
अहमदाबाद/नई दिल्ली: देश का एक ऐसा शहर जिसे ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है और जिसे महात्मा गांधी की कर्मभूमि भी माना जाता है। अहमदाबाद न सिर्फ कपड़ा उद्योग के तेजी से विकास के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान ने इसे ऐतिहासिक महत्व भी दिया।
क्यों कहा जाता है ‘भारत का मैनचेस्टर’?
गुजरात के अहमदाबाद शहर को इसका उपनाम कपड़ा उद्योग के विकास के कारण मिला। ब्रिटिश शासन के दौरान यहां की मिलें और टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने शहर को व्यापारिक केंद्र बना दिया। बाद में गुजरात राज्य बनने के बाद यह शहर राजनीतिक, शैक्षिक और आईटी क्षेत्र में भी उभरता केंद्र बन गया। बीआरटीएस, साबरमती रिवरफ्रंट, मल्टीप्लेक्स और आधुनिक इमारतों ने शहर की तस्वीर बदल दी है।
स्वतंत्रता आंदोलन और गांधीजी की कर्मभूमि:
20वीं सदी में अहमदाबाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। मजदूरों के अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलन यहां हुए। महात्मा गांधी ने साबरमती नदी के किनारे गांधी आश्रम की स्थापना की, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि माना।
अहमदाबाद का ऐतिहासिक विकास:
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शहर की स्थापना 1411 में सुल्तान अहमद शाह ने गुजरात सल्तनत की राजधानी के रूप में की।
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13वीं शताब्दी में यह ढोलका के वाघेला राजवंश के अधीन आया।
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14वीं शताब्दी में गुजरात दिल्ली सल्तनत में मिला।
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ब्रिटिश शासन के दौरान अहमदाबाद में सैन्य छावनी स्थापित हुई और यह बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा बना।
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1970 तक यह गुजरात की राजधानी भी रहा।
दिलचस्प तथ्य:
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अहमदाबाद भारत का सातवां सबसे बड़ा शहरी समूह है।
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शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है और अहमदाबाद जिले का प्रशासनिक केंद्र है।
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कपड़ा उद्योग के कारण इसे ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है।
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महात्मा गांधी ने इसे अपनी कर्मभूमि माना और यहां स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अहमदाबाद न केवल आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी देश की पहचान को मजबूत करता है।
