कविताये

डॉलर की भूख

देखे होगें उसने बड़े - बड़े सपने अपने हाथों से बुने होगें छोटे - छोटे ऊनी कपड़े सहे होगें जिंदगी के लाख लफड़े... | उंगली पकड़ कर चलना सिखाया होगा…
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खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार

खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार अपरिचित पास आओ आँखों में सशंक जिज्ञासा मिक्ति कहाँ, है अभी कुहासा जहाँ खड़े हैं, पाँव जड़े हैं स्तम्भ शेष भय की परिभाषा हिलो-मिलो…
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माँ के आंसू

एक बच्चे ने अपनी माँ को रोते देखा तो पापा से पुछा माँ क्यो रोती है.?? पापा ने जवाब दिया सारी औरते बिना बात के रोती है.. बच्चा कुछ समझ…
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