हालांकि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता देश के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ बिजली ग्रिड के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं।
सौर और पवन ऊर्जा मौसम पर निर्भर होती है। बादल आने पर सौर उत्पादन तेजी से घट सकता है और हवा की गति कम होने पर पवन ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बिजली व्यवस्था को तुरंत अन्य स्रोतों से उत्पादन बढ़ाना पड़ता है।
यही कारण है कि अब बिजली ग्रिड की क्षमता और लचीलेपन की परीक्षा शुरू हो गई है।
बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड पर जोर
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) अब केवल नई बिजली क्षमता जोड़ने पर नहीं, बल्कि ग्रिड को अधिक मजबूत और लचीला बनाने पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए जरूरी कदमों में शामिल हैं—
- बड़े स्तर पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Storage)
- मांग के अनुसार बिजली उपयोग को नियंत्रित करने वाली डिमांड रिस्पॉन्स व्यवस्था
- तेजी से उत्पादन बढ़ाने और घटाने में सक्षम बिजली संयंत्र
जिस दिन भारत ने 42.79 प्रतिशत बिजली सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त की, उसी दिन सूर्यास्त के बाद पारंपरिक बिजली संयंत्रों को लगभग 100 गीगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की भरपाई करनी पड़ी।
भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अब हर नया रिकॉर्ड केवल बिजली उत्पादन का आंकड़ा नहीं होगा, बल्कि पूरे बिजली तंत्र की क्षमता की परीक्षा भी होगा।
ट्रांसमिशन लाइनें, बैटरी स्टोरेज, बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) और बिजली बाजार सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।
यदि ग्रिड इतनी बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा को संभालने में सक्षम नहीं हुआ तो उत्पादन रोकने (Curtailment), बिजली कीमतों में उतार-चढ़ाव और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
100 गीगावाट से आगे की राह
भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा अब केवल क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना होगी कि देश का बिजली तंत्र आधुनिक, मजबूत और लचीला बन चुका है।
क्योंकि बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन उस बिजली को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से हर उपभोक्ता तक पहुंचाना ही वास्तविक सफलता होगी।
भविष्य का सबसे बड़ा रिकॉर्ड केवल 110 या 120 गीगावाट उत्पादन नहीं होगा, बल्कि वह दिन होगा जब 100 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन सामान्य प्रक्रिया बन जाएगा और देश का ग्रिड इसे बिना किसी बाधा के संभाल सकेगा।


