आज महिला शक्ति कहा नहीं है जिधर नजर दौड़ाएंगे आपको हर दौड़ में महिला पुरुषों के साथ कन्धा से कन्धा मिलकर दौड़ में शामिल मिलेगी आज हम एक ऐसी ही महिला की बात कर रहे है जिन्होंने ग्लैमर की दुनिया में संघर्ष के साथ अपनी एक अलग पहचान बनायीं तो आईये हम उन्ही की जुबानी जानते है उनकी संघर्षमय यात्रा सच्चा दोस्त प्रतिनिधि अनामिका चौरसिया के साथ बात चित का मुख्य अंश पेश है आपके लिए …

सच्चा दोस्त प्रतिनिधि अनामिका चौरसिया – हेलो शिल्पी जी –
सिंगर शिल्पी पॉल – हेलो अनामिका
अनामिका – शिल्पी जी कैसे आप…
शिल्पी पॉल – मैं ठीक हुँ।
अनामिका – शिल्पी जी मुझे अपने बारे मे कुछ बताइये
शिल्पी पॉल – मेरा नाम शिल्पी पॉल, मेरा जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुआ। मैंने संगीत शिक्षा पॉच साल की उम्र से शुरू किया, मेरे पिता जयदेव पॉल ने हारमोनियम गिफ्ट किया ओर माता हीरा देवी पॉल को बहुत शौक था। उन दोनों की प्रतिष्ठा से मैने संगीत शुरू किया मैंने बचपन से बहुत कॉम्पिटिशन में भाग लिया। इंडियन रेडियो में ग्रेडेड आर्टिस्ट और प्राइवेट चैनल में भी मैंने गाया गया है। नेशनल भारतीय संगीत से मुझे स्कॉलरशिप प्राप्त हुई। बड़े बड़े आर्गेनाईजेशन में पार्टिसिपेट किया और पहला प्राइज़ जीता। मुम्बई की आर्गेनाईजेश जहाँ उभरते कलाकार उधर से मुझे टाइटल प्राप्त हुआ।
अनामिका – शिल्पी जी कैसे संगीत को आपने अपना कैरियर बना लिया ?
शिल्पी पॉल – दरअसल छोटे पन से मैंने गाना शुरू किया कभी सोचा नही की मुझे कलाकार ही बनना, संगीत को लेकर ही आगे बढ़ना है जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ते गये मुझे महसूस हुआ, भारतीय संगीत में जो रस, शांति इसमे मिलती यह कहि ओर नही मिल सकती। लोगो को मेरा संगीत पसन्द आने लगा तारीफे मिलने लगी मुझे ,बड़े बुजर्ग, माता पिता, गुरु के आशिर्बाद से इसे आगे बढ़ने का सोच लिया धीरे धीरे कब यह कैरियर बन गया पता नही चला।
अनामिका – संगीत करते आपको कितने साल हो गए ?
शिल्पी पॉल – शुरू पाँच साल की उम्र में मगर में उन्हें नही गिनुगी क्योकि वो मेरा बचपन था। आज मुझे बीस साल हो गए गाते हुए। मैंने रविन्द्र नाथ यूनिवर्सिटी को भारतीय संगीत से पहले प्राइज जिताया.
अनामिका – शिल्पी जी आपको अपने संगीत क्षेत्र में बहुत सारी प्रॉब्लम को फेस करनी पड़ी होंगी?
शिल्पी पॉल – मुश्किले तो सबको झेलनी पड़ती है, खास कर औरत को जब वो अपने कला को अपना कैरियर बना ले। नॉर्मल जॉब ओर ओरिण्टेड लाइफ हटकर होती है। मेरी ससुराल के लोग भी बहुत मदद करते ओर आगे बढ़ने के लिए हौसला बढ़ाते। सम्सया तो डे टू डे आती सबको इसका सामना करना पड़ता। मेरी शादी 2005 में हुई। मेरा बेटा भी बहुत मदद करता। चौथी क्लास में है टेबल में भी तलीन ले रहा अभी एक माँ को अपने बच्चो का सपोर्ट बहुत जरूरी है। फैमिली तो मदद करेगी क्योकि बड़ी और समज होती उन्हें पता किसकी मदद करनी किस की नही मगर बच्चा मदद करता तो बहुत सुकून मिलता मन को.
