शिवपुरी ब्युरो चीफ आशीष जैन रिपोर्टर अतुल जैन की रिपोर्ट

मुंगावली में एक सरकारी कॉलेज में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के बाद सरकार ने प्राचार्य को निलंबित कर दिया | उच्च शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है| कॉलेज प्राचार्य डॉ बी एल अहिरवार के निलंबन के विरोध में आज ग्वालियर में कांग्रेस और अजजा मोर्चा के आधा सैकड़ा पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं ने उच्चशिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया के सरकारी बंगले पर प्रदर्शन किया है| वही सिंधिया ने भी सरकार की इस कार्रवाई को लेकर हमला बोला है|

सिंधिया ने ट्वीट कर सरकार की कार्रवाई की निंदा की है| सिंधिया ने लिखा है “असंवेदनशील सरकार का यह एक तानाशाहीपूर्ण आदेश है जो पूर्वाग्रह पूर्ण घोर ही निंदनीय कृत्य है।” सिंधिया आगे लिखते हैं ” मुँगावली डिग्री कॉलेज के दलित प्राचार्य,डॉ. अहिरवार को बिना किसी नोटिस या ठोस वजह, सरकार ने निलंबित कर अपनी दलित विरोधी मानसिकता उजागर कर दी” ” क्या एक सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र के महाविद्यालय में बुलाना इतना बड़ा अपराध है कि उस महाविधालय के प्राचार्य को निलंबित कर दिया जाए”

दरअसल, मंगलवार को गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय में एनएसयूआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे थे| जहा सिंधिया ने विद्यार्थियों को सम्बोधित भी किया और महाविद्यालय के लिए अपनी सांसद निधि से 3 लाख की राशि स्वीकृत की। इसमें एक लाख की राशि फर्नीचर के लिए, एक लाख की राशि पुस्तकों के लिए, 75 हजार की राशि खेल सामग्री के लिए और 25 हजार की राशि पीने के पानी के लिए मंजूर की। इसके बाद बुधवार को उच्च शिक्षा विभाग ने गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय मुंगवाली के प्राचार्य डॉ बी एल अहिरवार को निलंबित कर दिया| निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्राचार्य पर राजनीति दल के चुनाव चिन्ह और बैनरों को लगवाकर एनएसएस का कार्यक्रम कराया| जिसमे राजनीति दल के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा और राजनीति दल के बैनर महाविद्यालय प्रांगण में लगाए गए और विद्यार्थियों को पैसो का प्रलोभन देकर किसी राजनीति दल को वोट देने की सिफारिश करने और शैक्षणिक वातावरण के विरुद्ध गतिविधियां संचालित करने का आरोप है| जिसके चलते उच्च शिक्षा विभाग ने मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन माना है|