जात न पूछो साधु की नाम न पूछो अधिकारी का…
घंसौर से पत्रकार साकेत जैन की रिपोर्ट : मध्यप्रदेश का जनसम्पर्क वर्तमान में  महानता की पराकाष्टा पर है बजट सत्र में माननीय जनसम्पर्क मंत्री नरो में उत्तम नरोत्तम मिश्रा ने घोषणा की थी की श्रद्धा निधि 6000 से बड़ा कर 7000 की जाएगी जिसका अभी तक पता नहीं, बीमा योजना में माता पिता को शामिल करेंगे जो शायद जनसम्पर्क अधिकारी नई बीमा योजना में भूल गये, मंत्री महोदय ने यह भी घोषित कर खूब वाहवाही ली थी कि जिन पत्रकारों की अधिमान्यता नहीं है उन्हे भी बीमा योजना का फायदा मिलेगा (चूकि कद्दावर मंत्री है इसलिए बिधानसभा की अवमानना इनपर नहीं लगेगी} लेकिन उसके लिये फार्म 16 की अनिवार्यता रखी गयी है अब इन सरकारी मुर्खचंदो को कोण समझाए की कई ऐसे पत्रकार भी है जिनको उनके पेपर मालिक ही अपना कर्मचारी नहीं मानते तो फार्म 16 कहा से देंगे उल्टा समाचारपत्र मालिक एजेंसी टाइप देते है और बेध अबैध बसूली के लिये मजबूर करते है। उदाहरण है कमलेश जैन का मर्डर जो की नईदुनिया के लिये कार्य करते थे लेकिन उनके समाचारपत्र ने ही उनको पत्रकार न माना ,यहाँ एक बात और है कई पत्रकार स्वतंत्र रूप से अपनी मासिक पत्रिका और पाछीक पेपर निकालते है जिसके लिये अधिमान्यता के कोई नियम ही नहीं है मतलब जनसम्पर्क उसे पत्रकार नहीं मानता तो फिर बीमा नहीं। इसीलिये इस सरकार को घोषणावीर सरकार कहा जाता है।
अब आते है वेबसाइट के मुद्दे पर तो यह तो बिभाग के लिये इतना कमाई का मामला है की विज्ञापन अत्यंत गोपनीय तरीके से बांटे जाते है मंत्री को आवेदन दो या फिर मुख्य सचिव को अधिकारी को दो या कर्मचारी को आपका आवेदन कहा जायेगा आपको क्या किसी को पता नहीं चलेगा भले ही आपकी कितनी हिट्स हो या आप नियमित रूप से अपनी वेबसाइट को संचालित कर रहे हो क्यों की इनकी नियमबली में एक शब्द है आवश्यकता / उपयोगिता / अवसर / बजट के अनुसार दिये जायेगे। जिसमे आप इनसे जीत नहीं सकते , हां एक बात और आरटीआई का तो यहाँ खुलमखुला माखौल उड़ाया जाता है आपके द्वारा मांगी गयी जानकारी या तो दी नहीं जाती ,अधूरी दी जाती है या फिर बताया जाता है की एकत्रित्र की जा रही है  अगर सबूत मांगे जायेगे तो हमारे पास है।
अब बात करे यहाँ पर जमे अधिकारियो की तो वह कई सालो से यहाँ जमे पड़े है जबकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है की तीन साल से ज्यादा सरकारी कर्मचारी एक जगह नहीं रह सकते लेकिन कौन कितने सालो से इस विभाग में भोपाल में जमा है यह सबको मालूम है इसलिये कहा जाता है की शिवराज सरकार को अधिकारी चलाते है
आज इतना ही , आगे कल……………………….…………