अनामिका – शिल्पी जी फैमिली सपोर्ट आपको मिला कि नही ?
शिल्पी पॉल – मुझे मेरी फैमिली का बहुत सपोर्ट मिला, मै आपने माता पिता की चाहत और उनके आशीर्वाद से यहाँ तक पहुँची हूँ। मेरे सारे गुरु को धन्यबाद करती हूं, सब पेरेंट्स अपने बच्चो के लिए करते मगर मेरे पेरेंट्स ने जो भी काम को कभी बीच मे नही छोड़े. अपने काम को मेरे संगीत से बहुत अलग रखा, मै छोटी थी हर जगह पापा मुझे लेकर जाते थे। उन्होंने मेरे संगीत करने पर बहुत ख्याल रखा में प्रयास अच्छे से कर रही की नही। आज भी बहुत ख्याल रखते की में संगीत का प्रयास ढ़ंग से करती हूं। कि नही, एक अच्छे संगीतकार या कोई हो उसको अपनी फैमिली का सपोर्ट बहुत जरूरी हैं।
अनामिका – शिल्पी जी अब तक अपने कितने अवार्ड अपने नाम किये उस बारे में कुछ बताये?
शिल्पी पॉल – मुझे छोटे से ही बहुत प्राइज मिले, ऑल ओवर इंडिया आर्गेनाईजेशन से अवार्ड मिला। शायद वह से अवार्ड मिल सकता मुझे। एक मे अपनी आर्गेनाईजेशन शुरू करने वाली उसका नाम बताती आपको अंतर गंधार नाम रखूंगी। और भी बहुत सारे प्राइज मिले मुझे। और सबसे बड़ा अवार्ड तो मेरे लिए यह होगा की जो सच्चा दोस्त न्यूज़ मुझे मेरे लाखो प्रशंसकों तक इस वार्ता के माध्यम से पंहुचा रहा है इसके लिए विनायक जी को थैंक्स जो उन्होंने हर भारतीय कलाकार को समय समय पर प्रोहत्साहित करते है
अनामिका – आपकी लाइफ में संगीत का कोई ऐसा मूवमेंट या यादगार पल जो सच्चा दोस्त से शेयर करना चाहते ?
शिल्पी पॉल – बहुत सारे मूवमेंट मगर आज भी मैं एक मूवमेंट को बहुत याद करती हूँ। रविन्द्र भारतीय यूनिवर्सिटी में मुझे एक कॉम्पिटिशन में अपनी कला को प्रस्तुत करने का मौका मिला उधर से मुझे पहला प्राइज मिला सब दोस्त और सीनियर भाई लोगो ने कंदे पर उठा लिया। आज भी वो पल मिझे यदि आता, दूसरी बात यह जो उत्तरपाड़ा संगीत चक्रा यह बहुत पुरानी म्यूजिक संसथान है यहाँ बहुत सारे लोग गा बजाकर गए। 2013 मैंने परफॉरमेंस 3500 लोगो के सामने प्रस्तुति दी। वह लोग इतने लोगो को सुन्न चुके मुझे थोड़ा डर था, मगर मैंने प्रस्तुत किया फिर मै निचे उतरी तो उधर का एक आर्गेनाइजर आया मुझे ‘बोला कि आपको पीछे पंडित अजय चक्रवती जी बुला रहे। मैं उनसे मिली उनको मेरा संगीत पसन्द आया और बहुत सारी बाते की बहुत कुछ संगीत के बारे में बताया। वो समय मेरे लिए बहुत ख़ास यादगार पल है।
अनामिका – आज की जो न्यू जनरेशन उससे आप क्या कहना चाहेंगी कोई टिप्स संगीत स्टूडेंट्स के लिए?
शिल्पी पॉल – आज का जो जमाना बहुत फ़ास्ट बच्चो को, फैमिली में किसी को किसी के लिए समय नही है। किसी को समय नही की दो घडी बैठ कर अच्छे से बात कर सके। धीरज नही मै तो यही कहूंगी एक अच्छा इंसान और ज्ञान के लिए धैर्य बहुत जरूरी है। लिमिट में रहे हर चीज को जाने। मैं अपने बच्चे और स्टूडेंट को यही बोलती धीरज रखो हर चीज थोड़ा थोड़ा कर के सीखो अच्छा इंसान बनने के लिए धीरज बहुत जरूरी है। अच्छे लोगो के साथ और अच्छा ज्ञान लेने की कोशिश करो।
अनामिका – वेस्टर्न और क्लासिकल इंडिया म्यूजिक में फर्क कितना क्या समय के साथ वेस्टर्न म्यूजिक ज्यादा बढ़ावा दे रहे लोग?
शिल्पी पॉल – भारतीय शास्त्रीय संगीत और वेस्टर्न म्यूजिक में बहुत डिफरेंट है। फिर भी एक दूसरे से जुड़े हुए है, जो वेस्टर्न म्यूजिक उसमे समय के साथ साथ परिवर्तन उसकी प्रेजेंटेशन के कारण चल रहा, मगर आज भी भारतीय संगीत है, बहुत लोग सुनते ओर पसन्द करते है। जो भारतीय संगीत उसके प्रेजेंटेशन पर काम करना चाहिए, इससे लोगो की जो चाहिए उससे भारतीय संगीत में मिले। जैसे वेस्टर्न में खाने, पीने, सोना, पहना हर चीज वेस्टर्न तरीके से हो गया। वैसे ही भारतीय शास्त्रीय संगीत समय के अनुसार होना चाहिए जैसे एक बच्चे को आप बॉईल सब्जी खिलाते तो बच्चा नही खायेगा, उसी को थोड़ा फ्राई और मीर्च, मसाले डाल कर दोगे तो बच्चा अच्छे से खएगा। संगीत को धीरे धीरे प्रयास करो देखा देखी बिल्कुल मत करो जितना धैर्य उसका फल उतना ही मीठा होगा। मगर भारतीय संगीत जो रूट, रंग एक बार किसी के अंदर घुस गया, तो वह पागल हो जाएगा। और उसका इसके अलावा किसी चीज में मन नही लगेगा, इसे अपने अपने तन और मन से अपना लेगा। लोग सोचते कि भारतीय संगीत बहुत कठिन यह करना मुश्किल बहुत। मगर इसके अंदर झांको तो दीवाने बन जाओगे
अनामिका – आपको कभी स्टेज फेस करने में डर नही लगा ?
शिल्पी पॉल – मैंने बचपन से गाना शुरू किया, मुझे भगवान की देन से हर जगह पहला प्राइज जीता। मुझे कभी कॉंफिडेंट और ओवर कॉंफिडेंट दोनो नही था। बचपन मे शुरू किया तो कोई टेंशन नही उस समय समज नही टेंशन क्या होता। बड़े में थोड़ा डर लगा मगर उसको भी फेस की सामने गुरु माँ बैठे, माता पिता तो उनके आशीर्वाद से हिम्मत बड़ी तो डर कहा गया पता नहीं चला।
अनामिका – आपके अनुसार आपकी यह संगीत यात्रा कहा तक पहुचेगी?
शिल्पी पॉल – संगीत की कोई लिमिट नही जितना सीखोगे ,गाओगे उतना अच्छा करोगे रिहास बहुत जरूरी । गाते गाते मुझे बहुत कुछ पता चला कि पहले केसा ओर अब कितना अंतर है। मैंने अपना पूरा मन संगीत में डुबो दिया , आगे भी इसे करूँगी आखरी साँस तक मैं संगीत करूँगी । यह सब जो मुझे पहचान मिली वो में अपने बच्चो और स्टूडेंट को बताऊंगी क्योकि वह कोई गलती ना करे।
अनामिका – आपका पसंदीदा संगीत कोनसा है, कुछ सुना दीजिये?
शिल्पी पॉल – मुझे चुंदरी दादरा सबसे ज्यादा पसंद है। मगर सावन चल रहे तो मै आपको सुनाती हुँ –झूला धीरे से झुलाओ बनवारी रे सवारियाँ।
झूला धीरे से झुलाओ बनवारी रे सवारियाँ।

झूला धीरे से झुलाओ बनवारी रे सवारियाँ।